इंडियन करप्शन सर्वे में मोदी राज में 10 प्रतिशत भ्रष्टाचार हुआ कम

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Corruption reduced by 10 percent in Modi Rajप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का हमेशा भ्रष्टाचार के प्रति नीति सख्त रही है। मोदी सरकार ने बहुत से ऐसे तरीके अपनाये है कि जिससे करप्शन की गुंजाइश खत्म हो जाए। इसके लिए डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया गया है, तमाम सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है। इन्हीं सब कदमों का परिणाम है कि देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लग रही है।

सरकार की लगातार सुधारवादी नीतिओं के कारण रिश्वतखोरी को लेकर भारत की इमेज सुधरती नजर आ रही है। एक ताजा सर्वे के मुताबिक भारत में रिश्वत की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। ‘इंडिया करप्शन सर्वे 2019’ के मुताबिक, 20 राज्यों में यह सर्वेक्षण कराया गया, जिससे यह नतीजे सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण में करीब 2 लाख लोगों को शामिल किया गया।

यह सर्वेक्षण गैर-राजनीतिक, स्वतंत्र और गैर-सराकारी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल इंडिया ने कराई है।

सर्वे में बताया गया है कि पैसा रिश्वत का मुख्य माध्यम है।सर्वे के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरला, गोवा और ओडिशा में भ्रष्टाचार के मामले सबसे कम पाए गए, जबकि राजस्थान, बिहार, यूपी, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड और पंजाब में सबसे अधिक मामले सामने आए।

मोदी राज में भ्रष्टाचार सूचकांक में 16 अंकों का सुधार

प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है। 2018 के वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक के मुताबिक भारत की रैंकिंग सुधरी है। भारत ने भ्रष्टाचार अनुमान की सूची में पिछले साल के मुताबिक तीन रैंक का सुधार किया है। अब यह 180 देशों की सूची में 78वें स्थान पर है। 2013 में यूपीए सरकार में 94वें स्थान की तुलना करें तो मोदी सरकार आने के बाद इस इंडेक्स में भारत 16 अंकों का सुधार कर चुका है। मोदी राज में पिछले पांच वर्षों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की तमाम रैंकिंग में सुधार हुआ है।

मोदी राज में पिछले पांच वर्षों में भारत की कुछ अहम उपलब्धियां इस प्रकार है-

भारत विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 14 पायदान चढ़कर 63 वें स्थान पर

मोदी सरकार द्वारा इकोनॉमी की दिशा में किए गए प्रयास को अब वर्ल्ड बैंक ने भी स्वीकार किया है। वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत की रैंकिंग 14 पायदान चढ़कर 63 वें स्थान पर पहुंच गई है। भारत लगातार तीसरी बार शीर्ष 10 सुधारक देशों की सूची में शामिल हुआ।

भारत पिछली रैंकिंग में 190 देशों में 77 वें स्थान पर था, एक साल पहले उसकी स्थिति की तुलना में 23 स्थानों का सुधार हुआ है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मतलब कारोबारी सुगमता यानी ये जानना कि किसी देश में कारोबार शुरू करना कितना आसान या मुश्किल है। मसलन, कारोबार शुरू करने में कितना समय लगता है, कोई बिल्डिंग बनानी है तो उसकी इजाज़त लेने में कितना वक़्त लगता है। विश्व बैंक ने अपने सर्वे में कहा है कि भारत ने कई आर्थिक मोर्चों पर सुधार किया है। नरेंद्र मोदी सरकार में हुए आर्थिक सुधारों के कारण भारत की स्थिति सुधरी है।

सबसे मूल्यवान राष्ट्रीय ब्रांड रैंकिंग में भारत 7 वें स्थान पर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। ‘ब्रैंड फाइनेंस’ द्वारा 2019 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व रैंकिंग सूची में सातवां सबसे मूल्यवान राष्ट्रीय ब्रांड बन गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने इस वर्ष दो स्थानों की छलांग लगाई है। एक साल में भारत की ब्रैंड वैल्यू बढ़कर 2,56,200 करोड़ डॉलर हो गई है। इस तरह भारत के ब्रैंड वैल्यू में 18 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ‘ब्रैंड फाइनेंस’ की ओर से जारी इस लिस्ट में संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी नंबर एक की स्थिति को बनाए रखा हुआ है। इस लिस्ट में अमेरिका के बाद चीन, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस का स्थान है।

विश्व डिजिटल प्रतिस्पर्धा रैंकिंग में भारत 44वें स्थान पर पंहुचा

वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल प्रतिस्पर्धा को अपनाने और इसका पता लगाने के लिए ज्ञान और भविष्य की तत्परता के मामले में भारत ने दुनिया में डिजिटल प्रतिस्पर्धा के मामले में चार स्थान चढ़कर 44वें स्थान पर आ गया है।

भारत इस साल 2018 में 48वें स्थान से बढ़कर 44वें स्थान पर पहुंच गया क्योंकि देश में पिछले साल की रैंकिंग की तुलना में सभी कारकों – ज्ञान, प्रौद्योगिकी और भविष्य की तत्परता में समग्र सुधार हुआ है।

IMD वर्ल्ड डिजिटल कॉम्पिटिटिव रैंकिंग 2019 (WDCR) के अनुसार, “भारत ने 2019 में चार स्थान ऊपर चढ़ते हुए, प्रौद्योगिकी स्तर में सबसे बड़े सुधार के साथ दूरसंचार निवेश में पहला स्थान हासिल किया”।

अमेरिका को दुनिया की सबसे डिजिटल प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थान दिया गया है, जिसके बाद सिंगापुर दूसरे स्थान पर है।

पर्यटन के क्षेत्र में भारत ने लगाईं लंबी छलांग

वर्ल्ड ट्रैवल और टूरिज्म कॉम्पेटिटिवनेस इंडेक्स

भारत दुनिया भर में यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में 34 वें स्थान पर पहुंच गया है। बीते साल भारत इस सूचकांक में 40वें स्थान पर था। यानी कि इस बार 6 अंकों का सुधार हुआ है और भारत उछलकर 34वें नंबर पर आ पहुंचा है। बता दें कि इस वर्ष वैश्विक यात्रा और पर्यटन प्रतिर्स्पधात्मकता सूचकांक में कुल 140 देश शामिल हुए हैं। वहीं शीर्ष पर एक बार फिर से स्पेन का कब्जा है। जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत की रैंकिंग में सुधार की वजह प्राकृतिक और सांस्कृतिक संसाधन है। जिसमें समृद्ध होने के चलते ही भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है।

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की 5 पायदान की छलांग

भारत ने 2019 में वैश्विक नवाचार सूचकांक में अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए 57 वें से 52 वें स्थान पर पहुंच गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) 2019 जारी किया। इसमें दुनिया भर के 129 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के नवाचार प्रदर्शन को स्थान दिया गया।

वर्तमान रैंकिंग जीआईआई का बारहवाँ संस्करण था और रैंकिंग 80 संकेतकों पर आधारित थीं, जिसमें पारंपरिक माप जैसे अनुसंधान और विकास, निवेश और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट और ट्रेडमार्क एप्लिकेशन से लेकर नए संकेतक मोबाइल फ़ोन-एप्प निर्माण और उच्च-तकनीकी निर्यात शामिल थे।

 


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