तटीय गश्ती पोत- ‘वज्र’ को सेना में किया गया शामिल

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तटीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए गश्ती पोत ‘‘वज्र’’ को पोत परिवहन मंत्री मनसुख मांडविया और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल कर लिया गया।

मांडविया ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत लार्सन एंड टुब्रो द्वारा निर्मित पोत का इस्तेमाल दिन और रात की गश्ती के लिए होगा। साथ ही केंद्रीय मंत्री ने निर्धारित समय सीमा पर पोत के वितरण के लिए मेसर्स लार्सन और टूब्रो (एल एंड टी) जहाज निर्माण लिमिटेड को बधाई दी। इस मौके पर तटरक्षक के निदेशक जनरल के. नटराजन और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे।

समारोह में मुख्य अतिथि मंडाविया ने भारत के समुद्री इतिहास को याद करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को हासिल करने और उसे प्रदर्शित करने के लिए गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर विकसित किया जाएगा। उन्हों ने कहा कि भारत सिंधु घाटी की सभ्यता में कुछ शताब्दियों को छोड़कर हमेशा से समुद्री प्रौद्योगिकी में मजबूत साझेदार रहा है।

पोत परिवहन मंत्री ने कहा, ‘‘तटीय सुरक्षा को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता के तहत कट्टूपल्ली में लार्सन एंड टुब्रो शिपबिल्डिंग लिमिटेड में छठे गश्ती पोत वज्र का जलावतरण किया गया।’’ मंडाविया ने कहा कि यह भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि वज्र को पहली बार समुद्र में उतारा जा रहा है, जिससे 20 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक बड़े विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के 7500 किलोमीटर से अधिक विशाल समुद्र तट को सुरक्षित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि यह उन्नत किस्म की नौवहन और संचार प्रणाली से लैस है । इसके साथ ही इसमें नयी मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में इससे लगातार निगरानी की जा सकेगी । इसके साथ ही उन्होंने कहा भारतीय तटरक्षक बल ने 43 वर्षों के भीतर अपने बेड़े की ताकत बढ़ा दी है और अब यह दुनिया के सबसे बड़े तट रक्षकों में से एक है।

तटरक्षक के मुताबिक, केंद्र के ‘मेक इन इंडिया’ के अभियान के तहत लार्सन एंड टुब्रो द्वारा निर्माण किए जाने वाले सात पोत की श्रृंखला में यह छठा पोत है।

 


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