पूरी आबादी का एक प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद सबसे ज्यादा खर्च होते है जम्मू-कश्मीर की जनता पर

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 highest expenses are incurred on the people of Jammu and Kashmir

MODI 2.0 सरकार के जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले से अब जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया गया है और देश के अन्य राज्यों की तरह ही अब जम्मू-कश्मीर भी एक केंद्र शासित राज्य बन गया है | इसका मतलब अन्य राज्यों की तरह ही यहाँ की जनता भी सरकारी योजनाओ और आरक्षण का लाभ उठा सकती है | अब बाहरी कंपनियां भी कश्मीर में निवेश कर सकती है जिससे यहाँ रोजगार के नए अवसर मिलेंगे | सिर्फ इतना ही नहीं और भी कई विकास के रस्ते खुले कश्मीर की जनता के लिए आर्टिकल 370 ख़त्म होने के बाद |

लेकिन आज हम आपको एक ऐसा रोचक तथ्य बता रहे है जिसे सुनकर अप हैरान रह जायेंगे | जनगणना के अनुसार पुरे देश की आबादी का लगभग एक प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर में बसता है लेकिन फिर भी यहाँ के लोगों पर प्रति व्यक्ति खर्च और राज्यों से काफी अधिक है | आंकड़ों के हिसाब से जम्मू-कश्मीर में कुल केंद्रीय बजट का 10 फीसदी हिस्सा दिया जा रहा है था वहीँ उत्तर प्रदेश जहाँ देश की आबादी का 13 प्रतिशत हिस्सा बसता है वहां पर कुल केंद्रीय बज़ट का सिर्फ 8.2 प्रतिशत हिस्सा ही मिलता रहा है |

सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से 2016 तक में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में प्रति व्यक्ति पर औसतन 92 हजार रुपये खर्च किए है वहीँ उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति औसतन 4300 रुपये ही खर्च किये गए है | रिपोर्ट में दर्शया गया है की 1991-92 में जब देश में प्रति व्यक्ति खर्च 576 रुपये था तब जम्मू-कश्मीर के लोगों पर 3197 रुपये खर्च किए जा रहे थे | ठीक उसी प्रकार साल 2001-02 में जब देश में प्रति व्यक्ति खर्च 1137 रुपये था तब जम्मू-कश्मीर में 8092 रुपये खर्च हो रहे थे | वर्तमान हालातों की बात करे तो इस समय जम्मू-कश्मीर में प्रति व्यक्ति 14,255 रुपये खर्च किये जा रहे है वहीँ राष्ट्रीय औसत सिर्फ 3,681 रुपये है |

आकड़ों के मुताबिक 70 साल में चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ कश्मीर में खर्च हुआ है | हम अनुमान लगा सकते है की इतनी बड़ी राशी कश्मीर पर खर्च करने के वाजिब वजह रही थी सरकार के पास | लेकिन अब क्योंकि कश्मीर 370 के बोझ से आजाद है तो ये भी कहा जा सकता है की कश्मीर अब अपने प्रगति के राह पर आगे बढेगा | बहुत जल्द यहाँ भी रोजगार के हजारो अवसर जनता को प्राप्त होंगे | शिक्षा को ज्यादा महत्व दिया जायेगा |

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते है की आर्टिकल 370 को ख़त्म करने का सरकार का फैसला बेहद ही अहम् और ऐतिहासिक है | पहली बार किसी सरकार ने वोट बैंक की राजनीती से परे हटकर कश्मीर की समस्या को अपना अहम् मुद्दा बनाया है | साथ ही उन्होंने ये भी कहा की आर्टिकल 370 खत्म हो गया है ये कहना वाजिब नहीं है | आर्टिकल 370 तीन भागों में बंटा हुआ है और इस आर्टिकल का सिर्फ भाग 2 और 3 हटाया गया है जबकि भाग 1 अभी भी लागु है |

 


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