देश नई रीति नई नीति के साथ विकास के पथ पर– पीएम मोदी

संविधान दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने साफ किया की अब देश नई रीति नई नीति से चल रहा है तभी आतंकवाद का मुद्दा हो या फिर कोरोना से जंग हर विपदा से मजबूती के साथ निपटा जा रहा है। आतंक को मुंहतोड़ जवाब देने वाले हमारे सुरक्षाबलों का वंदन करते हुए पीएम मोदी ने बोला कि कि मुंबई हमले के जख्म भारत भूल नहीं सकता है। लेकिन अब भारत बदल चुका है वो ऐसे हमलों के जवाब में करारा हमला करता है।

26/11 के शहीदों को पीएम ने किया याद

गुजरात के केवडिया में हो रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में पीएम ने सबसे पहले 26/11 मुंबई हमले का जिक्र किया पीएम ने बोला कि आज का दिन भारत कभी भूल नही सकता है। पाकिस्तान से भेजे गये आतंकियों ने कैसे मुंबई में दहशत फैलाई थी सभी को याद है। लेकिन वो गुजरे जमाने की बात थी, अब देश नई रीति नीति पर चल रहा है और आगे बढ़ रहा है। जिसमें आंतकवादियों को और उनके साथ खड़े होने वालों को करारा जवाब दिया जा रहा है।

कोरोना काल में जनता ने मजबूती दिखाई

इतना ही नही पीएम मोदी ने संविधान दिवस के मौके पर बोला कि इमरजेंसी के दौर के बाद विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका काफी कुछ सीखकर आगे बढ़े। कोरोना काल में भारत की 130 करोड़ की जनता ने परिपक्वता का परिचय दिया है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों में तय समय से ज्यादा काम हुआ है। सांसदों ने वेतन में कटौती कर प्रतिबद्धता जताई है। कोरोना दौर में हमारी चुनाव प्रणाली भी दुनिया ने देखी। समय पर नतीजे आना और नई सरकार बनना इतना आसान नहीं है। संविधान से मिली ताकत इसे आसान बनाती है। आने वाले समय में संविधान 75वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में व्यवस्थाओं को समय के हिसाब से बनाने के लिए हमें संकल्पित भाव से काम करना होगा। संकल्प को सिद्ध करने के लिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक साथ मिलकर काम करना है।

संविधान की भाषा सरल होनी चाहिए

पीएम मोदी ने इस दौरान बोला कि संविधान की भाषा ऐसी हो जो सभी को समझ में आये जिससे हर नागरिक का आत्मविश्वास बढ़े, संविधान की भी यही अपेक्षा है। यह तभी होगा, जब हम कर्तव्यों को प्राथमिकता देंगे लेकिन पहले के दौर में इसे ही भुला दिया गया। लेकिन जब से हम सत्ता में आये है तब से सरकार का एक ही प्रयास है कि लोगो को कानून के चलते कम से कम परेशानी उठानी पड़े इसके लिये हमने कई कानून को खत्म किया है तो कई कानून को सरल भी बनाया है जिससे लोगों की दिक्कत दूर हो सके।

वन नेशन, वन इलेक्शन पर चर्चा जरूरी

पीएम मोदी ने वन नेशन, वन इलेक्शन पर सोच-विचार को जरूरी बताते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी इस बारे में गाइड कर सकते हैं। पूरी तरह डिजिटाइजेशन का समय आ गया है। पीठासीन अधिकारी इसे सोचेंगे तो विधायकों को आसानी होगी। अब हमें पेपरलेस तरीकों पर जोर देना चाहिए। संविधान सभा इस बात को लेकर एकमत थी कि भारत में बहुत सी बातें परंपराओं से स्थापित होंगी। विधानसभा में चर्चा से ज्यादा से ज्यादा लोग कैसे जुड़ें, इसके लिए कोशिशें होनी चाहिए। जिस विषय की सदन में चर्चा हो, उनसे संबंधित लोगों को बुलाया जाए। मेरे पास तो सुझाव हैं, लेकिन आपके पास अनुभव है।

पीएम मोदी ने एक बार फिर देश 6 सालो में बिलकुल बदल गया है। आत्मविश्वास से भरा भारत अब आत्मिर्भर बनने की ओर चल पड़ा है और इसके लिये भारत का संविधान देश के लिए मजबूत रास्ता बना रहा है।