मई में चीन ने हमें हैरत में डाल दिया था, इस बार हमने उसे चकमा दे दिया: रक्षा अधिकारी

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हाइलाइट्स:

  • भारतीय सेना ने शनिवार की रात चुशूल सेक्टर के पहाड़ी इलाकों पर कब्जा जमा लिया
  • चीनी सेना जिन पहाड़ियों पर तैनात हुई वह यह चीन का इलाका नहीं है
  • भारत इन पहाड़ियों को लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल के अंदर मानता है
  • भारतीय सेना के इस कदम से चीन को मई में कई गई उसकी कार्रवाई का जवाब मिल गया

रजत पंडित, नई दिल्ली

लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के सभी तीन सेक्टर्स की रक्षा में भारत किस हद तक कदम उठा सकता है, यह परखने के लिए चीन अपनी ‘सलामी-स्लाइसिंग’ टेक्टिक्स का इस्तेमाल करता रहेगा। भारतीय रक्षा अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि भारत भी अब सीमाई अतिक्रमण के खेल में पीछे नहीं हटने वाला। यहां सलामी स्लाइसिंग का मतलब बार-बार अतिक्रमण से थोड़ी-थोड़ी जमीन हड़पकर पूरे इलाके पर कब्जा करना है।

चीन ने देख लिया भारत का दम

एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने सोमवार को कहा, ‘हम हर मोर्चे पर सामना करने को तैयार हैं।’ उन्होंने यह बात तब कही जब यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख के चुशूल सेक्टर में बढ़त हासिल करने की चीन की मंशा को धूल में मिलाने के लिए अपनी सैन्य क्षमता का इजहार कर दिया। भारतीय सेना ने ताकत के इजहार का रास्ता इसलिए चुना क्योंकि पेंगोंग त्सो और गोगरा में प्रस्तावित डिसइंगेजमेंट और देपसांग-दौलत बेग ओल्डी (DBO) सेक्टर में डीएस्केलेशन को लेकर चल रही बातचीत के टेबल पर अपनी स्थिति मजबूत करने का एक यही रास्ता बच गया था। ध्यान रहे कि चीन के अड़ियल रवैये के कारण कई दौर की बातचीत में कोई प्रगति होती नहीं दिख रही थी।

इस बार चीन ने खाया चकमा

लेकिन, इसका यह कतई मतलब नहीं कि शनिवार की रात को भारतीय सेना चीन के इलाके में अतिक्रमण किया था। एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि भारत ने सिर्फ चुशूल सेक्टर की पहाड़ियों पर मोर्चेबंदी मजबूत कर ली जो एलएसी की भारतीय परिभाषा के अंदर आती हैं। एक अन्य ऑफिसर ने कहा, ‘मई महीने के शुरुआती दिनों में चीन ने ईस्टर्न लद्दाख में कई जगह अतिक्रमण करके हमें हैरत में डाल दिया था। इस बार हमने चीन को चकमा दे दिया।’

सालों से चीन ने बना रखी है यह आदत

उन्होंने कहा, ‘खतरा साफ है। शुरुआती मई माह में जो अतिक्रमण हुए उसके लिए चीन में राजनीतिक और रक्षा अधिकारियों के बीच उच्चस्तर पर सहमति बनी थी। चीन की सालों से यही नीति रही है कि दो कदम आतिक्रमण करो और समझौते में एक कदम पीछे हटने पर राजी हो जाओ। इससे एक बार में एक कदम का फायदा होगा और भारत के पूरे इलाके पर कब्जा कर लो।’

Originally published: NBT Hindi News


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