कश्मीर मे इस साल नहीं होगा दरबार मूव, 148 साल पुरानी परंपरा टूटी

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150 सालों के इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव नहीं होगा। राजधानी और सचिवालय के हर साल श्रीनगर से जम्मू और जम्मू से श्रीनगर जाने की प्रक्रिया दरबार मूव कहलाती है। कोरोनावायरस के चलते पैदा हुई स्थितियों के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। शुक्रवार को जम्मू कश्मीर सरकार ने आदेश जारी किए कि 4 मई को जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सालाना दरबार खुलेगा, लेकिन कर्मचारी जहां हैं वहीं से काम करेंगे। यानी जो जम्मू में हैं वो वहीं रहेंगे और जो कश्मीर में वो वहीं से काम करेंगे।

काम करेंगे दोनों दफ्तर 

आदेश के मुताबिक, इस साल जम्मू और श्रीनगर दोनों जगहों पर सचिवालय के दफ्तर काम करेंगे। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था पर 15 जून के बाद कोरोना के हालातों के मुताबिक आगे क्या करना है यह फैसला किया जाएगा।

आदेश में कहा गया है कि कश्मीर डिवीजन के कर्मचारी जो श्रीनगर जाएंगे, उन्हें 25-26 अप्रैल को सरकारी ट्रांसपोर्ट के जरिए कश्मीर पहुंचाया जाएगा। जबकि, एस्टेट डिपार्टमेंट उन सभी ऑफिसर कर्मचारियों को इसी हिसाब से घर देगा। इन सभी कर्मचारियों को सरकार की ओर से जम्मू और श्रीनगर में घर दिए जाते हैं। वहीं, सचिवालय के दफ्तर का समय दोनों ही जगह सुबह 9.30 से शाम 5.30 रहेगा।

अप्रैल में होती थी पूरी प्रक्रिया

इस परंपरा के तहत हर साल अप्रैल महीने में करीब 800 वाहनों से जम्मू स्थित नागरिक सचिवालय से फाइलों और अन्य सामान को श्रीनगर भेजा जाता था। वहीं अक्टूबर में बर्फबारी से पहले ये सारा सामान जम्मू में शिफ्ट किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को दरबार मूव का नाम दिया गया था।

जून में फिर की जाएगी समीक्षा

इस साल सरकार ने परीस्थितियों को देखते हुए श्रीनगर सचिवालय के काम को तो 4 मई से शुरू कराने का फैसला कर दिया है, लेकिन कर्मचारियों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया 15 जून तक टाल दी गई है। सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव फारूक अहमद लोन ने कहा है कि सभी कर्मचारी फिलहाल जहां से काम कर रहे हैं, वह आगे भी वहीं से अपना काम करते रहें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस साल श्रीनगर में सचिवालय खुलने के बावजूद जम्मू सचिवालय से कामकाज होता रहेगा।

हर साल दो बार होता है दरबार मूव

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हर साल दरबार मूव की परंपरा को पूरा किया जाता है। इस परंपरा पर हर साल 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इस परंपरा के तहत हर साल राजधानी बदलते हुए सरकारी कामकाज को दो क्षेत्रों से पूरा कराया जाता है। साथ ही कर्मचारियों के रहने के लिए श्रीनगर और जम्मू के कई होटल भी आरक्षित किए जाते हैं। दरबार मूव के दौरान जम्मू-श्रीनगर हाइवे को बंद करके सचिवालय के सामान को 800 से अधिक वाहनों से जम्मू और श्रीनगर के बीच शिफ्ट कराया जाता है।

 


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