28 दफा चुनाव हारने के बावजूद नहीं हारा हौसला, एक बार फिर से चुनावी मैदान में

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Titar_Singh

हर चुनाव में हमें कई ऐसे उम्मीदवारों की कहानी सुनने को मिल ही जाती है, जो अपने-आप में काफी रोचक होती है| ऐसी ही कुछ कहानी राजस्थान में श्रीगंगानगर निवासी तीतर सिंह की भी है| लगातार 28 चुनाव हार चुके श्रीगंगानगर निवासी तीतर सिंह एक बार फिर चुनावी मैदान में अपना किस्मत आजमा रहे है| वो 3 बार वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, 10 बार विधानसभा चुनाव और 8 बार लोकसभा चुनाव हार चुके है| ऐसे में यह 9वां मौका है, जब एक बार फिर से तीतर सिंह चुनाव में अपनी तकदीर अजमा रहे है| तीतर सिंह अपनी एक पुरानी जीप में चार-पांच साथियों के साथ गांवों में जाकर लोगो से जनसंपर्क कर रहे है| तीतर सिंह के अलावा उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी ट्रेक्टर में सवार होकर संसदीय क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में जाकर तीतर सिंह के पक्ष में मतदान करने की अपाल कर रही है|

पत्रकारों से बातचीत के दौरान तीतर सिंह ने कहा कि अगर वे चुनाव जीतते है तो वे न्यूनतम आय बढ़ाने को लेकर संसद में अपनी बात रखेंगे। वहीं, हर गरीब व्यक्ति को घर और पांच बीघा कृषि भूमि सरकारी की तरह से उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करने के साथ ही श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में छोटे-छोटे काम-धंधे स्थापित कराने को लेकर कोशिश करेंगे। खुद साक्षर तीतर सिंह ग्रामीण बच्चों के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने का भी वादा करते है। मालूम हो कि अब तक देश में सबसे ज्यादा बार चुनाव में हारने का रिकॉर्ड जोगिन्द्र सिंह धरती पकड़ का रहा है|

गंगानगर जिले के गुलाबेवाला गांव में रहने वाले तीतर सिंह चुनाव तो लड़ रहे हैं। लेकिन, हैरान करने वाली बात यह है कि तीतर सिंह मनरेगा मजदूर हैं उनके पास संपत्ति के नाम पर एक रुपये भी नहीं हैं। वह लोगों के दान किए हुए रुपयों से चुनाव लड़ रहे हैं और वह चाहते हैं कि कम से कम एक बार उन्हें चुनाव में जीत मिले। तीतर सिंह मनरेगा मजदूरी करके 142 रुपये प्रतिदिन कमाते हैं। ख़ास बात यह है कि उनके पास एक पैसा तक नहीं है।

चुनावी हलफनामे में तीतर सिंह ने चल व अचल संपत्ति वाले और आपराधिक बैकग्राउंड वाले कॉलम में निल (कुछ नहीं) लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि आजीविका के लिए वह मनरेगा मजदूर और कृषि का काम करते हैं। वह अब तक नौ विधानसभा चुनाव और 9 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा वह पंचायत और नगर निगम स्तर के चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि तीतर सिंह के दो बेटे- अकबर सिंह और रकपाल सिंह भी कृषि मजदूर है और मनरेगा में मजदूरी करते है|

 


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