CRPF के जवानों ने पेश की मिसाल, गर्भवती महिला को कंधे पर लाद 6 किलोमीटर दूर पहुंचाया अस्पताल

CRPF carried a pregnant woman

हर भारतीय को सेना के जवानों पर गर्व महसूस होता है, इसमें कोई दो राय नहीं है। सेना के जवान हर भारतीय की सुरक्षा और मदद के लिए हर पल तैयार रहते हैं। ताजा उदाहरण छत्ती सगढ़ के बीजापुर का है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने प्रसव पीड़ा से कराहती एक आदिवासी महिला को चारपाई पर बैठाकर छह किलोमीटर चलकर अस्पताल पहुंचाया। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने मंगलवार को यहां बताया कि अर्द्धसैनिक बल की 85 वीं बटालियन का दल जिले के पदेड़ा गांव के करीब नक्सल विरोधी ऑपरेशन में था।

इसी दौरान जब एक स्कूली छात्र ने एक गर्भवती महिला के संबंध में जानकारी दी तब दल का कंपनी कमांडर गांव के गायतापारा स्थित महिला के मकान में पहुंचा। कमांडर के साथ प्राथमिक उपचार करने वाला दल भी था। दल को जब सूचना मिली कि महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही है तब उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश शुरू की गई।

अधिकारियों ने बताया कि पदेड़ा गांव घने जंगल और पहाड़ के बीच स्थित है और वहां सड़क नहीं है इसलिए वहां एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल है। तब सीआरपीएफ के जवानों ने बगैर देरी किए लंबे बांस से एक खाट को लटकाया और उसमें महिला को बिठा दिया गया। सीआरपीएफ के जवानों ने महिला को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अपने कंधे पर खाट लेकर लगभग छह किलोमीटर का रास्ता पैदल तय किया। जंगल का ऊबड़-खाबड़ रास्ता तय कर जवानों ने महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया जा सका।

बता दे की छत्तीसगढ़ के इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नक्सलियों ने कई नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया है। जिसकी वज़ह से सीआरपीएफ की 85 वीं बटालियन लगातार यहाँ नक्सल विरोधी अभियान पर है। सीआरपीएफ की सहायता की वजह से महिला का इलाज समय पर हो सका। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में महिला ने बच्चे को जन्म दिया है। मां और बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है। फिलहाल महिला का जिला अस्पताल में जरूरत के मुताबिक इलाज किया जा रहा है।

सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों ने एक मिसाल पेश करते हुए गर्भवती महिला की मदद कर प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित घने जंगल में गर्भवती महिला के लिए सीआरपीएफ के ये जवान देवदूत साबित हुए।

पिछले दिनों कश्मीर में भी एक ऐसा वाक्याक देखने को मिला था, जब घुटनों-घुटनों जमी बर्फ के बीच सेना के जवानों ने एक महिला को अस्पेताल पहुंचाया था, तक पीएम मोदी ने ट्वीट करके लिखा था कि हमारी सेना को उसकी वीरता और प्रोफेशनलिज्म के साथ साथ मानवता के लिए भी जाना जाता है । जब भी लोगों को जरूरत होती है, हमारी सेना हर संभव चीज करती है। हमारी सेना पर गर्व है।