गेम चेंजर साबित होगा चिनूक हेलीकॉप्टर

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लम्बे इंतजार के बाद आज आख़िरकार भारतीय वायुसेना में चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल हो गया| चिनूक हेलीकॉप्टर के शामिल होने के साथ ही भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ावा देने की दिशा में एक नए मुहिम की शुरुआत भी हो गयी| सोमवार को भारतीय वायुसेना प्रमुख ने चार चिनूक हेलीकॉप्टर के पहले इकाई को वायुसेना में शामिल कर लिया| इस दौरान चिनूक हेलीकॉप्टर की ताकत और मारक क्षमता को देश के लिए बड़ी धरोहर बताते हुए वायुसेना प्रमुख बी.एस.धनोआ ने इसे सैन्य इतिहास का अहम् दिन बताया|

chinook

चिनूक हेलीकॉप्टर को चंडीगढ़ एयरबेस पर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया| इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना प्रमुख बी.एस.धनोआ ने कहा कि यह राष्ट्र की धरोहर है। उन्होंने कहा, ‘देश इस वक्त सुरक्षा के स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में हमें इसके लिए अलग-अलग क्षमता से भरपूर उपकरणों की जरूरत है। चिनूक को कुछ बहुत विशेष क्षमता से लैस किया गया है। यह राष्ट्र के लिए धरोहर है।’ चिनूक हेलिकॉप्टर की ताकत और उपयोगिता का जिक्र करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘चिनूक हेलिकॉप्टर सैन्य अभियानों में प्रयोग किया जा सकता है। सिर्फ दिन में ही नहीं रात में भी प्रयोग हो सकता है, इसकी दूसरी यूनिट पूर्व में दिनजान (असम) में होगी। चिनूक को वायुसेना में शामिल करना गेमचेंजर साबित होगा ठीक वैसे ही जैसे फाइटर क्षेत्र में राफेल को शामिल करना।’

कई मायनो में बेहद अहम् और शक्तिशाली है चिनूक हेलीकॉप्टर

चिनूक हेलीकॉप्टर सुरक्षा के लिहाज से बेहद शक्तिशाली है| इस विशाल हेलिकॉप्टर के सहारे 9.6 टन तक कार्गो ले जाया जा सकता है| चिनूक करीब 11 हजार किलो तक के हथियार और सैनिकों को आसानी से उठाने, ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भरने और रसद पहुंचाने के साथ ही यह हेलिकॉप्टर छोटे से हेलिपैड और घाटी में लैंड करने की भी क्षमता रखता है। यह भारी मशीनरी, आर्टिलरी बंदूकें और हाई अल्टीट्यूड वाले लाइट आर्मर्ड वीकल्स से लैश है|

चिनूक के सहारे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकता है। यह काफी गतिशील है और इसका उपयोग करते हुए घनी घाटियों में भी आसानी से आया-जाया जा सकता है। इतना ही नहीं यह सैन्य पोतों की आवाजाही से लेकर डिजास्टर रिलीफ ऑपरेशंस जैसे मिशन में भी अपनी भूमिका काफी अच्छी तरह अदा करता है|

जहाँ एक तरफ चिनूक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल समूचे दुनिया के लगभग 19 देश कर रहे हैं। वही दूसरी तरफ इस हेलिकॉप्टर को वियतनाम से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के युद्ध में इस्तेमाल किया जा चुका है। दरअसल, सर्वप्रथम इस हेलीकॉप्टर को 1962 में उड़ाया गया था और तब से लेकर अब तक इसकी मशीन में कई बड़े अपग्रेड हो चुके हैं| जो इसे दुनिया के सबसे भारी लिफ्ट चौपरों में से एक बनाता है|

चूँकि चिनूक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड, डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम, कॉमन एविएशन आर्किटेक्चर कॉकपिट और एडवांस्ड कार्गो-हैंडलिंग जैसे क्षमताओं से लैश है| इस वजह से इसके भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढे़गी बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट को बनाने में भी यह अहम् किरदार निभा सकता है| असल में नॉर्थ ईस्ट में ऐसे कई रोड प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं, जिसे पूरा करने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन लंबे समय से एक हेवी लिफ्ट चॉपर के तलाश में है| जो इन घनी घाटियों में सामग्री और जरूरी मशीनों की आवाजाही कर सके| लिहाजा अब चिनूक के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से इस काम को आसानी से पूरा किया जा सकता है|


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