मोदी राज में परिवहन क्रांति, मणिपुर में लोकटक अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना के विकास को मंजूरी

Transport revolution under Modi Raj

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश लगातार परिवहन के अग्रसर हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर के कई विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। चाहे सड़क हो, रेल हो, हवाई मार्ग हो, जल मार्ग हो सभी के विकास के लिए मोदी सरकार लाखों करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम कर रही है।

जिस तरह से अटल सरकार ने राजमार्गो को एक दूसरे से जोड़ कर आज समूचे देश की दूरिया कम कर दी थी; ठीक उसी तरह देश की नदियों को जोड कर, कही न कही पीएम मोदी एक राज्य से दूसरे राज्यो के बीच आने जाने और माल ढुलाई का एक और मार्ग बना दिया है और वो मार्ग है जल मार्ग। आजादी के बाद नदियों को लेकर कई योजनाए तो बनी लेकिन उनका ठीक तरह से उपयोग कैसे किया जाये इस पर सिर्फ मोदी सरकार ने ही कदम उठाया। सरकार की माने तो इस योजना के तहत जहां माल ढुलाई सस्ती होगी तो सड़क से कम समय पर समान एक शहर से दूसरे शहर भी पहुंच जायेगा।

इसी क्रम में सरकार ने मणिपुर में लोकटक अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना के विकास को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। इसकी अनुमानित लागत 25.58 करोड़ रुपए है। लोकटक झील पूर्वाेत्तर में ताजे पानी की सबसे बड़ी झील है। यह मणिपुर के मोइरंग में है।

शिपिंग राज्यी मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि पूर्वोत्त र अत्यं त आकर्षक भू-परिदृश्य वाला एक मनोरम क्षेत्र है और वहां पर्यटन के लिए अपार अवसर हैं। उन्हों ने कहा कि इस परियोजना के तहत पूर्वोत्तेर राज्योंर में अंतर्देशीय जल परिवहन कनेक्टिविटी को विकसित किया जाएगा और इससे पर्यटन क्षेत्र को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।

मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही देश में जलमार्गों के विकास में जुटी हुई है। आइए एक नजर डालते हैं देश में जलमार्गों के विकास से जुडी परियोजनाओं पर –

कोलकाता से काशी के बीच कंटेनर सेवा

कोलकाता से काशी के बीच कंटेनर सेवा

आजादी के बाद पहली बार गंगा के जरिए हल्दिया (प.बंगाल)-प्रयागराज (यूपी) जलमार्ग शुरू हुआ। इस मार्ग पर 2000 टन के जहाजों का आवागमन संभव है। प्रधानमंत्री मोदी ने 12 नवंबर, 2018 को वाराणसी में देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया था। उन्होंने जलमार्ग के जरिए हल्दिया से वाराणसी आए मालवाहक जहाज का स्वागत किया। इससे परिवहन का वैकल्पिक तरीका उपलब्ध होगा जो पर्यावरण के अनुकूल होगा। इस परियोजना से देश में लॉजिस्टिक्सत की लागत को कम करने में मदद मिलेगी।

घोघा दहेज रो-रो फेरी

Gogha_Dahej_Ro_Ro_Ferry

प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2017 में गुजरात में घोघा दाहेज रो-रो फेरी के पहले चरण का उद्घाटन किया। नौका के उद्घाटन से पहले, घोघा-दहेज के बीच परिवहन लगभग 8 घंटे तक सड़क के रास्ते से लिया गया, हालांकि नौका के साथ दूरी अब एक घंटे के भीतर कवर की जाती है। 12,000 यात्री और 5,000 वाहन दैनिक लाभार्थी हैं।

6 शहरों में फेरी टर्मिनल

वाराणसी, पटना, भागलपुर, मुंगेर, कोलकाता तथा हल्दिया में फेरी टर्मिनलों के निर्माण के लिए उचित स्थानों की पहचान के लिए दिसंबर, 2016 में थॉम्सन डिजाइन ग्रुप (टीडीजी), बोस्टन (अमेरिका) तथा मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) (अमेरिका) के संयुक्त उद्यम को ठेका दिया गया।

46 हजार रोजगार का सृजन

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के विकास एवं परिचालन से 46,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। इसके अलावा जहाज निर्माण उद्योग में 84,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के मार्च 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में पड़ती है। इसके तहत आने वाले प्रमुख जिलों में वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, बक्सर, छपरा, वैशाली, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, साहिबगंज, मुर्शिदाबाद, पाकुर, हुगली और कोलकाता शामिल हैं।

परियोजना के प्रमुख घटक:

• फेयरवे विकास
• वाराणसी में मल्टीरमॉडल टर्मिनल निर्माण
• साहिबगंज में मल्टी्मॉडल टर्मिनल निर्माण
• हल्दिया में मल्टीीमॉडल टर्मिनल निर्माण.कालूघाट में इंटरमॉडल टर्मिनल निर्माण
• गाजीपुर में इंटरमॉडल टर्मिनल निर्माण
• फरक्कार में नए नेविगेशन लॉक का निर्माण
• नौवहन सहायता का प्रावधान
• टर्मिनलों पर रोल ऑन- रोल ऑफ (आरो-आरो) की पांच जोडि़यों का निर्माण
• एकीकृत जहाज मरम्मऑत तथा रख रखाव परिसर का निर्माण
• नदी सूचना प्रणाली (आरआईएस) तथा जहाज यातायात प्रबंधन प्रणाली (पीटीएमएस) का प्रावधान
• किनारा संरक्षण कार्य

मोदी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी में 891 किलोमीटर, केरल की वेस्ट कोस्ट नहर में 205 किलोमीटर और गुजरात की तापनी नदी पर 173 किलोमीटर लंबा जलमार्ग बनाने की योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इनके शुरू होने से सड़कों पर बोझ, जाम, ईंधन का खर्च और प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। रोजगार के अलावा नदियों के किनारे और जलमार्गों पर पर्यटन की भी असीम संभावनाएं हैं।