कोरोना को लेकर ट्विटर वॉर – इसे ‘चीनी वायरस’ क्यों न कहें

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

कोरोना वायरस के नाम को लेकर ट्विटर पर एक नई बहस छिड़ गयी है | पूरी दुनिया में बड़ी संख्‍या में लोग अब इस बात को लेकर बहस कर रहे हैं कि जब यह वायरस की शुरुआत चीन से हुई है तो इस वायरस का नाम ‘चीनी वायरस’ क्यूँ न रख दिया जाए | इसमे भारत के लोग भी शामिल हैं | 

ट्विटर पर यह मांग ऐसे समय पर उठी है जब चीनी विदेश मंत्रालय ने इस वायरस के ‘मेड इन चाइना’ होने के दावे को खारिज किया है। इस बीच सोशल मीडिया दबाव बढ़ता देख यूनेस्‍को को सफाई देनी पड़ी है।

दरअसल, इस पूरे विवाद में उस समय तेजी आ गई जब मंगलवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में ट्रंप ने कोरोना वायरस को ‘चाइनीज वायरस’ बताया। कोरोना को जापानी इंसेफेलाइटिस की तर्ज पर चीनी वायरस घोषित करने की मांग पहले से चल रही थी लेकिन ट्रंप के ट्वीट के बाद उसमें और ज्‍यादा तेजी आ गई।

ट्विटर पर यह मुहिम तेज हो गई कि कोरोना वायरस का नाम ‘चीनी वायरस’ क्‍यों न कर दिया जाए। गोंग नूई ने लिखा, ‘मुझे चीनी वायरस नाम पसंद है। हां यह निश्चित रूप से चीन के वुहान शहर से पैदा हुआ है।’ अनुराग दीक्षित ने लिखा, ‘चीनी वायरस के खात्‍मे के बाद दुनिया की ताकतों को एक सुधार की तत्‍काल जरूरत है। यूएन को भंग किया जाए क्‍योंकि यह भ्रष्‍ट हो गया है और चीन से बहुत प्रभावित है।’

यूनेस्‍को को देनी पड़ी सफाई

ट्विटर पर #ChinaVirus हैशटैग के साथ अब तक हजारों की संख्‍या में ट्वीट किए गए हैं और यह ट्विटर पर टॉप टेन में ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर पर चीनी वायरस के ट्रेंड करने के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र की संस्‍था यूनेस्‍को को सफाई देनी पड़ी है। यूनेस्‍को ने कहा, ‘लोगों को याद दिला दें कि वायरस का कोई देश नहीं होता है।’ उसने कहा, ‘कोरोना के खिलाफ जंग में हमें विज्ञान की जरूरत है न कि कलंक लगाने की।’

यूनेस्‍को के इस बयान के बाद यूजर्स ने यूनेस्‍को से सवाल पूछने शुरू कर दिए। जनक्रुत ओजा ने लिखा, ‘कृपया इसे जबरन कोविड-19 न कहें। इसे केवल चीनी वायरस कहें। जैसे दिल्‍ली बेली, जापानी एंसेफेलाइटिस, इबोला (कांगो की नदी), निपाह वायरस (मलेशिया की नदी), मारबर्ग बीमारी (जर्मनी का शहर) है। इससे पहले चीन ने आरोप लगाया था कि कोरोना वायरस के पीछे अमेरिका है और अमेरिकी सेना ने इसे वुहान में फैलाया।


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •