ये विरोध देश में मुसलमानों को भड़का कर, देश का माहौल खराब करने की साजिश

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conspiracy to spoil the atmosphere of the countryनागरिकता कानून के नाम पर हो रहा विरोध प्रदर्शन, हिंसक झड़प और आगजनी ख़बरें देश के कई अलग अलग हिस्से से आ रही है ।

दिल्ली में नागरिकता कानून के नाम पर हो रहा विरोध प्रदर्शन, बीती रात हिंसक झड़प और आगजनी में तब्दील हो गया। जामिया के बाद छात्रों ने दिल्ली पुलिस हेडक्वॉर्टर पर भी प्रदर्शन किया। दिल्ली में बदती हिंसा की वजह से आज दिल्ली के कई स्कूल बंद रखे गये हैं। हिंसा की आग उत्तर प्रदेश तक पहुँच गयी है इसलिए एतिहातन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को 5 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। इसके अलावा आगरा, मेरठ और गाजियाबाद में पुलिस अलर्ट है।

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दिल्ली और बंगाल में हुई हिंसा की तस्वीरें पूरे देश ने देखी, किस तरह देश का सुकून को छीनने के लिए बड़ी साजिश हो रही है। छात्रों के नाम पर सड़क पर ऐसी भीड़ मौजूद थी जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही थी। पुलिसवालों पर पथराव कर रही थी। लेकिन यही लोग शाम के बाद पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गए। देश को ये बताने की कोशिश होने लगी कि पुलिस ने छात्रों पर ज्यादती की है। नागगरिकता कानून की आड़ में पूरे देश को दहलाने की नापाक साजिश रची जा रही है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा लाये गए सभी विधयेक मुस्लिम समाज के हित से जुड़े है या उनके फायदे के लिए है। फिर भी कुछ लोग देश में भ्रम और अफवाहों को फैला कर देश में असुरक्षा की भावना फैलाना चाहते है। हम यहाँ बात तीन तलाक, धारा 370, नागरिकता संसोधन विधेयक और रास्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की कर रहे है:

तीन तलाक

इस बिल के कानून में परिवर्तित होने के साथ ही मुस्लिम महिलाओं ने राहत की साँस ली है। जिसके अंतर्गत तुरंत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को गैर कानूनी करार दिया जायेगा और इसके साथ ही इसे संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान भी है। यानी पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ़्तार कर सकती है। तलाक-ए-बिद्दत के लिए दोषी पाए गए अपराधी को तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। महिला पक्ष की बातों को सुनकर मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत भी दे सकता है। इसके साथ ही पीडिता अगर समझौते की मांग करती है तो उसे अनुमति दी जाएगी और साथ ही पीडिता अपने गुज़ारा भत्ते की मांग भी कर सकती है।

धारा 370

नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने का फैसला किया।आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदल गया है…
– अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद सकता है ।
– जम्मू-कश्मीर में अब अलग झंडा नहीं ।
– राज्यपाल का पद खत्म । इसके साथ ही राज्य की पुलिस केंद्र के अधिकार क्षेत्र में रहेगी।
– जम्मू-कश्मीर में अब दोहरी नागरिकता नहीं ।
– भारत का कोई भी नागरिक वहां के वोटर और प्रत्याशी बन सकते हैं।
– जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश ।
– जम्मू कश्मीर का हिस्सा रहे लद्दाख अब अलग केंद्र शासित प्रदेश ।
– जम्मू-कश्मीर में आरटीआई और सीएजी जैसे कानून भी अब लागू ।
– जम्मू-कश्मीर में देश का कोई भी नागरिक अब नौकरी पा सकता है।

नागरिकता संसोधन विधेयक

Citizenship Amendment Bill के तहत मोदी सरकार बाहर से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी आदि धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है। सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल यानी नागरिकता संशोधन बिल का सबसे पहले सीधा असर असम में दिखाई देगा क्योंकि वहां NRC लागू हो चुकी है।

इस विधेयक में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया। नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, भारत की नागरिकता के लिए आवेदक का पिछले 14 साल में 11 साल तक भारत में निवास करना जरूरी है लेकिन संशोधन में इन तीन देशों से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, और ईसाई समुदाय के लोगों के लिए इस 11 साल की अवधि को घटाकर छह साल कर दिया गया है।

कैब में देश में रह रहे मुस्लिम समाज के लोगो से जुडी कोई बात नहीं है सिर्फ कुछ लोग अपने फायदे के लिए देश में भ्रम फैला रहे है और देश का माहौल खराब कर रहे है।

रास्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

NRC अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए है। जो अवैध घुसपैठियों है उन्हें नागरिकता दे कर वोटिंग का अधिकार क्यों दिया जाये, जबकि केवल शरणार्थि बन कर कोई भी देश में रह सकता है। NRC की वज़ह से किसी भी धर्म विशेष के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। एनआरसी में धर्म विशेष के आधार पर भेदभाव नहीं है बल्कि इसमें अवैध रूप से देश में रह रहे लोगो को निकालने का सिर्फ प्रावधान है।

 


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