केंद्रिय दफ्तरों में सफाई अभियान से 2 राष्ट्रपति जितनी खाली हुई जगह

इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि पीएम मोदी लीग से हटकर काम करते हैं तभी उनपर ये डॉयलाग बिलकुल फिट बैठता है कि जहां से लोग सोचना बंद करते है वो वहां से सोचना शुरू करते हैं। अब मोदी जी के इसी छोटे से फैसले को ले लीजिये देखिये हम भी इस फैसले को छोटा बता रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार ने अपने विभागों की साफ सफाई का मेगा अभियान शुरू किया है जिसके तहत दशकों से लटकी फाइलों को भी निपटाया जा रहा है और इसका नतीजा ये निकल रहा है कि करीब 2 राष्ट्रपति भवन जितनी जगह खाली हो रही है।

मोदी जी की एक सोच का कमाल

इस वक्त देश के केंद्रिय कार्यालयों में मेगा सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को चलाने का काम खुद पीएम मोदी के आदेश पर किया जा रहा है। लेकिन इस अभियान के बाद एक चीज निकलकर आया है कि सरकार को राष्ट्रपति भवन के फ्लोर एरिया के मुकाबले लगभग दोगुनी जगह इस महीने के अंत तक खाली हो जाएगी। मेगा ड्राइव में सरकारी कार्यालयों में 3.18 लाख स्क्वॉयर फीट जगह को फाइलों से मुक्त कर लिया गया है। इस क्रम में 7.3 लाख फाइल्स को हटाया गया है। सरकार की माने तो कुल 9 लाख 31 हजार 442 सरकारी फाइलों  को इस महीने के अंत तक हटाने के लिए चिन्हित किया गया है। 78 प्रतिशत काम पूरा हो गया है जिससे करीब 4.29 करोड़ रुपये की कमाई भी हुई है।

पर्यावरण मंत्रालय के पास सबसे ज्यादा फाइलें

सबसे ज्यादा फाइलें अगर अटकी हुई थी तो वो मंत्रालय पर्यावरण मंत्रालय था जिसके पास 99 हजार ऐसी फाइलें थीं, जिन्हें निपटाया गया है। वहीं गृह मंत्रालय के पास 81 हजार, रेलवे के पास 80 हजार, सीबीआई और सीबीडीटी के पास लगभग 50 हजार फाइलें थीं जिसके बाद  सरकारी कार्यालयों में खाली जगह खूब निकल रही है। इस अभियान में एक अहम पहलू विभिन्न मंत्रालयों द्वारा सांसदों और संसदीय आश्वासनों से प्राप्त संदर्भों की पेंडेंसी को भी निपटाना है। सरकार ने पाया है कि सांसदों द्वारा विभिन्न मंत्रालयों को लगभग 10,273 रेफरेंस मिले थे, जोकि पेंडिंग थे। आदर्श स्थिति में इन फाइलों को 15 दिन के भीतर निपटा दिया जाना होता है। जानकारी के मुताबिक इनमें से तकरीबन 5500 रेफरेंस को अब निपटा दिया गया है। इन पत्रों का मंत्रियों ने स्वयं जवाब दिया है।

ई-ऑफिस सिस्टम अपनाने पर सरकार का विशेष बल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही ये साफ कर दिया था कि उनका काम करने का अंदाज अलग है, इसके लिये नये नये प्रयोग भी किये जा रहे है। इसी के चलते सरकार ने पाया है कि उसके पास 18.46 लाख फाइलें समीक्षा के लिए पड़ी हैं, इनमें से लगभग 80 प्रतिशत यानि की 14.7 लाख फाइलों की समीक्षा की गई है। अंत में सरकार ने 9 लाख 31 हजार 442 फाइलों को निपटारे के लिए चुना गया शुरुआत में सरकार को लगा था कि उसे सिर्फ 2.5 लाख फाइलों को ही निपटाना होगा, लेकिन रिव्यू में फाइलों की संख्या बहुत ज्यादा निकलीं। जिस सफाई के बाद सरकार ई ऑफिस सिस्टम पर और तेजी के साथ काम करेगी। सरकार की माने तो उसके पास अभी करीब 27 लाख ई-फाइल्स हैं लेकिन आने वाले दिनो में दफ्तरों को हाईटेक बनाने के लिये फाइलो से छुटकारा दिलाया जायेगा। इसके लिये ई-ऑफिस सिस्टम को तेजी से विभागों में लागू किया जायेगा।

सच में जिस काम को दूसरी सरकार सर खपाने का काम समझते थे उस काम का बीड़ा उठाकर मोदी जी ना केवल एक नया आयाम छूते है बल्कि उनसे सरकार का फायदा भी करवाते है। लेकिन मोदी जी के इस मॉडल को विपक्ष अभी भी नहीं समझ पा रहा है जबकि जनता उसके इसी मॉडल को पंसद कर रही है और उनके साथ खड़ी है।