निर्भया के कातिलों पर कोई रियायत नहीं – न्यायालय ने क्यूरेटिव याचिका खारिज की

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देश के उच्चतम न्यायालय ने निर्भया के कातिलों कि क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी| दोनों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा गया है| जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने क्यूरेटिव याचिका पर अपना फैसला दिया है| सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव याचिका एक मत से खारिज की|

कोर्ट की सुनवाई से पहले दोषी विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने क्यूरेटिव पिटीशन में कहा है कि साल 2017 के बाद 17 रेप और मर्डर के केस हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है|”

उल्लेखनीय है कि पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी के लिए डेथ वारंट जारी किया है|

मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति को भेजी दया याचिका

क्यूरेटिव याचिका ख़ारिज होने के बाद दोनों दोषियों के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का विकल्प बाकी था| जिसमें से मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दया याचिका भेज दी है|

बाकी दोनों दोषियों अक्षय और पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका भी अभी तक दाखिल नहीं की है|

तिहाड़ जेल में फाँसी की तैयारियां पूरी

उधर तिहाड़ जेल में चारों दोषियों के फाँसी की तैयारियां पूरी हो चुकी है| अभ्यास के तौर पर रविवार को दोषियों के डमी को फाँसी देकर अभ्यास प्रक्रिया पूरी हुई|

अब देखना है कि दया याचिका पर राष्ट्रपति का क्या फैसला होता है| जहाँ तक देश के मिजाज और जनता की भावनाओं की बात है तो उनके अनुसार ऐसे जघन्य अपराधों के लिए सजा में किसी भी तरह के ढील की कोई गुंजाईश नहीं होनी चाहिए| मोदी सरकार ने भी महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार जैसे जुर्म की सजा को कठोर से कठोरतम करने की ओर सार्थक प्रयास किये हैं|


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