कच्चे तेल के दामों मे भरी गिरावट, अमरीका मे माइनस 38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

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पूरी दुनिया मे कोरोना वायरस का कहर देखने को मिल रहा है | इसकी वजह से हर देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है | अभी इसका ताजा उदाहरण तेल की कीमतें हैं | तेल की कीमतों मे मांग कम होने के कारण भारी गिरावट देखने को मिल रही है | पूरी दुनिया घर मे कोरोना की वजह से अपने अपने घरों मे बंद है | इसका परिणाम यह हुआ है कि लोगों को अपनी गाड़ियाँ निकालने का मौका ही नही मिल पा रहा है | अतः तेल की कीमतों मे भारी गिरावट आई है | 

अमेरिका में कच्चे तेल का भाव सोमवार को माइनस में पहुंच गया। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का मई डिलीवरी का भाव माइनस 37.63 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। हालांकि, मंगलवार के कारोबार में 1.10 डॉलर प्रति बैरल की रिकवरी देखी गई।

 

कोरोना संकट की वजह से मांग कम, स्टोरेज की दिक्कत

कोरोना संकट के चलते कच्चे तेल की मांग में आई भारी कमी की वजह से इसका भाव गिरा। मांग नहीं होने की वजह से अमेरिका में स्टोरेज की दिक्कत भी आ रही है। रिस्ताद एनर्जी के प्रमुख ब्योर्नार टोनहुगेन के मुताबिक, ‘वैश्विक आपूर्ति की मांग में कमी की समस्या की वजह से तेल की कीमतों में गिरावट आने लगी है।’ मई डिलीवरी का कॉन्ट्रैक्ट मंगलवार को एक्सपायर हो रहा है। लेकिन, कारोबारी सौदे आगे नहीं बढ़ा रहे।

कोरोना की वजह से बाजार में मांग कम होने और अमेरिका में इसका भंडारण जरूरत से ज्यादा होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। मौजूदा समय में हालात यह हैं कि अमेरिका में अब कच्चे तेल के भंडारण के लिए जगह की कमी महसूस होने लगी है। ऐसे में कीमतों में और भी कमी आने की उम्मीद है।

मंगलवार को मई की आपूर्ति के लिए होने वाले सौदे का आखिरी दिन है। तेल व्यापारियों को कीमतें अदा कर आपूर्ति लेने का यह अंतिम मौका था। हालांकि, मांग कम होने के कारण व्यापारी इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसके साथ ही इनके भंडारण में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चा तेल रखने वाले व्यापारी अब ग्राहकों से इसे खरीदने के लिए कह रहे हैं। इन व्यापारियों की ओर से खरीदने वालों को प्रति डॉलर 3.70 डॉलर देने की पेशकश भी कर रहे हैं। इसी को कच्चे तेल की कीमतों को शून्य डॉलर प्रति बैरल नीचे जाना कहते हैं।

 


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