भारत से जंग का जोखिम ले सकता है चीन!

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समूचे विश्व में कोरोना बांटकर चीन मंदी और आंतरिक मुद्दों से जूझ रहा है। ताइवान और हांगकांग बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। तो कोरोना में असफल रही शी जिनपिंग की सरकार को लेकर देश के भीतर भी कुछ अच्छा माहौल नही देखा जा रहा है। इसके साथ साथ अपनी विस्तारवादी नीति के चलते चीन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में काफी विरोध झेल रहा है। अब सवाल उठता है कि ऐसे माहौल में क्या चीन भारत से जंग का जोखिम ले सकता है। तो जवाब यही बनता है कि नही और ऐसा हम क्यों बोल रहे हैं इसको जानने के लिये इन तथ्यों पर नजर डालते हैं।

ड्रैगन के सेना की तैयारी

जब कोई जंग होती है तो उस जंग को जीतने के लिए एक सेना की पूरी रणनीति क्या है उसका बैक सपोर्ट कैसा है इन सब बातों पर खास ध्यान रखा जाता है। साथ ही जहां जंग हो रही हो वहां फौज को जल्द से जल्द अधिक मात्रा में पहुंचाना भी होता है। ऐसे में चीन अभी जंग की सोच भी नही सकता है क्योंकि चीन इस वक्त कई मोर्चे पर लड़ रहा है। इसकी जमीनी सेनाएं, नौसेना, युद्ध विमान सभी इस वक्त व्यस्त हैं। एक तरफ चीनी लड़ाकू जेट ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने में व्यस्त हैं, वहां वो एकीकरण की लड़ाई लड़ रहा है और दूसरी तरफ, चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपने जहाज लगा रखे हैं, जो पानी और उसके द्वीपों पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अकेले दक्षिण चीन सागर में, बीजिंग 6 देशों – ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई, इंडोनेशिया और मलेशिया के खिलाफ खड़ा है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी  कृत्रिम द्वीप बना रही है और यहां अभ्यास कर रही है। यही नहीं, चीन के संबंध अभी जापान के साथ भी खराब हैं,  क्योंकि बीजिंग के जहाज हाल ही में जापानी जल सीमा में प्रवेश कर गए थे और ऐसा करते हुए जापान सातवां देश बन गया जिसके साथ चीन का जल विवाद है। उसके बाद आता है हांगकांग और वहां लोकतंत्र समर्थक आंदोलन चल रहा है. भारत के साथ युद्ध करने का मतलब होगा हांगकांग से अपना ध्यान हटा लेना और बीजिंग ये नहीं चाहता कि वहां विद्रोह हो और उसकी मुसीबत और बढ़े।

देश के भीतर चल रहा  समाजिक  संघर्ष

चीन पहले से ही अपने घरेलू मामलों पर संघर्ष कर रहा है. चीन अभी भी तिब्बत पर अपने दावों को वैध बनाने की लड़ाई लड़ रहा है. बाहरी मंगोलिया के दोबारा एकीकरण की भी वकालत कर रहा है. इसके अलावा, चीनी सैनिक शिनजियांग में उइगरमुस्लिमों के अभियोजन में लगे हुए हैं. और कहा ये भी जा रहा है कि बीजिंग में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का भी खतरा है. क्या चीन इन सभी मोर्चों को छोड़कर भारत-चीन सीमा पर जा सकता है? अगर ऐसा होता है तो चीन के भीतर ही बगावत को दबाने में काफी दिक्कत आ सकती है। वही दबे जुबान में लोकतन्त्र की बात चीन के भीतर भी सुर पकड़ सकती है जो मौजूदा दौर में चीन के नेता बिल्कुल नही चाह रहे होंगे। दूसरी तरफ आर्थिक स्थिति की बात करें तो कोरोना संकट के बाद चीन में भी आर्थिक संकट का दौर है।

कोरोना के बाद चीन की माली हालत हुई खराब

वैसे तो कोरोना ने समूचे विश्व में मंदी की स्थिति लाकर रख दी है। लेकिन इसकी मार चीन पर भी खूब तेजी से पड़ी है। 2020 की पहली तिमाही में चीन की जीडीपी 20.65 ट्रिलियन युआन (2.91 ट्रिलियन डॉलर) रही. उनकी जीडीपी साल दर साल 6.9 प्रतिशत कम हो रही है. केवल जीडीपी में ही गिरावट नहीं  देखी गई है; अन्य देशों के साथ चीन के संबंधों में भी खटास दिख रही है, जिसकी वजह से कई उद्योग चीन से बाहर जा रहे हैं. वहां मैन्युफैक्चरिंग कम हुई है, और इसीलिए मांग में भी कमी है. आयात में 8.5 फीसदी की गिरावट हुई है। इसके साथ साथ विश्व कोरोना का खलनायक चीन को मान रहा है ऐसे में चीन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाने की बात तेजी के साथ चल रही है। ऐसे में चीन पर काफी दबाव विश्व की तरफ से बना हुआ है। वही चीन में बेरोजगारी भी काफी तेजी के साथ पैर पसार रही है। जिससे यही लगता है कि चीन इस वक्त जंग लड़ने की सोच भी नही सकता है।

बहरहाल अगर जंग के आसार इन सब के बीच बनते भी है तो भारतीय फौज चीन की फौज पर भारी भी पड़ेगी और इस बात को खुद चीन के आर्मी जानकार भी मान रहे हैं। ऐसे में अब चीन की समझदारी यही होगी कि वो युध्द की बात छोड़कर देश के बारे में सोचे तो अच्छा होगा क्योंकि भारत से उलझने में इस बार उसका ही घाटा है वो भी ऐसा जिसे वो आजीवन ध्यान रखेगा।


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