कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर चीन और अमेरिका के बीच छिड़ी जुबानी जंग

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कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन और अमेरिका एक बार फिर आमने सामने हैं | दोनों मे जुबानी जंग छिड़ी हुई है | इसके फैलाव के लिये दोनों एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं | अमेरिका ने इसे ‘वुहान वायरस’ बताया तो चीन ने कहा है कि अमेरिकी सेना के एजेंट इस वायरस को वुहान लाए हैं। चीन ने कहा कि वुहान में वायरस का संक्रमण पहले फैलने का यह मतलब नहीं है कि वायरस यहीं से पैदा हुआ।

चीन के रेस्पिरेटरी स्पेशलिस्ट (श्वसन रोग विशेषज्ञ) झोंग नानशान ने कहा, ‘‘2009 में मैक्सिको से एच1एन1 फ्लू फैला था तो क्या इसे ‘मैक्सिको वायरस’ कह दें। या फिर 2012 में सऊदी अरब से मर्स फैला था। इस तरह से इसे भी ‘सऊदी अरब का वायरस’ कहना चाहिए, लेकिन हम ऐसा नहीं कह सकते। यह वायरस किसी तरह से पनपे और फैल गए, इसमें किसी का हाथ नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 को ‘वुहान वायरस’ नहीं कहा जा सकता। इसकी अभी तक वैज्ञानिक तौर पर पुष्टि भी नहीं हुई है। हो सकता है कि जहां कोविड-19 वायरस पैदा हुआ हो वहां उसका संक्रमण फैला ही न हो। 

चीन ने बताया कोरोनावायरस को कौन मार सकता है?

चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन की ओर से गाइडलाइन जारी कर बताया गया है कि कुछ उपायों से वायरस को खत्म किया जा सकता है। पहला उपाय अल्ट्रावायलेट (यूवी)  रेडिएशन है। यूवी रेडिएशन में इस वायरस को खत्म करने की क्षमता होती है, लेकिन यूवी लैंप का इस्तेमाल हाथ और किसी भी जगह की त्वचा पर नहीं करना चाहिए। रेडिएशन की वजह से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही अगर वायरस को 30 मिनट तक 56 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखा जाए तो इसे निष्क्रिय किया जा सकता है। इसके अलावा क्लोरीन आधारित कुछ ऐसे कीटाणुनाशक हैं जो सतह के वायरस को मार सकते हैं। इनमें ईथर, 75 प्रतिशत एथेनॉल, पैरासिटिक एसिड और क्लोरोफार्म होता है।

 


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