देश की सियासत से परिवारवाद और वंशवाद की उल्टी गिनती शुरू

पीएम मोदी ने एक बार फिर से भारतीय सियासत में छाये परिवारवाद और वंशवाद पर सवाल खड़े करते हुए जोरदार हमला बोला है। पीएम मोदी ने साफ किया है कि परिवारवाद जातिवाद को बढ़ावा देने से ही जनतंत्र कमजोर होता है। यह हमला उन्होंने अपनी पार्टी पर भी बोला। साफ है कि वह पार्टी को नए विमर्श के लिए तैयार कर रहे हैं और साथ ही लोकसभा चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाने के लिए धार भी दे रहे हैं।

राजनीति में जातिवाद और वंशवाद देश के लिए घातक

पीएम मोदी ने एक बार फिर से परिवारवाद और जातिवाद पर सवाल खड़े करते हुए उसे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। इस बाबत पीएम मोदी ने अपनी पार्टी की बैठक में साफ किया कि उन्होने सांसदों के बेटे-बेटियों को टिकट न देने का फैसला मेरा था और अगर ये पाप है तो वो पापी है। लेकिन कही न कही पीएम मोदी ने इस बाबत देश के भीतर एक नई सियासत को जन्म दे दिया है और वो है परिवादवाद को सियासत में कम करने की। वैसे भी पीएम मोदी लगातार देश की सियासत 7 सालों से बदलने में जुटे हुए है। मोदी जी उपदेश कुशल बहुतेरे वाले नहीं हैं। वह पहले आचरण करते हैं, फिर नियम बनाते हैं। वैसे पीएम मोदी पिछले कई बड़े भाषण में इस पर लोगों का ध्यान खीच चुके है और अब अपनी पार्टी से इसपर अमल भी शुरू कर दिया है।

नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में भी है परिवारवाद | दुनिया | DW | 20.03.2019

कांग्रेस से निकले दलों ने भी वंसवाद को खूब पनपाया

वैसे ये विडंबना ही है एक समय गैर कांग्रेसवाद की राजनीति का मुख्य आधार कांग्रेस का वंशवाद और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान था, लेकिन उससे लडऩे वाले दल धीरे-धीरे उसी के जैसे बन गए। शायद उन्होंने यह मान लिया कि यह तो बड़ी अच्छी व्यवस्था है और ज्यादातर दल भी इसी राह पर चल दिये। आलम ये हुआ कि कुछ पार्टियों में तो सिर्फ वंशवाद ही दिखाई देता है। ये ऐसा नही कि किसी एक राज्य में हो बल्कि समूचे भारत में इसकी झलक दिखाई देती है और इससे ऐसा नही कि मोदी जी की पार्टी बची रही हो लेकिन आज पीएम मोदी ने एक नया संकल्प लिया है जिसमे उन्होने इसके खिलाफ जंग छेड़ी है।

इस बात को तो सभी जानते है कि अगर पीएम मोदी ने किसी मुद्दे को लेकर जंग छेड़ते है तो उसे जीत कर ही रहते है जैसे दूसरे मुद्दो में भी देखा गया है।