डिफेंस एक्सपर्ट ने बताया- राफेल का ‘नो एस्केप जोन’ जबरदस्त, दुश्मन का बचना मुश्किल

राफेल लड़ाकू विमान कुछ घंटों में अंबाला एयरबेस पहुंचने वाले हैं. एयरबेस पर राफेल को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर लगी गई हैं. खुद एयरचीफ मार्शल आरके भदौरिया राफेल की अगवानी करेंगे. विमानों को वाटर सैल्यूट देकर स्वागत किया जाएगा. इस बीच राफेल विमानों के भारत आने के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर यह विमान दुश्मनों पर वार-पलटवार के लिए कब तैयार होंगे? यह विमान कैसे काम करता है और दुश्मनों के लिए कितना घातक है.

इस सवाल का जवाब जानने के लिए ‘आजतक’ ने कई रक्षा विशेषज्ञों से बात की. इनमें शामिल हैं एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रिटा.) जो एयर ऑफिसर इंचार्ज पर्सनल रहे हैं और एमआईजी-21 और मिराज के फाइटर पायलट रह चुके हैं. एयर मार्शल पीएस अहलूवालिया (रिटा.), पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, वेस्टर्न एयर कमान, फाइटर पायलट और एयर मार्शल निर्दोष त्यागी (रिटा.), पूर्व वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ, फाइटर पायलट. तीनों विशेषज्ञों ने राफेल के बारे में विस्तार से बताया.

गेमचेंजर साबित होगा राफेल

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल चोपड़ा ने कहा कि राफेल एक ऐसा जहाज है जैसा न तो चीन और न ही पाकिस्तान के पास कोई ऐसा जहाज है. यह गेमचेंजर साबित होगा. भारतीय वायुसेना की क्षमता से इससे बहुत बड़ा इजाफा होने वाला है. यह देश के लिए बहुत बड़ी बात है. जिस तरह के मिशन राफेल करेगा, वैसा कई जहाज हैं जो नहीं कर पा रहे हैं. हर तरह के मिशन राफेल कर सकता है, इसके पायलट ट्रेंड हैं. पायलट पूरा ऑपरेशन भी देख चुके हैं और एयरबेस पूरा तैयार है.

एयरफोर्स के लिए अहम राफेल

अनिल चोपड़ा ने कहा कि इसका सारा इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है, हथियार पहले ही पहुंच चुके हैं. वाटर सैल्यूट से राफेल को रिसीव किया जाएगा. खुद एयरचीफ मार्शल रिसीव करेंगे. यह सब दिखाता है कि एयरफोर्स के लिए यह जहाज कितना महत्वपूर्ण है. इसके लिए थोड़ी सी सावधानी बरती गई है जो कि जरूरी है. इतना महत्वपूर्ण इंडक्शन (शामिल) होने जा रहा है तो सावधानी बरतना जरूरी है.

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल चोपड़ा ने कहा कि पाकिस्तान के पास जो एफ-16 है वह पुराना मॉडल है, उसके बाद के मॉडल आ गए हैं. इसलिए राफेल के आगे एफ-16 को भूल जाना चाहिए. चीन के पास जे-20 के 5-6 विमान हैं लेकिन अभी उसके बारे में वे समझ रहे हैं. जे-20 आगे आने वाले 5-6 साल तक किसी ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं है. जबकि राफेल ने 20 साल से 5 बड़े जंग में हिस्सा लिया है. लिबिया, अफगानिस्तान, सीरिया और इरान में हिस्सा ले चुका है. हर जगह फुल कॉम्बैट एक्सपीरियंस के साथ राफेल आगे आ रहा है.

किसी के पास नहीं ऐसा विमान

राफेल की यह खासियत है कि वह पहले दिन से तैयार है. राफेल के पास जो राडार है, वह किसी के पास नहीं. इसके अंदर अति आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण लगे हुए हैं. यह 9.5 टन वेपन ले सकता है जबकि मिग में ऐसा नहीं है. चीन की एसयू-30 के पास भी यह क्षमता नहीं है. इसका इंजन भी दमदार है जबकि चीनी फाइटर प्लेन के इंजन काफी संघर्ष कर रहे हैं. हमारे पास जो मिराज है, उससे भी आगे है राफेल.

राफेल को वॉटर सैल्यूट दिया जाएगा. इस पर डिफेंस एक्सपर्ट अनिल चोपड़ा ने कहा कि यह काफी पुराना प्रचलन है जिसमें दो वॉटर टेंडर पानी की बौछार करते हैं. हम अलग-अलग तरह से सैल्यूट देते रहे हैं जैसे कि गन से या हाथ से. वॉटर सैल्यूट में पानी से विमान को सैल्यूट किया जाता है. 1985 में जब मिराज आया था, तब भी वॉटर सैल्यूट दिया गया था. जैसे और तरह के ट्रेडिशन होते हैं, वैसे ही वॉटर सैल्यूट भी एविएशन ट्रेडिशन है. इसे ‘सैल्यूट ऑफ सक्सेस’ बोलते हैं कि देखो हम जीत कर आए हैं.

लड़ाई में बेहद सुरक्षित है राफेल

डिफेंस एक्सपर्ट पीएस अहलूवालिया ने कहा कि राफेल से भारतीय वायु सेना में ‘वैल्यू ऐड’ होगा, इससे ताकत बढ़ेगी. इससे हमारी कॉम्बैट की क्षमता बढ़ेगी. एयरफोर्स में और भी राडार हैं, कम्युनिकेशन सिस्टम हैं लेकिन राफेल इनके बीच में काम करेगा, इनके साथ काम करेगा. राफेल में सबकुछ अच्छा है लेकिन इसके हथियार खास तौर पर काफी अच्छे हैं. राफेल से वायुसेना की क्षमता में बहुत इजाफा होगा. हमारे लोगों को गर्व है कि हमारे पास भी कोई सिस्टम आ रहा है जो आगे कोई लड़ाई हो तो उसमें अहम जगह रखता है. अगर कोई राडार राफेल को पिकअप करना चाहता है उसे जाम किया जा सकता है. इसमें अति आधुनिक इलेट्रॉनिक्स वॉरफेयर लगे हैं. कोई मिसाइल फायर नहीं कर सकता, इस लिहाज से राफेल काफी सुरक्षित है.

राफेल का ‘नो एस्केप जोन’ जबरदस्त

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल चोपड़ा ने कहा कि अंबाला का रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है. राफेल में लगे मिटियोर मिसाइल की 60 किमी की नो एस्केप जोन है. इसका मतलब हुआ कि दुश्मन का जहाज 60 किमी के अंदर आ गया तो कुछ भी कर ले, वह बच के नहीं जा सकता. ऐसा नो एस्केप जोन किसी मिसाइल के पास नहीं है जो राफेल में है. स्काल्प मिसाइल से अंबाला में बैठे 540 किमी तक हिट किया जा सकता है. 60 किमी की रेंज का हैमर भी इसमें लगा है जिसकी एक्युरेशी जबरदस्त है. जो लद्दाख में अभी हालात बने हैं, उसे देखते हुए हैमर मिसाइल बहुत काम करेगी. दुश्मन के हेडक्वार्टर या ब्रिज को हमें गिराना है तो वैसे टारगेट को यह मिसाइल हिट कर पाएगी.

डिफेंस एक्सपर्ट एयर मार्शल निर्दोष त्यागी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रडार काफी आधुनिक हैं. राफेल के आगे चीन की क्षमता काफी कम है. चीन का जे-20 इंजन के मामले में राफेल से पीछे है. राफेल की बनावट ऐसी है कि इसे रडार से पकड़ना मुश्किल होगा. ग्राउंड अटैक या एयर अटैक, दोनों मामलों में राफेल काफी आगे है.

Originally published: Aaj Tak