देश को जल्द मिलेगा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ – नया पद बनाने को मंजूरी

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मोदी सरकार ने देश से किया एक और वादा पूरा कर दिया है| लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने भाषण में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पोस्ट का ऐलान किया था| उल्लेखनीय है कि करगिल रिव्यू कमिटी ने 1999 में इस पद का सुझाव दिया था|

आज कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद बनाने को मंजूरी दे दी है। इस तरह जल्द ही देश को पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) मिलेगा।

क्या करेंगे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मुख्यत: रक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेंगे| इस पद पर नियुक्ति नियुक्ति का मकसद भारत के सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को ऐतिहासिक सैन्य सुधार की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत की तीनों सेना के लिए एक प्रमुख होगा, जिसे सीडीएस कहा जाएगा। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद सीडीएस की नियुक्ति के तौर-तरीकों और उसकी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।

क्या बदलेगा इस पद पर नियुक्ति के बाद

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का सबसे बड़ा फायदा युद्ध के समय होगा। युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय कायम किया जा सकेगा। इससे दुश्मनों का सक्षम तरीके से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

सैन्य रणनीति में चूक से बचा जा सकेगा

  • 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय वायुसेना को कोई भूमिका नहीं दी गई थी, जबकि भारतीय वायुसेना तिब्बत की पठारी जगह पर जमा हुए चीनी सैनिकों को निशाना बना कर उनके बीच तबाही मचा सकती थी।
  • इसी तरह से 1965 के भारत – पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना को पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हमले की योजना से अवगत नहीं कराया गया था।

अगर इन दोनों मौकों पर सेना के विभिन्न अंगों में समन्वय होता तो परिणाम कुछ और हो सकते थे| चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रहते हुए इस तरह की कोई खामी नहीं रहेगी और सेना प्रभावी ढंग से दुश्मन से निपट सकेगी।


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