कोरोना भी जिस पर नही लगा पाया ब्रेक

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कोरोना काल के क्रूर वक्त ने लॉकडाउन की ऐसी बेड़िया डाली, कि दौड़ती जिंदगी थम गई, कारखानों से आने वाली मशीनों की आवाज मंद पड गई, जो जहां था वो वहां रुक गया, मानो ऐसा लगा जैसे सब कुछ थम सा गया हो लेकिन इस थम सी गई जिंदगी में भी कोई था जो लगातार अपनो के लिये दौड़ लगा रहा था और वो थी भारतीय रेल, जो देश वासियों को खाने पीने की दिक्कत न हो इसके लिये सरपट पटरी पर दौड़ लगा रही थी।

 

2067 माल गाड़ियों ने 82 रूटों पर भरी रफ्तार

रेलवे की माने तो 24 मार्च से 5 मई तक इन ट्रेनो ने बड़े शहरो में दूध सब्जी और इससे बने समान के साथ साथ राशन का सामान भी एक शहर से दूसरे शहर तर पहुंचाया। रेलवे की माने तो सिर्फ दूध सब्जी  ऐसे जरूरी समान करीब 54292 टन सामान की ढुलाई रेलवे ने इन दिनो की इसके साथ साथ अनाज की बात करे तो करीब 16 टन अनाज हर दिन एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा गया। खासतौर से गुजरात और आंध्रा प्रदेश से दूध लेकर उसे देश के जरूरतमंद दूसरे शहरों में पहुंचाया गया. दवाएं और चिकित्सा सामान भी सप्लाई किया गया। यह सभी ट्रेन टाइम फ्रेम में चलाई गईं थी. सभी का टाइम तय था. खास बात यह है कि इसी तरह की स्पेशल ट्रेन से बीमारी से पीड़ित बच्चों को राजस्थान के पाली शहर से ऊंटनी का दूध भी सप्लाई किया गया। इसी तरह उन लोगो तक दवा भी पहुंचाई गई जहां दवा नही पहुंच पा रही थी। इसके लिये रेलवे ने रात दिन काम भी किया।

छोटे पार्सल की बड़ी जिम्मेदारी भी निभाई

लॉकडाउन को देखते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों का रोल खासा अहम होने वाला था ऐसे में  चिकित्सा आपूर्तियों, स्वास्थ्य उपकरण, खाद्य पदार्थ आदि आवश्यक सामानों की ढुलाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी. इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए रेलवे ने ई-कॉमर्स कंपनियों को छोटे पार्सल वैन उपलब्ध करवाये जिससे उन्हे दिक्कत न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। खासबात यहां ये रही ये ट्रेने अपने निर्धारित समय में ही चली और ठीक वक्त पर ही पहुंची जिससे सामान भी खराब न हो पाया। रेलवे ने इसके साथ साथ 54,292 टन अनाज को भी पहुंचा कर देश में सप्लाई की चैन बनाई रखी।

प्रवासी कामगारों को पहुंचाया घर

इसके साथ साथ लॉकडाउन में जब थोड़ी छूट मिली तो रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला कर उन लोगो को मिलवाया जो लॉकडाउन में अपने घरो से काफी दूर थे। ऑकड़ो पर नजर डाले तो करीब 3 लाख लोगो को रेलवे से उनके घर तक पहुचा दिया है। इसके लिये रेलवे ने 265 स्पेशल ट्रेन चलाई सबसे खासबात ये है कि रेलवे ने इसके लिये किसी भी कामगार या मजदूरों से पैसा भी नही लिया बिलकुल फ्री में ये सुविधा लोगो को दी गई। अभी ये सेवा लगातार चल रही है। और कयास लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनो में ट्रेनो की संख्या रेलवे और बढ़ा सकता है।

पटरी मरम्मत करके लॉकडाउन के वक्त का किया सही इस्तेमाल

इन 40 दिनों के लॉकडाउन की अवधि का भारतीय रेलवे ने भरपूर इस्तेमाल किया। भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन के दौरान 50 साल पुराने लकड़ी के सीजर क्रॉस ओवर यानि पटरियों के नीचे लगने वाले स्लीपर को चेंज कराया। साथ ही सालों से बंद 100 साल पुराना FOB तोड़ा। वहीं मेंटिनेंस करने के दौरान रेलवे ने ऑफिशियल तौर पर करीब 705 घंटे का ब्लॉक भी लिया।रेलवे की माने तो इस दौरान 12,270  किलोमीटर लंबी पटरियों की मरम्मत का काम हुआ। इस काम का असर ये देखा जायेगा कि आने वाले दिनों में ट्रेन ज्यादा रफ्तार के साथ दौड़ेगी साथ ही लेट कम होगी। यानी की रेलवे ने लॉकडाउन के बंदी का भी सटीक उपयोग करके ये दिखा दिया कि भारतीय रेल कभी भी रुक नही सकती फिर चाहे परिस्थिति कैसी भी क्यो न हो।

मतलब साफ है कि जहां कोरोना ने सब काम को रोक दिया था तो भी रेलवे के हौसले इतने बुलंद थे कि वो इस माहामारी से जंग लड़कर देश की जनता के लिये काम करती रही। ऐसे में रेलवे के इस योगदान को आने वाले दिनो में जरूर याद किया जायेगा।


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