सीआरपीएफ अफसर की शादी में मिलने वाला शगुन जायेगा ‘भारत के वीर’ फण्ड में

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Wedding-card

राजस्थान में होने जा रही एक शादी कई मायने में अनोखी और अनूठी है| इस शादी में वर पक्ष के लोगो ने तिलक समेत कोई भी तोहफे लेने से साफ़ इनकार कर दिया है| यहाँ तक तो सब कुछ सहज है, चूँकि ऐसे कई परिवार होते है जो वधु के पक्ष से तिलक लेना पसंद नहीं करते| लेकिन, इस शादी को लेकर ख़ास बात यह है कि यहाँ वर पक्ष के लोगो ने वधु पक्ष के लोगों से शादी को लेकर अपील किया है कि वो वर-वधु को शगुन न देकर, भारत के वीर फण्ड(शहीद निधि) में जमा करवा दें| मालूम हो कि ‘भारत के वीर फण्ड’ केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा देश के लिए शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों की वित्तीय मदद के लिए बनाया गया है| काबिले-ऐ-गौर बात यह भी है कि जिस शख्स की शादी हो रही है| वो खुद अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ का अफसर है|

शादी के लिए छपे कार्ड पर बकायदा इस बात की तसदीक करते हुए लिखा गया है कि, पूरे परिवार की इच्छा है कि शगुन न लेकर उसे भारत के वीर फंड में दान करने का अनुरोध किया जाए। कार्ड के मुताबिक, यह शादी राजस्थान के गंगानगर के अमर पैलेस में 11 अप्रैल को होने वाली है| दूल्हा बनने जा रहे विकास खडगावत खुद सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं।

इस बाबत कन्या पक्ष ने भी फैसला लिया है कि वो भारत के वीर फंड में ही दान देंगे। दूल्हे के पिता गोपाल खडगावत के मुताबिक, ‘यह मेरा विचार था कि बेटे की शादी में खर्च होने वाले पैसे को देश के लिए लड़ने वाले जवानों की खातिर दान दिया जाए। जब मेरी बेटी की शादी हुई तो मैंने फैसला किया कि मैं अपने बेटे की शादी में कोई तोहफा नहीं लूंगा। साथ ही परिवार और दोस्तों की ओर से शादी में जो शगुन दिया जाएगा उसे पूरा का पूरा शहीदों के फंड के लिए दान कर दूंगा। मैंने यह अपील शादी के रिसेप्शन कार्ड में भी छपवाई है। इसमें साफ लिखा गया है कि जो लोग भी शादी में दुआओं के साथ शगुन देना चाहते हैं, वह सारी राशि हम एक महीने के अंदर ही भारत के वीर फंड में दान कर देंगे।’

शुरूआती दौर में इस पहल को लेकर विकाश के पिता चिंतित थे कि अगर वह रिश्तेदारों एवं मित्रों से शगुन स्वीकार नहीं करेंगे तो वे कहीं बुरा न मान जाएं। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वह शगुन स्वीकार तो करेंगे लेकिन उसे तुरंत भारत के वीर फंड में दान कर देंगे। गोपाल खडगावत कहते है कि हमने इसलिए लोगों को साफ कर दिया कि वो अपनी स्वेच्छानुसार जो भी चाहे दे सकते हैं।

गोपाल खडगावत बताते है कि उनके तरफ से उनके पारिवारिक सदस्यों एवं दोस्तों को लिखा गया है कि, ‘मैंने शगुन की परंपरा को बंद करने का फैसला किया है। लेकिन हो सकता है कि आप में से कुछ लोग इससे इत्तेफाक न रखें। इसलिए मैं शगुन तो स्वीकार करूंगा लेकिन पूरा का पूरा पैसा भारत के वीर फंड में दान कर दूंगा। इससे शहीदों के परिवारों की कुछ मदद हो सकेगी।’


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