क्या आपको तिरंगा फहराने के नियम मालूम है! चलिए जानते हैं

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स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ का नारा स्वातंत्रता के महानायक बाल गंगाधर तिलक ने दिया था। उनके जीवन काल में तो न सही लेकिन ये अधिकार देश को 15 अगस्त, साल 1947 को मिला। भारत की स्वतंत्रता के कुछ दिन पहले 22 जुलाई, साल 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में देश के राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया। उसी दिन से हमारा राष्ट्रीय ध्वज देश के लिए गौरव का प्रतीक बना हुआ है। लेकिन क्या आप राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कानूनों के बारे में जानते हैं? आज हम उन्हीं कानूनों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। जिन्हें भारतीय ध्वज संहिता-2002 में बताया गया है। इसे 26 जनवरी, साल 2002 को लागू किया गया था। इसमें तिरंगे को फहराने से संबंधित कुछ नियमों के बारे में बताया गया है।

ध्वज को फहराने से संबंधित नियम

राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान देने की प्रेरणा के लिए उसे शैक्षिक संस्थानों में फहराया जाना चाहिए, विद्यालयों में ध्वजारोहण में निष्ठा की एक शपथ को भी शामिल किया गया है, किसी सार्वजनिक, निजी संगठन और शैक्षिक संस्थान के सदस्यों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन सभी दिनों अवसरों, आयोजनों मान सम्मान देने के लिए फहराया जा सकता है, संहिता की धारा 2 में देश के सभी नागरिकों को अपने परिसर में ध्वज फहराने का अधिकार दिया गया है। जहां भी तिरंगा लहराया जाए वहां से वह स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और उसे सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाना चाहिए। सरकारी भवनों पर झंडा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जा सकता है। विशेष अवसरों पर इसे रात के वक्त भी फहराया जा सकता है। तिरंगे को हमेशा स्फुर्ति के साथ लहराया जाना चाहिए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाना चाहिए। जब तिरंगे को किसी भवन की खिड़की, बालकनी या फिर अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो बिगुल की आवाज के साथ फहराया और उतारा जाना चाहिए।

तिरंगे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है। उसे इस प्रकार फहराया जाना चाहिए कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो तिरंगा दाहिने ओर हो। झंडा अगर किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाता है तो उसे सामने की ओर बीचोबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाना चाहिए। झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका हुआ होना चाहिए। संप्रदायिक लाभ, पर्दों या वस्त्रों के रूप में तिरंगे का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए जहां तक संभव हो सके इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए। तिरंगे को आशय पूर्वक धरती, जमीन या पानी से स्पर्श नहीं कराना चाहिए। तिरंगे को वाहनों के ऊपर, बगल और पीछे, रेलों, नावों या वायुयान पर लपेटा नहीं जा सकता है। ध्वज को वंदनवार, ध्वज पट्ट या गुलाब के समान संरचना बनाकर उपयोग नहीं किया जा सकता। फटा या फिर मैला झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए। किसी दूसरे तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या फिर उससे ऊपर नहीं लहराया जाना चाहिए और न ही उसके बराबर रखा जाना चाहिए। झंडे पर कुछ लिखा या फिर छपा हुआ नहीं होना चाहिए।

तो अब आप समझ गये होंगे कि तिरंगे को फहराने से पहले क्या क्या नियम अपनाना चाहिए और ऐसा जरूर करना चाहिए क्योंकि तिरंगा हमारे गौरव का प्रतीक है हमारी शान है हम इस  पर मरने मिटने के लिए हर वक्त तयार रहते हैं इसलिये इसकी शान बनी रहे इसके लिए अपनी आने वाली पीढी को तिंरगा का कैसे सम्मान करें ये भी बताना बहुत जरूरी है, तो फिर इन नियमो का ध्यान रख कर जश्न ए आजादी का जश्न घर पर रह कर मनाये।


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