दानवीरों का देश भारत

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हमारे समाज में बताया गया है कि धन का सर्वश्रेष्ठ उपयोग दान करना है। यही वजह है कि भारत भूमि कभी दानवीरों से रिक्त नहीं रही। जब जब देश पर कोई संकट आता है, तो ये दानवीर देश को बचाने के लिए हमेशा आगे आते हैं और संकट से उबारते हैं। कोरोना काल में भी कुछ ऐसा ही आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, लेकिन इस सकंट से निपटने के लिए देश का क्या अमीर हो या गरीब सब अपने-अपने तरीके से मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

कोरोना संकट से निपटने में दान बना हथियार

कोरोना महामारी ने वैसे तो हमें एक दूसरे से मिलने पर रोक लगा दी है, लेकिन दूरी होने के बाद भी हमारे दिल आपस में खूब मिल रहे हैं। देखा जाये, तो जो दूरी हमारे बीच में बन गई थी वो खत्म हो गई है। आपसी भाईचारा इस वक्त सड़को पर खूब देखा जा रहा है। हर तरफ लोगों की मदद के लिए हाथ आगे आ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ पैसे वाले ही नही बल्की गरीब भी दिल खोल के मदद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री केयर फंड में तो छोटे-छोटे बच्चे भी अपनी जमा रकम दान में दे रहे हैं, तो कुछ बुजुर्ग पेंशन की रकम को दान में देना अपना फर्ज समझ रहे हैं। इसी प्रकार बड़े उघोगपति जैसे रतन टाटा ,मुकेश अंबानी, अडाणी, जैसे तमाम कारोबारी भी आगे आये हैं। फिल्मी कलाकारों की भी फेहरिस्त बड़ी लंबी है   इतना ही नही नौजवान श्रमदान करते हुए आप को सड़को पर दिख रहे होंगे। कोई गरीब को खाना खिला रहा है तो कोई उनकी मदद करने में लगा है। इसको देखकर तो यही लगता है कि अभी मानवता इस धरती से खत्म नही हुई है। नेकी आज भी बदी पर हावी है और जीत रही है।

सहारा बनने का पुराना इतिहास

हमारे यहां कहा जाता है कि अगर हम किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं तो एक तरह से भगवान की मदद करते हैं। इसीलिये तो भगवान विष्णु की आराधना करते हैं तब कहते भी हैं–तेरा तुझको अर्पण‚ क्या लागे मेरा। इसी तरह महाकवि तुलसीदास जी ने भी प्रभु श्रीराम के चरित्र का वर्णन करने वाले अपने ग्रंथ रामचरितमानस में लिखा है कि धन का सबसे अच्छा उपयोग दान है। इसलिए जिस देश के लोगों की सोच ऐसी हो वो कोरोना तो क्या किसी भी संकट से पार पा सकता है और इतिहास इसका साक्षी है कि पहले भी हमने बड़े बड़े संकटो को हंसकर काट दिये थे ,फिर वो अनाज की कमी हो या फिर 1999 में लगाये गये विदेशी प्रतिबन्ध, हर संकट का जबाब हमने शांति और एकता के साथ दिया जैसा कि हम कोरोना महामारी के वक्त भी  कर रहे हैं

बहरहाल कुछ लोग जरूर हैं जो हमें भ्रमित करने के लिये सवाल उठा रहे हैं और ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि हम लोगों के साथ धोखा हो रहा है लेकिन बहकावे में जाने से पहले इनकी हर बात को जांच परख जरूर लेना चाहिये जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। वैसे भी कुछ लोगों का काम है, छोड़ो बेकार की बातों को और देश को नये सिरे से बनाने के लिये हमें लगे रहना है।


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