विस्तारवादी सोच के चलते चीन का अपने सभी पड़ोसियों से सीमा विवाद

चीन की विस्तारवादी सोच और सामंतवादी  नीति किसी से छिपी नहीं है। जिसके चलते चीन अपने पड़ोसी देशों की जमीन को हड़पने के लिए हमेशा आतुर रहता है। भारत चीन सीमा विवाद ही नही बल्कि चीन का अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद बना हुआ है। वैसे इस सोच में वो कामयाब तो नही हो पा रहा है लेकिन लेकिन वो अपनी हरकतों से भी बाज नहीं आता है।

 

रूस से सीमा विवाद

ड्रैगन और रूस की 1,60,000 वर्ग किलोमीटर की सीमा पर चीन अपनी दावेदारी जता चुका है।  दोनों देशों के बीच कई समझौते हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। चीन लगातार समझौते करने के बाद रूस को धोखा देकर ये कहता आया है कि ये जमीन उसकी है और इस जमीन में कई बार वो घुसपैठ करने की कोशिश भी करता रहता है। हालाकि रूस की ताकत को वो अच्छी तरह से जानता है इसलिए चीन रूस की सीमा पर जबरन कब्जा जमाने से डरता है।

भारत के साथ विवाद

एशिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश भारत से चीन सीमा विवाद जगजाहिर है। 1962 से ये विवाद तेजी के साथ चल रहा है। चीन हिंदी चीनी भाई भाई कहकर भारत को धोखा दे चुका है। इसके साथ साथ लगातार वो भारत की सीमा में घुसने की कोशिश करते रहता है और भारत की जमीन को अपना कहता है। हालाकि चीन दावा करता है कि मैकमोहन रेखा के जरिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश में उसकी 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन दबा ली है। भारत इसे अपना हिस्सा बताता है। हिमालयी क्षेत्र में सीमा विवाद को निपटाने के लिए 1914 में भारत तिब्बत शिमला सम्मेलन बुलाया गया। फिलहाल अब उसकी इस साजिश को दुनिया समझ गई है इसलिये चीन के खिलाफ एक मोर्चा बनता जा रहा है जो आने वाले दिनो में चीन को करारा जवाब दे सकता है।

समझौते के बाद भी अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद

भारत के साथ-साथ चीन का अफगानिस्तान के साथ भी सीमा विवाद बहुत पुराना है। वर्ष 1963 में समझौते के बावजूद चीन अफगानिस्तान के बड़े भूभाग पर अपना आधिपत्य जताता है। चीन यहां समय समय पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है और इन इलाकों को अपना बताता है। जबकि अफगानिस्तान साफ कर चुका है कि चीन किसी गलतफहमी में न रहे कि वो उसे अपनी जमीन छीन लेने देगा।

किर्जिगिस्तान पर भी चीन का दावा

चीन का दावा है कि किर्गिस्तान के बड़े हिस्से पर उसका अधिकार है, क्योंकि 19वीं सदी में उसने इस भूभाग को युद्ध में जीता था। इसके साथ ही चीन का अपने सीमावर्ती कजाखस्तान के साथ भी सीमा विवाद है। हालांकि, हाल ही में दोनों देशों के बीच समझौते हुए हैं वे चीन के पक्ष में गए हैं।

चीन का साउथ कोरिया पर भी दावा

चीन की विस्तारवादी नीति सिर्फ भारत के साथ ही नहीं है। दक्षिण कोरिया पूर्वी चीन सागर में कई इलाकों पर लंबे समय से अपना कब्जा जमाए हुए है। हालांकि, चीन का कहना है कि पूरे दक्षिण कोरिया पर उसका हक है। यहां उसने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि दक्षिण कोरिया पर चीन के युआन राजवंशन का शासन रहा था। उत्तर कोरिया के जिन्दाओ इलाके पर अपनी दावेदारी पेश करता रहा है। यहां भी वह ऐतिहासिक तथ्यों की बात करता है।

भूटान के बड़े भूभाग पर चीन का दावा

भूटान के एक बड़े भूभाग पर चीन ने दावेदारी ठोक रखी है। चीन यहां तेजी से सड़को का निर्माण कर रहा है। इतना ही नहीं उसने यहां इंटरनेशनल बार्डर पर बंकर तक बना रखे हैं। वो लगातार इस क्षेत्र को अपना बताता है। भूटान के साथ भारत का बहुत मधुर संबंध है और भारत भूटान की हर तरह की मदद भी करता है। जिसका असर ये है कि चीन भूटान को अपना दुश्मन देश समझता है।

चीन-बर्मा सीमा विवाद

बर्मा-चीन का सीमा विवाद काफी लंबे अरसे से चल रहा था। 1271 से 1368 के बीच चीन के युआन राजवंश के समय बर्मा चीन का हिस्सा हुआ करता था। उसी इतिहास को आधार मानकर चीन बर्मा के एक बड़े भूभाग पर अपनी दावेदारी दिखाता है।

 

वियतनाम-चीन विवाद

चीन का वियतनाम के साथ युद्ध भी हो चुका है। चीन के मुताबिक वियतनाम पर भी उसका हक है, क्योंकि एक समय चीन के मिंग राजवंश 1368-1644 का यहां शासन रहा था। जिसके चलते वो इस भू भाग को अपना मानता है।

पाकिस्तान से सीमा विवाद

चीन और पाकिस्तान में भले ही गहरी दोस्ती हो मगर दोनों के बीच सीमा विवाद भी चला आ रहा है। चीन और पाकिस्तान दोनों भारत को घेरने के लिए एक दूसरे की गलत बातों का भी समर्थन करते हैं लेकिन दोनों देशों के बीच खुद सीमा विवाद है। जिस तरह से चीन इकॉनामिक कॉरिडोर बना रहा है। वो आने वाले वक्त में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा। चीन अगर अपनी चाल में सफल हो गया तो पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा चीन के आधिपत्य़ में होगा।

इसके साथ साथ नेपाल, ताइवान, और सिंगापुर जैसे जगाहों पर भी चीन अपना कब्जा जमा रहा है। और चीन इन देशो के साथ भी दादागिरी करते रहता है। ड्रैगन की चालबाजी इससे समझ सकते हैं कि आस्ट्रेलिया और जापान जैसे मुल्क की समुद्रिय सीमा पर भी चीन घुसपैठ करते रहता है। जिससे ये देश  भी चीन के खिलाफ खड़े हो गये हैं। बहरहाल ऐसे में अब चीन को सबक सिखाने का वक्त आ गया है क्योंकि अगर अभी कोई ठोस कदम दुनिया के देशों ने नही उटाया तो चीन आने वाले दिनो में और मुसीबत बन सकता है।