आज से शुरू होगी चारधाम यात्रा, जानें चारधाम यात्रा से जुड़ी बातें

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अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर आज से गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखण्ड के चारधामों की यात्रा की शुरूआत हो जायेगी। केदारनाथ धाम के कपाट जहां नौ मई को खुलेंगे वहीं बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 10 मई को खुलेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देश विदेश से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का राज्य में स्वागत किया है और कहा है कि उनकी सुख—सुविधाओं और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

कब खुलेंगे किस धाम के कपाट…

यमुनोत्री धाम – मंगलवार (7 मई )

गंगोत्री धाम – मंगलवार (7 मई)

केदारनाथ धाम- गुरुवार (9 मई)

बदरीनाथ धाम- शुक्रवार (10 मई)

हर साल अप्रैल-मई में चारधाम यात्रा के शुरू होने का स्थानीय जनता को भी इंतजार रहता है। छह माह तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक जनता के रोजगार और आजीविका का साधन हैं और इसीलिए चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। सर्दियों में भारी हिमपात और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण चार धाम के कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिये जाते हैं।

चारधाम के लिए जरूरी तैयारी

चारधाम यात्रा में वहां के ठंढे मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करना जरूरी होता है। इसके लिए गर्म कपड़े और कंबल साथ रखें। केदारनाथ और यमुनोत्री में पैदल खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता है और इसके लिए लाठी और पहाड़ों पर आसानी से चढ़ने के लिए आरामदायक जूते-चप्पल रखने चाहिए। पहाड़ में छनिक बदलने वाले मौसम की तैयारी भी जरूरी है। बारिश से निपटने के लिए छतरी या रेन कोट साथ रखना चाहिए।

इस यात्रा से जुडी कुछ जरूरी बातें , आइये यहाँ जाने :

यमुनोत्री

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इस साल यमुनोत्री के कपाट मंगलवार (7 मई) दोपहर 1:15 बजे खुलेंगे। यमुना नदी का उद्गम यहीं से माना गया है। यमुना का वास्तविक स्रोत जमी हुई बर्फ की एक झील और हिमनद चंपासर ग्लेशियर है। यह कालिंदी पर्वत पर स्थित है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, यमुनोत्री धाम असित मुनि का निवास स्थान था। यहां वर्तमान मंदिर का निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में करवाया। भूकंप से मंदिर का विध्वंस होने के बाद वर्ष 1919 में टिहरी के महाराजा प्रताप शाह ने इसका पुनर्निर्माण कराया। मंदिर के गर्भगृह में देवी यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति विराजमान है।

कैसे पहुंचें:

हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट है। यहां से यमुनोत्री की दूरी 210 किमी है।

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। यहां से यमुनोत्री की दूरी 223 किमी है।

सड़क मार्ग: सड़क के रास्ते से यमुनोत्री पहुंचने के लिए हरिद्वार-ऋषिकेश समेत अन्य प्रमुख शहरों से बस, टैक्सी व अन्य वाहनों की व्यवस्था है।

गंगोत्री

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उत्तरकाशी जिले में ग्रेटर हिमालय रेंज में स्थित गंगोत्री धाम को गंगा का उद्गम माना गया है। इस साल गंगोत्री धाम 7 मई दोपहर 11:30 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा। गंगा का उद्गम स्रोत यहां से लगभग 19 किमी दूर गोमुख स्थित गंगोत्री ग्लेशियर में है। मान्यता है कि श्रीराम के पूर्वज चक्रवर्ती राजा भगीरथ ने यहां भगवान शिव का कठोर तप किया था। शिव की कृपा से देवी गंगा ने इसी स्थान पर धरती का स्पर्श किया। यहां शिवलिंग के रूप में एक नैसर्गिक चट्टान भागीरथी नदी में जलमग्न है। कहते हैं कि प्राचीन काल में यहां मंदिर नहीं था। यात्रा सीजन में भागीरथी शिला के निकट मंच पर देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी जाती थीं। इन्हें श्याम प्रयाग, गंगा प्रयाग, धराली, मुखबा आदि गांवों से यहां लाया जाता था और शीतकाल में फिर इन्हीं स्थानों पर लौटा दिया जाता था। गंगोत्री दर्शन के लिए आप ऐसे पहुंच सकते हैं…

हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट है जहां से गंगोत्री की दूरी 226 किमी है।

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जहां से गंगोत्री की दूरी 251 किमी है।

सड़क मार्ग: हरिद्वार-ऋषिकेश से बस, टैक्सी या अन्य साधन लेकर गंगोत्री पहुंचा जा सकता है।

केदारनाथ

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चारधाम यात्रा का तीसरा पड़ाव केदारनाथ को माना जाता है मान्यता है कि तीर्थयात्री यमुना और गंगा के जल को यमुनोत्री और गंगोत्री से लाकर केदारनाथ का जलाभिषेक कर बाबा केदारनाथ को प्रसन्न करते हैं। रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस साल केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए गुरुवार (9 मई) सुबह 5:35 बजे खुल जाएंगे। केदारनाथ धाम के दर्शनों के लिए ऐसे जाया जा सकता है…

हवाई मार्ग: जौलीग्रांट नजदीकी हवाई अड्डा है जहां से केदारनाथ 239 किलोमीटर है।

रेल मार्ग: हरिद्वार और ऋषिकेश तक रेल से जा सकते हैं। ऋषिकेश से केदारनाथ की दूरी 229 किमी है।

सड़क मार्ग: हरिद्वार-ऋषिकेश से बस या टैक्सी लेकर जा सकते हैं।

बदरीनाथ

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चारधाम यात्रा में चौथा पड़ाव बदरीनाथ को माना जाता है। यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ के दर्शन करने के बाद यहां के दर्शन की परंपरा है। उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। इस साल बदरीनाथ धाम के कपाट 10 मई सुबह 4.15 बजे खुलेंगे। विष्णु पुराण, महाभारत व स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसे देश के पौराणिक चार धामों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यहां शालिग्राम पत्थर से बनी एक मीटर ऊंची श्रीविष्णु की मूर्ति है। मान्यता है कि इसे आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी के आसपास नारद कुंड से मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया था। इसे श्रीविष्णु की आठ स्वयंभू प्रतिमाओं में से एक माना जाता है। बदरीनाथ भगवान के दर्शनों के लिए ऐसे पहुंचें…

हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट है जहां से बद्रीनाथ की दूरी 317 किमी है।

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार, ऋषिकेश है। यहां से बद्रीनाथ 297 किमी दूर है।

सड़क मार्ग: हरिद्वार, ऋषिकेश के अलावा अन्य प्रमुख शहरों से बस, टैक्सी समेत अन्य सुविधाएं भी यहां के लिए हैं।

देश-विदेश के पर्यटकों की सुविधा के लिए निगम ने 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम की स्थापना की है। यहां हर तरह की मदद यात्रियों को उपलब्ध कराई जाती हैं:

कंट्रोल रूम नंबर- 0135-2746817, 2749308, 09568006639,

वॉट्सऐप नंबर-08859966001

इसके अलावा श्रद्धालु ऑनलाइन भी बुकिंग करा सकते हैं।

निगम की वेबसाइट है: gmvnl.in

फोन नंबर: 0135-2747898

ई-मेल: [email protected]