बाबरी मस्जिद विध्वंस पर कोर्ट का फैसला: साजिश नही अचानक घटी घटना

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट का फैसले आ चुका है। 28 साल तक चले इस केस में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित सभी 30 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। आइये जानते है कि कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश सुनाया है।

अचानक हुई थी घटना: कोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 28 साल पहले बाबरी मस्जिद में कुछ हुआ था वो पूर्व नियोजित घटना नहीं थी बल्कि अचानक हुई थी। अदालत ने कहा कि जो साक्ष्य हैं वो सभी आरोपियों को बरी करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने सीबीआई के साक्ष्य पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि SAP सील बंद नहीं थी और इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि 28 साल पहले 6 दिसंबर को कार सेवा के दौरान अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस हो गई थी। इतिहास में जाये तो बाबरी विध्वंस मामले की जांच 27 अगस्त 1993 को सीबीआई के हवाले कर दी गई थी। ये मामला 26 सालों तक लटकता रहा लेकिन 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की रोज सुनवाई के आदेश दिए थे, साथ ही कहा था कि जब तक ये मामला चलेगा, तब तक जज का ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकेगा। जिसके बाद ये फैसला सामने आया है।

आडवाणी बोले जय श्रीराम

फैसला आने के बाद सबसे ज्यादा खुश अगर दिखे तो वो थे आडवाणी जी। कोर्ट के फैसले को उन्होने बहुत समय बाद अच्छा समाचार बताया। आडवाणी जी ने बोला, ‘आज को जो निर्णय हुआ है वह काफी महत्वपूर्ण है। यह काफी खुशी वाला दिन है। काफी दिनों बाद कोई खुशी का समाचार मिला है। स्पेशल कोर्ट का जो निर्णय हुआ है वह अत्यंत महत्वपूर्ण है।’ आडवाणी ने इसके बाद जय श्रीराम का नारा भी लगाया। आडवाणी ने कहा, ‘इस फैसले ने मेरे निजी राम जन्मभूमि मूवमेंट की भावना को भी सही साबित किया है। मैं इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करता हूं। इसके साथ साथ दूसरे नेताओं ने भी अपनी खुशी जाहिर की तो कोर्ट रूम में विनय कटियार, साक्षी महाराज, साध्वी ऋतंभरा, चंपत राय, रामविलास वेंदाती, सतीश प्रधान, धर्मदास, पवन पाण्डेय, बृजभूषण सिंह,  जयभगवान गोयल, ओमप्रकाश पाण्डेय, रामचंद्र खत्री, सुधीर कक्कड़, अमरनाथ गोयल, संतोष दुबे, लल्लू सिंह, कमलेश त्रिपाठी, विजय बहादुर सिंह,  आचार्य धर्मेन्द्र, प्रकाश शर्मा, जयभान पवैया, धर्मेन्द्र सिंह, आरएन श्रीवास्तव, विनय कुमार, नवीन शुक्ला और गांधी यादव मौजूद रहे।

कोर्ट के इस फैसले के बाद ये तो साबित हो गया कि कार सेवा वाले दिन भी मस्जिद न तोड़ी जाए, इसकी कोशिश ये नेता करते रहे और खुद कोर्ट के जज एसएस यादव ने अपने फैसले में ये बात साफ भी की है। जिससे ये पता चलता है कि उस दिन जो कुछ भी हुआ वो सिर्फ भावावेष में हुआ। ऐसे में उन लोगों से पर्दा उठ गया है जो लोग इस पूरी घटना को साजिश बोलकर भारतीय संस्कृति पर आरोप लगाते थे।