चीन सीमा से पीछे हटने को तैयार, पर भारत को नही अभी भी उस पर ऐतबार

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चीन धोखेबाज देश है। उसकी फितरत धोखा देने की रही है‚ लद्दाख सीमा पर चीनी हरकत से यह बात साबित हो चुकी है। जमीन के भूखे चीन ने बीते तीन दशकों के दौरान बने विश्वास बहाली के माहौल पर पानी फेर दिया है। भारत को समझ आने लगा है कि कुछ भी कर लिया जाए‚ चीन कभी भारत का दोस्त नहीं हो सकता।

चीन को बक्सने के मूड में नही भारत

भारत भी अब चीन के प्रति कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है, बीते कुछ दिनों में चीन के खिलाफ भारत में जो माहौल बना है‚ साथ ही मोदी सरकार भी जिस तरह चीन के खिलाफ एक के बाद एक जरूरी और सख्त कदम उठा रही है‚ उससे साफ है कि चीन का महाशक्ति बनने का सपना चकनाचूर होने वाला है। एक ओर जहां सीमा पर भारतीय जवानों ने गलवान घाटी में चीन की नापाक हरकत का करारा जवाब दिया‚ तो दूसरी ओर मोदी सरकार ने भी चीन को आर्थिक मोर्चे पर चोट देने की कवायद शुरू कर दी है। पहले रेलवे और दूरसंचार विभाग ने अपने–अपने ठेकों से चीन को दूर किया‚ उसके बाद मोदी सरकार ने चीन के ५९ एप्स को भारत में बैन करने जैसा कठोर कदम उठाया। अब सरकार ने चीन के खिलाफ सबसे सख्त कदम उठाते हुए सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियों की एंट्री बैन करने का फैसला किया है। मतलब साफ है कि केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियां बोली में शामिल नहीं हो सकतीं। ताजा फैसले‚ जो अब तक सबसे कड़़ा फैसला है‚ के तहत मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जनरल फाइनेंशियल रूल्स‚ 2017 में संशोधन किया है।

पहली बार भारत को विश्व समुदाय का मिल रहा इतना साथ  

चीन अब तक इसी मुगालते में था कि भारत उसकी हरकतों से डर जाएगा‚ उसकी आक्रामकता पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा‚ उसकी मनुहार करेगा‚ गिड़गिड़ाएगा लेकिन उसका दांव उल्टा पड़ गया। भारत ने आर्थिक मोर्चे पर जैसे ही चीन के खिलाफ कदम उठाने शुरू किए‚ चीन के सुर बदलने लगे। लेकिन उसकी कथनी–करनी पर विश्वास करना मुश्किल है। गलवान घाटी की घटना के बाद तनाव खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच कोर कमांडर्स की कई दौर की बैठक हुई। इन बैठकों में चीन कई इलाकों से पीछे हटने को राजी हो गया इसके साथ साथ विश्व समुदाय ने भी चीन की जगह भारत के साथ खड़े होकर ये बता दिया कि चीन की अब चालबाजी नही चलेगी वही चीन सीमा पर पीछे हटने लगा है लेकिन भारत को अभी भी उसपर पूर्ण विश्वास नही करना चाहिये क्योंकि चीन की फितरत है धोखा देना ऐसे में बिना कोताही बरसे चीन पर नजर रखना ही भारत के लिये समझदारी होगी।

कुल मिलाकर चीन से दुनियां का भरोसा उठता जा रहा है और भारत इस माहौल का फायदा उटाकर चीन को इस बार माफ करने के मूड में नही है। क्योंकि ये मोदी सरकार है जबतक अपने दुश्मन का नाश नही कर लेती वो शांत नही बैठती है।


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