सरदार पटेल के जयंती की तिथि को चुना गया अखंड भारत के निर्माण के लिए, 31 अक्टूबर को होगा जम्मू-कश्मीर का विभाजन

31 October, the division of Jammu and Kashmir will take place

बीते सोमवार यानि की 6 अगस्त 2019 को MODI 2.0 की सरकार ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 को पेश किया जिसके अंतर्गत कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के पहले खंड को छोड़कर सभी खण्डों को ख़त्म कर दिया गया | इसके साथ ही इस विधेयक में ये भी अंकित किया गया है की जम्मू-कश्मीर और लदाख का विभाजन किया जायेगा और दो नए केंद्र शासित प्रदेश का निर्माण किया जायेगा |

बीते शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 को माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपनी मंजूरी दे दी और इसके तुरंत बाद गृह मंत्रालय से एक अधिसूचना जारी हुई जिसमे जम्मू-कश्मीर की विभाजन की तिथि अंकित की गयी थी | अधिसूचना के मुताबिक विभाजन की तिथि के लिए 31 अक्टूबर का चुनाव किया गया है |

बता दे की 31 अक्टूबर देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती की तिथि है | देश के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार पटेल का एक ही सपना था ‘अखंड भारत’ | और इसीलिए भी आज़ादी के बाद देश के सारी रियासतों को एक करने की जिम्मेदारी पटेल को सौंपी गयी थी | बस जम्मू-कश्मीर की रियासत की जिम्मेदारी नेहरु को दी गयी | सरदार पटेल ने अपने नीतियों के बदौलत देश के सभी रियासतों को समझा-बुझाकर एक होने के लिए प्रेरित किया और उनके प्रयास सकारात्मक रहे और देश के सभी रियासत एक जुट हो गए केवल जम्मू-कश्मीर की रियासत ही रह गयी | अब इसे नेहरु की बदकिस्मती कहे या उनके प्रयासों में कमी पर जम्मू-कश्मीर की रियासत की जिम्मेदारी में वो मत खा गए और देश को जम्मू-कश्मीर की रियासत से हाथ धोना पड़ा | पर अब क्योंकि मोदी सरकार ने एक बार फिर कश्मीर को देश का हिस्सा बनाने की पूरी तैयारी कर ली है और बहुत जल्द लौह पुरुष का अखंड भारत का सपना पूरा होने जा रहा है | इसीलिए भी जम्मू-कश्मीर के विभाजन के लिए पटेल की जयंती के तिथि को चुना गया है |

जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद दो नए केंद्र प्रशासित राज्यों का निर्माण होगा पहला जम्मू-कश्मीर और दूसरा लदाख | वर्तमान में कश्मीर में 6 लोक सभा की सीटें है पर विभाजन के बाद कश्मीर में 5 लोक सभा की सीटें रहेंगी जबकि एक लोक सभा सीट लदाख के पास चली जाएगी | विधेयक के अनुसार नवनिर्मित लदाख में कारगिल और लेह जिलों को सम्मिलित किया जायेगा जबकि कश्मीर में 12 जिलों को सम्मिलित किया जायगा | साथ ही अब इन दो केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल की जगह उप-राज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी |

विधेयक में कश्मीर के लिए विधान सभा का प्रावधान है जबकि लदाख में विधानसभा नहीं होगा | साथ ही कश्मीर के विधानसभा का कार्यकाल अब 6 की जगह 5 वर्षों का होगा | वर्तमान में कश्मीर में 107 विधान सभा सीटें है जिनमे 24 सीट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है और विभाजन के बाद भी ये POK का ही हिस्सा रहेंगे | विधेयक के अनुसार जब तक POK को वापस नहीं ले लिया जाता और यहाँ की जनता अपने प्रतिनिधि का चुनाव खुद नहीं करती तब तक इन 24 सीटों को खाली रखा जायेगा वहीँ बाकि की 83 सीटों पर मतदान की प्रक्रिया द्वारा प्रतिनिधि का चुनाव किया जायेगा | इन 83 सीटों में 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है | वहीँ अगर उप-राज्यपाल को ऐसा प्रतीत होता है की विधानसभा में महिलाओ की भागीदरी कम है तो उनके पास दो महिलाओं को विधान सभा में नियुक्त करने का अधिकार होगा |