CPI माओवादी संगठन को अमेरिका ने दुनिया का छठवां सबसे खतरनाक संगठन माना है

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CPI Maoist organization

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने बीते शुक्रवार को आतंकवाद से प्रभावित देशों और आतंकवादी संगठनों की सूची जारी की. इसमें आतंकवाद प्रभावित देशों में भारत का स्थान चौथा है. इससे पहले अफगानिस्तान (Afghanistan), सीरिया (Syria) और इराक (Iraq) हैं. रिपोर्ट में अमेरिका ने बताया है कि देश में कानून लागू करने वाली संस्थाओं के कमजोर होने की वजह से इसकी ये हालत है. वहीं CPI-M को छठवें नंबर पर रखते हुए कहा गया कि ये संगठन काफी खूंखार है और देश में अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार है.

क्या है रिपोर्ट में 
‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2018’ के मुताबिक 2018 में भारत में हुई कुल आतंकी घटनाओं में 26 फीसदी के पीछे सीपीआई (माओवादी) का हाथ था. दूसरे नंबर पर जैश-ए-मोहम्मद (नौ फीसदी) रहा. 37 फीसदी घटनाओं के पीछे किसी संगठन को जिम्मेदार नहीं बताया गया है. अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में भारत के सभी 29 राज्‍य आतंकवाद से प्रभावित रहे. पिछले साल पूरे देश में हुई 671 आतंकी वारदातों में 971 लोगों की मौत हुई. जम्‍मू-कश्‍मीर के बाद सबसे खराब हालात छत्‍तीसगढ़ के रहे. राज्‍य में 111 आतंकी वारदातें हुईं. वहीं, मणिपुर में 22 हमले हुए. अकेले जम्‍मू-कश्‍मीर में 386 आतंकी हमले हुए. वैसे CPI माओवादी को भारत सरकार भी आतंकी संगठन मानती है. जानिए, ऐसा क्या है इस संगठन में जो इसे इतना खूंखार बनाती है.

पार्टी का इतिहास

पहले एक ही पार्टी हुआ करती थी- मार्क्सवादी पार्टी. लेफ्ट की इस पार्टी के दो धड़ों में बंटने की कहानी आपसी टकराव पर आधारित है. साल 1965 में बनी गार्जियन पार्टी यानी मार्क्सवादी पार्टी में कई सदस्यों का वैचारिक मतभेद था. वे संघर्ष और हिंसा के रास्ते को प्राथमिकता देते थे. वहीं दूसरा धड़ा शांति से हल तक पहुंचना चाहता था और लोगों को खुद से जोड़ने के लिए नुक्कड़ नाटक, गीतों-कविताओं की मदद लेता था. जल्दी ही गार्जियन पार्टी लोकप्रिय हो गई, वहीं कुछेक सदस्यों का असंतोष बढ़ता चला गया. इन्हीं हालातों में माओवादी पार्टी का उदय हुआ. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) या भाकपा माओवादी की स्थापना कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)), पीपुल्स वार ग्रुप और माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एमसीसीआई) के विलय से हुई थी. 14 अक्टूबर को इसके विलय की आधिकारिक घोषणा हो गई.

CPI Maoist

सरकार ने भी माना आतंकी

राष्ट्रीय राजनैतिक दल के तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) पहले से ही अस्तित्व में थी. ऐसे में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) संगठन से इसके घालमेल और किसी अस्पष्टता की स्थिति को टालने के लिए तत्कालीन सरकार ने माओवादी संगठन को आतंकवादी संगठन की श्रेणी में रखा. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि माओ संगठन का मकसद आमतौर पर राजनैतिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा करना रहा. ये पार्टी किसी समस्या के समाधान के लिए संघर्ष और हिंसा का रास्ता लेती है, जैसे नक्सल हिंसा. तब 22 जून,2009 को Union Home Minister P Chidambaram ने प्रेस कॉफ्रेंस लेते हुए कहा कि माओवादी संगठन अब से आतंकी संगठन माना जाएगा, जिसके कार्यकर्ताओं पर यूएपीए (Unlawaful Activities (Prevention) Act) के तहत कार्रवाई की जा सकेगी.

इस एक्ट के तहत देशव्यापी प्रतिबंध लगने के बाद माओ संगठन के रैलियों, आमसभा और दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लग गई ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकी जा सके. इसके बाद इस पार्टी के कार्यकर्ताओं के ज्यादातर बैंक अकाउंट भी सील हो गए.

ऐसा क्या है माओ संगठन में

CPI (Maoist) सरकार से संघर्ष के लिए आम लोगों को सड़क पर उतारने पर यकीन रखती है. ये विचारधारा चीनी विद्रोही नेता माओ जेडोंग (Mao Zedong) की विचारधारा से प्रेरित है. ये नेता मॉर्डन हिस्ट्री में काफी लोकप्रिय लेकिन विवादास्पद रहे, जिनके नेतृत्व में चीन की जनसंख्या 550 मिलियन से सीधे 900 मिलियन हो गई. इसी नेता के शासन के दौरान अलग धर्म और मत मानने वाले हजारों लोगों की बड़े खूंखार तरीके से हत्या की गई जैसे भूखा रखकर, जेल में सड़ाकर और सामूहिक फांसी देकर. माओ संगठन इसी लीग पर काम करता है.

CPI Maoist organization sixth most dangerous organization in the world

संगठन की सशस्त्र शाखा

इसकी एक शाखा के सदस्य हथियारबंद रहते हैं, इस संगठन को People’s Liberation Guerrilla Army (PLGA) के नाम से जाना जाता है. इन्हें ही नक्सल भी कहा जाता है. नक्सलियों की ठीक-ठीक संख्या का उल्लेख कहीं नहीं, लेकिन अंदाजा है कि ये 8 से 10 हजार तक हैं और देश के लगभग सभी राज्यों में काम कर रहे हैं. वहीं माओ संगठन के सदस्य 20 से 25 हजार के लगभग माने जाते है. इसका जिक्र अलजज़ीरा ( aljazeera) की वेबसाइट में मिलता है. हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार माओ सदस्यों की संख्या लगभग साढ़े 8 हजार है.

माओवादी कैसे करते हैं काम
भारत में माओ विचारधारा के लोग आदिवासियों के साथ जुड़े हैं, जो अपने जंगल और जमीनों के औद्योगिकीकरण से परेशान हैं और सरकार से नाराज हैं. ऐसे में नक्सली उन्हें सरकार के खिलाफ एकजुट करते हैं और तैयार करते हैं कि वे अपने इलाकों में किसी सरकारी अफसर या किसी नीति को न आने दें, चाहें इसके लिए हिंसा का रास्ता ही क्यों न अपनाना पड़े. देश में अक्सर छत्तीसगढ़, बंगाल, आंध्रप्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों में सरकारी लोग नक्सल आतंक का शिकार होते आए हैं. साल 1980 से अब तक20,000 से भी ज्यादा मासूम लोग नक्सल आतंक का शिकार हुए हैं. कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान साल 2009 में पीएम मनमोहन सिंह ने नक्सल गतिविधियों को सबसे बड़ा “internal security threat” कहा था. इसी दौरान ऑपरेशन ग्रीन हंट चला, जिसकी वजह से बहुत से आदिवासियों जो तब नक्सली बन चुके थे, ने सरेंडर किया.

क्यों भड़का हुआ है अमेरिका
वैसे तो अमेरिकी रिपोर्ट में सीपीआई (माओवादी) से पहले अफगानिस्‍तान के तालिबान (Taliban), अफ्रीका के अल-शबाब (Al-Shabaab), बोकोहराम (Boko Haram) और फिलीपींस की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के बाद सबसे खतरनाक संगठन बताया गया है. वहीं माओ संगठन को खूंखार आतंकवादी संगठन मानने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. जैसे ये वो पार्टी है जो रूस के लेनिनवादी सिद्धांत को नहीं मानती, बल्कि इसका आदर्श चीन के माओ जेडोंग हैं. यानी वर्गसंघर्ष और विद्रोह का रास्ता. वैश्विक स्तर पर भी इस तरह के दल अमेरिका की पूंजीवादी नीतियों का विरोध करते आए हैं. माना ये भी जाता है कि अमेरिका किसी भी वामपंथी विचारधारा के लिए खुलकर अपना असंतोष दिखाता है, चाहे वो रूस हो या फिर चीन. हो सकता है कि ये आपसी संघर्ष के हालात हों, जिनकी वजह से भी माओ संगठन को 6th deadliest terror organisation की श्रेणी में रखा गया है.

(यह पोस्ट IndiaFirst द्वारा नहीं लिखा गया है, मूल पोस्ट https://hindi.news18.com/ पर प्रकाशित हुआ था)


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