‘मेड इन चाइना’ से अगर हैं परेशान, तो आ गया है मुस्कुराने का टाइम

एक ग़लती करने के बाद, जो आदमी उसे सुधारता नहीं है, वह असल में दूसरी ग़लती कर रहा होता है।

चीन (China) के महान विचारक कन्फ्यूशियस की यह बात आज चीन (China) पर बिल्कुल सटीक बैठता है। जो चीन (China)  कुछ महीने पहले तक सफलता के नशे में चूर हो कर दुनिया पर एक अलग प्रकार का आधिपत्य जमाए हुए था, आज उसी रेस से काफी दूर होता जा रहा है। चाहे अर्थव्यवस्था की बात हो, विकास की बात हो, निर्माण की बात हो, निवेश की बात हो या सैन्य ताकत की बात हो। पूरी दुनिया ही ‘मेड इन चाइना’ (Made In China) के गिरफ्त में थी। लेकिन कोरोना महामारी के बाद चीन (China) अलग थलग पड़ गया। दुनिया का अविश्वास और गुस्सा, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और तानाशाही शासन ने चीन (China)  को उस दौर में खड़ा कर दिया है जहां से वापस लौटना चीन (China) के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज है।

चीन (China)  की खुफिया रिपोर्ट : 30 साल पहले तियानमेन चौकवाला माहौल, गुस्से में है दुनिया

चीन (China) की एक चेतावनी भरा खुफिया रिपोर्ट आई है। अगर उस रिपोर्ट पर विश्वास करें तो चीन (China) का अच्छे दिन खत्म होने वाले हैं। कोरोना वायरस के कारण अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी गुस्से में है। चीन (China) पूरी दुनिया के नज़रों पर है और यह कड़वाहट कभी भी संघर्ष में बदल सकता है।

चीन (China) में तियानमेन चौक जैसी घटना दोहराने की बात चल रही है. 4 जून, 1989 को कम्युनिस्ट पार्टी के उदारवादी नेता हू याओबैंग की मौत के खिलाफ हजारों छात्र चीन (China)  के तियानमेन चौक पर प्रदर्शन कर रहे थेतभी रात में सेना ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की और उन पर टैंक चढ़ा दिया था। चीनी लोग कहते हैं कि उस घटना में करीब 3000 लोग मारे गए थे, चीनी के अनुसार 200 से 300 लोग मारे गए थे जबकि, यूरोपियन मीडिया ने 10 हजार लोगों के नरसंहार की आशंका जताई थी.

इन सबका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगी है। बहुत सारी विदेशी कंपनियां पलायन में लग गई है।

 

विदेशी कंपनियों को चीन (China) से भारत लाने के लिए मास्टर प्लान बनाने में जुटी है मोदी सरकार

भारत एक खास रणनीति बनाने में जुटी है कि कैसे चीन (China) से हटने वाली कंपनियों को भारत में आकर्षित किया जाए। इसके तहत इन कं​पनियों को Luxembourg की दोगुनी साइज की जमीन मुहैया कराई जाएगी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।

इसके लिए देशभर में 4,61,589 हेक्टेयर जमीन की पहचान की गई है। इसमें 1,15,131 हेक्टेयर जमीन गुजरात, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश और तमिलानाडु जैसे इंडस्ट्रियल राज्यों में हैं. विश्व बैंक (World Bank) के आंकड़ों से पता चलता है कि लग्जमबर्ग में कुल 2,43,000 हेक्टेयर जमीन है। भारत में निवेश करने वालों के लिए कम से कम समय में जमीन की उपलब्धता बड़ी समस्या रही है।

केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिल कर इस पर जोर शोर से काम कर रही है। बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएँ भारत में निवेशक को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। यह कदम ना सिर्फ भारत को मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) हब बनाएगा बल्कि रोजगार का भी मुख्य साधन बनेगा।

 

चीन (China) की दवाओं पर घटा दुनिया का भरोसा, भारत बन सकता है निर्यात केंद्र

घटिया दवा, PPE किट और मेडिकल उपकरण के निर्यात से चीन (China) का चेहरा उजागर हो गया है। दुनिया का चीन (China) से भरोसा कम हो गया है। ऐसे में यह भारत के लिए एक बड़े अवसर की तरह है।  

इसका फायदा उठाने के लिए सरकार बंद पड़ी सक्रिय फार्मा घटक (एपीआई) इकाइयों को दोबारा शुरू करने की तैयारी में है। इन इकाइयों के लिए विशेष फंड बनाने के साथ कर्ज भुगतान में रियायत देने की भी योजना बनाई है।

भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) हब

एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के बाद करीब 1000 कंपनियां, जो पहले चीन (China) में थी, अब भारत के संपर्क में हैं। यह अवसर हाथ से ना निकले, भारत सरकार जी जान से जुटी है।  भारत के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश भी इन कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हैं।

ऐसे में भारत सरकार एक खास मास्टर प्लान पर तेजी से काम कर रही है और करीब 12 क्षेत्रों पर सरकार की नजर है जिसमें निवेश करवाया जा सके। इनमें मॉड्यूलर फर्नीचर, खिलौने, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि-रसायन, कपड़ा, एयर कंडीशनर, पूंजीगत सामान, दवा और वाहन कल-पुर्जा शामिल हैं।’

 

चीन (China) की अर्थव्यवस्था पिछले वर्ष की तुलना में 2020 की पहली तिमाही के दौरान 8.1% सिकुड़ गई है। पिछले तीन दशकों में यह गिरावट पहली बार देखी गई है। कोरोना की मार के कारण चीन (China)  को अपने उत्पादन केंद्रों को बंद करना पड़ा है। चीनी माल के विदेशी ग्राहकों ने या तो अपने ऑर्डर को स्थगित कर दिया है अथवा निरस्त कर दिया है। नए और पिछले ऑर्डरों के भी भुगतान नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए मौका है दुनिया में अपने आप को मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) हब के रूप में स्थापित करने का। उम्मीद करते हैं आने वाला कल भारत का होगा।