आपदा, संकट में लोग और उस संकट में सबके साथ खड़ा एक चेहरा – नरेंद्र दामोदर दास मोदी

करोना संकट के वक्त पीएम मोदी का वो भाषण याद आ रहा है, जो वो चुनाव के वक्त कहते थे कि उनकी सरकार गरीबों के प्रति समर्पित होगी। सरकार की हर योजना देश के सबसे कमजोर लोगो को फायदा पहुंचा सके, इसको ध्यान में रखकर तैयार की जायेगी। आज उनका ये कथन सच होता दिख रहा है क्योकि जब आर्थिक तौर पर गरीबो को पैसे की जरूरत है तो मोदी सरकार ने लोगो तक 1.70 करोड़ रूपये पहुंचा दिये है। चलिये जानते है कि पीएम मोदी ने कैसे गरीबों तक पहुंचाई मदद।

महिलाओं के खाते में पहुंचाये पैसा

नमो सरकार ने सबसे पहले महिलाओं के जनधन खातो में सीधे पैसा डालने की बात कही। सरकार ने ऐलान किया कि लॉकडाउन के दौरान तीन महीने तक सरकार महिलाओं के खाते में रकम भेजेगी। इसको लेकर पहली किस्त के तौर पर 10,025 करोड़ रूपये सरकार ने 20.05 करोड़ महिलाओं तक पहुंचाई तो दूसरी किस्त 2,785 करोड 5.57 करोड़ महिलाओं तक पहुंचा चुके है। पहली बार देखा गया है कि कोई सरकार ने इतनी रकम सीधे गरीबों के खाते तक पहुंचाई है जिसे कोरोना संकट में उन्हे दिक्कतो से भिड़ने में मदद मिल सके इतना ही नही सरकार ने उज्जवला योजना के तहत तीन महीने तक गैसे सिलेंडर भी देने का फैसला किया है जो बहुत सराहनी कदम है।

वृध्द, विधवा, दिव्यांग के खातो में रकम

देश में बुजुर्ग जिन्हे पेंशन मिलती है या वो विधवा महिलाएं जिनका सहारा सिर्फ सरकारी पेंशन है या दिव्यांग जो इन पैसे से ही घर का खर्च चला रहे थे उनको बिलकुल दिक्कत न हो इसका भी पूरा ध्यान रखा गया जिसके तहत सरकार ने शुरू में ही ऐसे करीब 2 करोड़ से अधिक लोगो के खाते में 1,405 करोड़ रूपये की रकम पहुंचा दी, जिससे लॉकडाउन के दौरान इनका चूल्हा जलता रहे। सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार ने इस कदम को उठाने में तनिक भी देरी नही की, तभी आज ये लोग कोरोना काल में भी मुस्कुरा रहे है।

किसानों का रखा ध्यान

देश के अन्नदाता जो इस कठिन स्थिति में देश को अनाज से भर रहे है। उनका ध्यान भी सरकार पूरी निष्टा के साथ रख रही है। तभी तो पीएम किसान के तहत करीब 8 करोड़ से ज्यादा किसानो को अभी तक 16,394 करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता पहुंचा चुकी है। इसके साथ साथ किसानों को खेती करने में दिक्कत न हो इसका ध्यान रखा जा रहा है। तो जो फसल काट कर वो मंडी में बेचने आ रहे है उसका तुरंत भुगतान करके सरकार किसानों के लिये लगातार काम कर रही है।

निर्माण श्रमिकों की परेशानी को किया कम

कोरोना काल में सबसे ज्यादा दिक्कत अगर किसी को हुई है तो वो है निर्माण श्रमिकों को। एकाएक सड़क हो या फिर घर बनाने का काम या कोई दूसरा काम सभी रोक दिये जाने से इन लोगो को आर्थिक तंगी सबसे बड़ा सवाल बनकर उबर रही थी लेकिन इन लोगो के लिये सरकार ने आगे आते हुए हाथ बढ़ाया और इनकी मदद की। सरकार ने ऐसे 2.20 करोड़ श्रमिकों को 3,493 करोड़ रूपये की मदद पहुंचाई है। जिससे ये लोग खाली वक्त में दो जून की रोटी को लेकर परेशान न हो हां इसके साथ साथ इन लोगो को आसपास काम करने का मौका मिल सके, इसकी भी रणनीति बनाई जा रही है। कुछ जगहो में तो छूट देकर इस बाबत पहल भी हो चुकी है।

ईपीएफओ में 24% का योगदान

सरकार का ये फैसले से ये झलकता है कि वो देश के गरीबो को लेकर कितनी संवेदशील है, तभी तो सरकार ने करीब 45 लाख ईपीएफओ(EPFO) खाता धारको के खाते में 698 करोड़ रूपये की सहायता करके एक मिसाल पेश की है। इसके साथ साथ सरकार ने पैसा निकालने की सुविधा भी कामगारो को दी है। जो ऐसा निर्णय है जिसकी कितनी भी तारीफ की जाये वो कम है।

इसके साथ साथ अप्रैल महीने में ही 16 लाख टन अनाज को लोगो तक वितरित किया गया। 2 लाख 27 हजार करोड़ और 793.89 करोड़ के पैकेज की घोषणा सरकार कर चुकी है। दूसरी तरफ देश हो या विदेश हर जगह के नागरिको को लाने का काम भी मोदी सरकार करने में जुटी है। मतलब साफ है कि मोदी सरकार एक पैर पर खड़े होकर इस वक्त गरीबो को मदद पहुंचाने में जुटी है जबकि कुछ लोग उन्हे बदनाम करने के लिए गलत ऑकड़े पेश करके सिर्फ सुर्खिया बटोरने की कोशिश में लगे है। जबकि इसमे कोई दो राय नही कि मोदी सरकार ने वक्त रहते कोरोना संकट को भाप लिया था, तभी उससे निपटने की तैयारी पहले से ही शुरू हो गई थी। पहले तो लॉकडाउन करके पीएम ने देश की जनता की जान बचाई तो उसके बाद जहान बचाने में लग गये। हर दिन बैठक में रणनीति बनाई गई कि देश के गरीब जिनका रोजी रोटी पर संकट आ गया है उसतक कैसे मदद पहुंचाई जाये इसपर विशेष बल दिया गया, जिसे देखकर ये कहना गलत नही होगा कि ऐसी संवेदनशील सरकार सिर्फ मोदी जी की ही हो सकती है।