डिजिटल दुनिया जरूरी है लेकिन बेहतर स्वास्थ के लिए कुछ देर बनाये इससे दूरी

अब इसे मजबूरी कहें या जरूरत लेकिन सच तो ये है कि आज हमारा ज्यादा वक्त इन्हीं चीजों के बीच गुजर रहा है। जिससे वक्त तो लॉकडाउन में कट जा रहा है लेकिन मन को आराम नहीं मिल रहा है।  ऐसे में अगर आप डिजिटल और वास्तविक दुनिया के बीच संतुलन बना लें, तो शायद आपकी परेशानी दूर हो सकती है। डिजिटल चीजों से कुछ समय दूर रहना ही डिजिटल डिटॉक्स कहलाता है। यह डिटॉक्स आपको तकनीकी उपकरणों की लत को रोकने में मदद करेगा, ताकि आपके पास खुद पर काम करने, दूसरों के साथ बातचीत करने, व्यायाम करने जैसी अन्य चीजों के लिए समय हो। जानकार बताते हैं कि लगातार डिजिटल दुनिया के संपर्क में रहने से मानसिक व शारीरिक सेहत प्रभावित हो रही है। ऐसे में अगर हम कुछ नियम बनाते हैं तो इससे हम उबर भी सकते हैं और हमारा जीवन बेहतर भी बन सकता है।

एक नियम निर्धारित करें

अमूमन देखा जाता है कि आज की दौड़ भरे जीवन में हम दिनभर डिजिटल दुनिया के बीच में घिरे रहते हैं ऐसे में हमें इससे बचने के लिये ये तय करना होगा कि कुछ घंटे ऐसे निकाले जिसमे हम इससे दूर रह सके। सबसे अच्छा सबमय सुबह का है जब हम उठकर अपने दिनभर की तैयारी की शुरूआत करने पर विचार करते हैं ऐसे में प्रण कर लें कि सुबह उठने के बाद हम एक घंटा इन सब से दूर रह कर गुजारेंगे। इसी तरह सोने से पहले हम डिजिटल दुनिया से दूर रहेंगे। जिससे रात को बेहतर नींद आ सके।

बेहतर महसूस करेंगे

दिन के दौरान, इन उपकरणों से ध्यान हटाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे आप अपने फोन को 15 मिनट तक नहीं देखेंगे। दिन में दो-तीन बार भी आप ऐसा कर पाएं, तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा। यह आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।

जब करें अपनों से बात

फोन हमें अपने आसपास चल रहे प्रत्यक्ष अनुभव से दूर रखता है। जैसे जब परिवार साथ भोजन करता है, तब। यदि हम शारीरिक रूप से अपने परिवार के साथ हैं, लेकिन मानसिक रूप से कहीं और हैं, तो इसका क्या उपयोग होगा! ऐसे समय में अपने फोन को दूसरे कमरे में छोड़ दें और फिर घरवालों के साथ बैठें। घर में प्रेम और सद्भाव रहेगा। कंप्यूटर या लैपटॉप सोने के रूम में रखना, आपका ध्यान भटका सकता है। एक सर्वे में 95 प्रतिशत लोगों ने बताया कि अपने बेडरूम से डिजिटल उपकरणों को हटाने के बाद उन्होंने बेहतर नींद पाई। उदासी या तनाव के बजाय, उन्होंने अधिक शांत और संतुलित महसूस किया। इसलिए रात में, सुनिश्चित करें कि आपका फोन आपके बिस्तर से दूर रहे।

मौन की शक्ति

हर रोज हमें मौन का अभ्यास करना चाहिए। इससे हम अपनी खोई हुई ऊर्जा को फिर से पा सकते हैं। इसे 15 मिनट से शुरू करें, फिर धीरे-धीरे समय को एक घंटे तक बढ़ाएं। यह दिमाग और इंद्रियों की ऊर्जा को रिचार्ज करने में मदद करेगा। इसका आप अपना तरीका भी खोज सकते हैं। जब घर के बडे़ इसकी शुरुआत करेंगे, तो बच्चों में भी यह आदत विकसित होगी।

मतलब साफ है कि लॉकडाउन और उसके बाद भी अगर अंदर से आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो थोड़ी देर के लिए इन वस्तुओं से आपको दूर रहना पड़ेगा जिससे आप के जीवन में उत्साह बना रहे। पीएम मोदी भी खुद बोल चुके हैं कि सभी को मकान में एक रूम ऐसा बनाना चाहिए जहां वो इन समानों से दूर रहें जिससे वो हमेशा ऊर्जा से भरा रहेगा।