दिल्ली-एनसीआर की हवा के लिये वरदान साबित हुआ कोरोना – पिछले 6 सालों मे सबसे साफ़

किसी ने क्या खूब कहा है कि कोई भी संकट अपने आप मे एक मौका लेकर आती है | दिल्ली मे कोरोना का कुछ ऐसा ही हाल है | एक तरफ लोग इस भयानक महामारी से परेशान हैं तो दूसरी तरफ सेंट्रल पल्युशन कंट्रोल बोर्ड और मौसम वैज्ञानिकों की रिपोर्ट दिल्ली वालों के लिये एक अच्छी खबर भी लेकर आई है | 

कोरोना लॉकडाउन की वजह से पूरा भारत जैसे रुक गया है। इसका सीधा असर मौसम, प्रदूषण के स्तर पर दिख रहा है। शुक्रवार को आसमान नीला दिखा, वहीं प्रदूषण स्तर में भी आश्चर्यजनक सुधार हुआ है। पीएम 2.5 जहां 20 रहा वहीं प्रदूषण लेवल 69 था, यह दिसंबर के आसपास 500 तक पहुंच गया था। 

अभी और होगा सुधार

सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड और मौसम वैज्ञानियों का कहना है कि इसमें आगे 14 अप्रैल तक और सुधार होगा। दिल्ली के नीले आसमान की तस्वीरें शुक्रवार को खूब शेयर की जा रही थीं। बीते कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बरसात ने भी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च को देश भर में लॉकडाउन का ऐलान किया था। इसके बाद से सड़कों पर निजी वाहनों का चलना लगभग बंद हो गया है। सिर्फ जरूरी सामानों की ढुलाई करने वाले वाणिज्यिक वाहनों को ही सड़कों पर उतरने की इजाजत है। साथ ही साथ पूरे देश में निर्माण कार्यों पर रोक है। इससे पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है।

बीते छह सालों में सबसे बेहतर स्तर

वेबसाइट एक्यूआईसीएन डॉट ओआरजी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बीते छह सालों में सबसे बेहतर स्तर पर पहुंच गया है। आलम यह है कि दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रदूषित माने जाने वाले बाहरी दिल्ली के शाहदरा इलाके में एक्यूआई 13 तक पहुंच गया है, जो 27 मार्च को दिल्ली में सबसे साफ हवा को दर्शाता है। समूचे एनसीआर में एक्यूआई कही भी 63 से अधिक नहीं मापा गया है। इसके अलावा पूरे एनसीआर में पीएम 2.5, पीएम 10, ओ3, एनओ2, एसओ2 और सीओ की मात्रा बेहतर या अच्छी पाई गई है।

बारिश का भी योगदान

एक्यूआई में आए इस बदलाव के पीछे सड़कों पर वाहनों की कमी के अलावा बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश का भी योगदान है। दिल्ली-एनसीआर का एक्यूआई बीते छह साल में सबसे बेहतर है। अगर हम बीते छह साल के आंकड़ों की बात करें तो 2014 में मार्च के अंतिम सप्ताह का एक्यूआई 130 से 180 के बीच रहा था। इसी तरह 2015 में यह 90 से 140 के बीच रहा था। 2016 में स्थिति खराब थी, क्योंकि इस साल मार्च के अंतिम सप्ताह में एक्यूआई 115 से 190 के बीच था। अगर 2017 की बात की जाए तो इस साल मार्च के आखिरी हफ्ते में एक्यूआई 130 से 190 के बीच था, जबकि 2018 और 2019 में यह 100 से 180 के बीच था।