दिग्गी राजा – लोक तंत्र के ऐसे प्रहरी, जिन्होंने लोकसभा चुनाव २०१९ में वोट नहीं दिया

चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है| ऐसा पर्व जिसमे लोकतंत्र के भविष्य की नींव रखी जाती है तथा देश और नागरिकों के भविष्य को तय करने वाली सरकार को चुनने की कवायद होती है| लोकतंत्र के सफलता के लिए ज़रूरी है की ज्यादा से ज्यादा लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करें| मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग करने हेतु चुनाव आयोग न जाने कितने अभियान चलाता है|

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ऐसे में अगर एक नेता जो कई दशकों से देश की राजनीति से पहले राज्य और फिर केंद्र स्तर पर जुड़े हैं, १० साल देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्य मंत्री रह चुके हैं, वर्तमान में देश की सबसे पुरानी राजनितिक पार्टी के महासचिव हैं, और स्वयं भी २०१९ लोकसभा में एक उम्मीदवार हैं; वो वोट नहीं करे तो इससे क्या सन्देश जाता है|

इस खबर से बहुत लोग वाकिफ़ होंगे कि कल कांग्रेस के महासचिव और भोपाल से कांग्रेस उम्मीदवार, दिग्विजय सिंह ने अपने गृह क्षेत्र से वोट नहीं दिया| कारण जो भी हो, इस बात की जैसे भी सफाई दी जाए वो मान्य होने लायक नहीं है| भोपाल से कुछ ही घंटो की दुरी पर वो संसदीय क्षेत्र है, जहाँ दिग्विजय सिंह एक मतदाता के तौर पर सूचीबद्ध हैं| ज्ञात हो की, दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह ने श्यामला हिल्स स्थित जज कॉलोनी के मतदान केंद्र में मताधिकार का उपयोग किया।

ऐसी कैसी व्यस्तता कि कुछ घंटे निकाल कर वोट देने नहीं जा सके दिग्गी राजा| जिस चुनाव के प्रचार में गाड़ियों का काफिला, किराये का विमान और हेलीकाप्टर तक उपलब्ध हो जाता है, उसी चुनाव के अंतिम पायदान पर मतदान करने के लिए चंद घंटे नहीं निकाल पाने वाले ये कैसे लोकतंत्र के प्रहरी हैं| या तो लोकतंत्र में उनकी आस्था नहीं रही या फिर वो अभी तक राजतंत्र की मानसिकता से निकल नहीं पाए|

उल्लेखनीय है की दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी हैं| भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा के साथ उनका सीधा मुकाबला है|शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसते हुए ट्विटर पर कहा कि दिग्गी राजा ने आज गजब किया। इतने घबराए की वोट डालने नहीं गए।