पिछले एक महीने मे 22 पर्सेंट से 8 पर्सेंट पर आ गये कोरोना के मामले

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कोरोना के कारण लगाये गये लॉकडाउन को एक महीने हो चुके हैं | एक महीने पहले 25 मार्च को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया था, उस समय भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 500 के आसपास थे। हालांकि इस बात के स्‍पष्‍ट संकेत थे कि कोरोना वायरस विकराल रूप धारण करने जा रहा है तथा मामलों मे तेजी आने की पूरी पूरी सम्भावना जताई जा रही थी | 24 मार्च को देश भर में कोरोना से जुड़े मामलों का औसत दैनिक वृद्धि दर 21.6 पर्सेंट था जो अब घटकर 8.1 पर्सेट तक आ चुका है। अगर 21.6 पर्सेंट की दर से मामले बढ़ते रहते तो अबतक पूरे देश में कोरोना के 2 लाख से ज्‍यादा केस सामने आ चुके होते।

हालांकि, इस समय भारत में चल रहा 8.1 फीसदी दैनिक वृद्धि दर कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देशों की तुलना में अभी भी ज्‍यादा है। लॉकडाउन का पांचवां हफ्ता चल रहा है। इतने समय में जर्मनी में कोरोना मामलों का वृद्धिदर 2 फीसदी जबकि अमेरिका में 4.8 फीसदी तक आ गया था। भारत में जो दैनिक वृद्धि दर अभी चल रहा है, उसके हिसाब से अगले हफ्ते के अंत तक हम करीब 40 हजार कोरोना केसेज के नजदीक पहुंच जाएंगे। इस दर से अगले 15 दिनों में यह संख्‍या 70 हजार के आसपास और मई के अंत तक ढाई लाख के करीब पहुंच जाएगी।

5 पर्सेंट रहा वृद्धि दर तो 1 लाख से ज्‍यादा मामले नहीं

हालांकि, कुछ राज्‍यों ने कोरोना केसेज की वृद्धि दर में कमी लाने में सफलता हासिल की है। जैसे केरल में वृद्धि दर 1.8 फीसदी है जो जर्मनी से भी कम है। इनकी मदद से आने वाले दिनों में औसत वृद्धि दर नीचे जा सकता है। वृद्धि दर में थोड़ी कमी भी कुल कोरोना मामलों में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर भारत 6 फीसदी तक कोरोना वृद्धि दर कायम करने में सफल हो जाता है तो एक महीने बाद देश में करीब 1.3 लाख केस से निपटना होगा। इसी तरह, यदि वृद्धि दर 5 पर्सेंट तक है तो कोरोना के मामले एक लाख की संख्‍या नहीं पार कर पाएंगे।

भारत में अबतक कुल 23,452 मामले

आपको बता दें कि शुक्रवार को कोरोना वायरस के मामलों में 1,752 की वृद्धि हुई जो भारत में अब तक एक दिन में सामने आए सर्वाधिक मामले हैं। इसके साथ ही संक्रमण के कुल मामलों की संख्या लगभग 23,452 हो गई। सरकार का कहना है कि महामारी का प्रकोप नियंत्रण में है और यदि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू न किया जाता तो संक्रमण के मामलों की संख्या अब तक एक लाख तक पहुंच चुकी होती। सरकारी अधिकारियों ने महामारी के ‘नियंत्रण में होने’ का श्रेय लॉकडाउन और मजबूत निगरानी नेटवर्क तथा विभिन्न नियंत्रण कदमों को दिया।

 


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