चीन छोड़ने वाली कंपनियां भारत के ऑयल सेक्‍टर में करेंगी निवेश!

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस को लेकर हालात सामान्‍य होने के बाद दुनियाभर के निवेशकों के सामने ऑयल सेक्‍टर में निवेश के सीमित विकल्‍प होंगे. ऐसे में उनके लिए भारत सबसे बेहतर विकल्‍प होगा.

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के ज्‍यादातर देश चीन (China) के खिलाफ हो गए हैं. ऐसे में अगर तेल कंपनियां (Oil Companies) चीन छोड़ती हैं तो उनके भारत (India) का रुख करने की उम्‍मीद सबसे ज्‍यादा है. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के वित्‍तीय निदेशक एन. विजयगोपाल का कहना है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से दुनिया के उबरने के बाद ऑयल सेक्‍टर में निवेश के विकल्‍प सीमित होंगे. ऐसे में ज्‍यादातर देशों के लिए भारत निवेश का सबसे बेहतर विकल्‍प होगा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार (PM Narendra Modi) ने बीपीसीएल को बेचने का फैसला ले लिया है. कुछ कंपनियों ने कंपनी में हिस्‍सेदारी खरीदने की इच्‍छा भी जाहिर की है.

विजयगोपाल के मुताबिक, वैश्विक महामारी (Pandemic) के कारणर ज्‍यादातर पश्चिमी देशों की कंपनियां चीन में काम करने से डरेंगी. ऐसे में वे कंपनियों निवेश के लिए भारत को छोड़कर और कहां जा सकती हैं. अमेरिका समेत चीन के खिलाफ लामबंद हुए देशों का कहना है कि बीजिंग की वजह से वैश्‍विक कारोबार, सुरक्षा और मानवाधिकारों को खतरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में भारत के पास इन देशों के निवेशकों को आकर्षित करने का शानदार मौका उपलब्‍ध होगा. सरकार भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों के दरवाजे वैश्विक निवेशकों के लिए खोल सकती है.

बीपीसीएल के वित्‍तीय निदेशक का कहना है कि इस समय वैश्‍विक कंपनियां अपने पूंजी खर्च में कटौती कर रही हैं. वे हालात सामान्‍य होने के बाद के लिए अभी कैश बचा रही हैं. एग्‍सॉन मोबिल, शेल, बीपी या सऊदी आरामको अपने वैश्विक कारोबार को बंद नहीं करने जा रही हैं. मांग बढ़ने के साथ जब वे लौटेंगी तो उनके पास निवेश के लिए पर्याप्‍त पूंजी उपलब्‍ध होगी. हालात में सुधार के बाद स्थिर बाजार की तलाश करने वाली बड़ी तेल कंपनियों के लिए दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्‍ता और 130 करोड़ की आबादी वाले देश भारत से बेहतर कोई दूसरा विकल्‍प नहीं होगा.

दुनिया की कुछ बड़ी तेल कंपनियों ने बीपीसीएल में निवेश करने की इच्‍छा जाहिर कर भी दी है. अब तक दुनिया की ज्‍यादातर बड़ी कंपनियों ने चीन में निवेश किया हुआ था. लेकिन अब जब वे वहां से निकलना चाहेंगी तो उस देश में जाना चाहेंगी, जहां हर दिन मांग बढ़ रही है. हालांकि, अप्रैल और मई के दौरान भारत में लॉकडाउन के कारण पेट्रोलियम उत्‍पादों की मांग करीब-करीब आधी रह गई थी. हालांकि, सरकार की ओर से जैसे-जैसे पाबंदियों में छूट दी गई पेट्रोलियम उत्‍पादों की मांग में भी इजाफा होना शुरू हो गया है.

बीपीसीएल समेत देश की सभी रिफाइनरीज में काम घटा दिया गया था, लेकिन अब मांग बढ़ने के साथ ही काम की रफ्तार बढ़ा दी गई है. विजयगोपाल ने बताया कि उनकी कंपनी सामान्‍य क्षमता की करीब 83 फीसदी कैपेसिटी के साथ काम करना शुरू कर चुकी है. वहीं, पेट्रोलियम उत्‍पादों की बिक्री सामान्‍य तौर पर मई में आने वाली मांग की 76 फीसदी पर पहुंच गई है. ऐसे में हमें उम्‍मीद है कि कंपनी में जल्‍द ही पूरी क्षमता के साथ काम होने लगेगा. भारतीय तेल शोध कंपनियों पर लॉकडाउन के दौरान दोहरी मार पड़ी. पहला तेल की कीमतों में उठापटक और दूसरा मांग में कमी से कंपनी को मुश्किल वक्‍त का सामना करना पड़ा.

 

Published on: News18


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •