कश्मीर की बदली फिजा, जिला विकास परिषद के चुनाव का नही हो रहा बहिष्कार

जम्मू कश्मीर में धारा 370 की जंजीरों से आजादी के साथ ही लोकतंत्र भी बहिष्कार की सियासत से आजाद हो चुका है। जम्मू कश्मीर में बीते 73 साल में पहली बार जिला विकास परिषद के चुनाव हो रहे हैं और पहली ही बार प्रदेश में कहीं भी चुनाव बहिष्कार का नारा सुनने को नहीं मिल रहा है जो ये बता रहा है कि कश्मीर की फिजा बदल चुकी है।

 कश्मीरी वाम स्वीकार चुका बदलाव

जिस तरह से धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में केंद्र सरकार विकास के लिए काम कर रही है उससे प्रदेश के लोगों में अब विश्वास जाग रहा है कि सरकार उनके लिए कुछ कर रही है। तभी तो कश्मीर से आतंक का नामोनिशान धीरे धीरे कम होता जा रहा है तो वहां कि आवाम मुख्यधारा से जुड़ना चाह रही है। इस बात को वहां कि पार्टिया भी जान चुकी है इसीलिये चुनाव के बहिष्कार के बजाये वो चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है जो एक अच्छा संकेत है क्योकि इस कदम से राज्य में लोकतंत्र मजबूत होगा तो लोगों कि समस्या का हल भी जल्द से जल्द हो पायेगा और यही बात जानते हुए केंद्र ने पहले इस तरह के छोटे चुनाव करवाने की पहल की है। केंद्र सरकार वैसे भी कश्मीर में सीधे जनता तक योजना का फायदा पहुंचे इसके लिये कवायद में जुटी हुई है। इसका असर भी दिखने लगा है। सीमा से सटे गांवों में सड़के पहुंच चुकी है तो कश्मीर पहाड़ो में बसे गांव भी बिजली की रोशनी से चमक रहे है।

आतंकियों को नही मिल रही धमकी भरे पोस्टर चिपकाने के लिए दीवारें

जम्मू कश्मीर में शायद ही कभी कोई ऐसा चुनाव रहा होगा, जिसके बहिष्कार के लिए एलान न किया गया हो। बहिष्कार करने वालों में कई बार कश्मीर केंद्रित सियासत करने वाले दल भी शामिल होते रहे हैं। अलगाववादी खेमा हमेशा ही चुनाव बहिष्कार का एलान करता रहा है। आतंकी भी मौत के घाट उतारने की धमकी देते हैं। लेकिन इस बार मुख्यधारा की सियासत से जुड़े सभी दल चुनावी दंगल में अपना दमखम दिखाने की होड़ में लगे हुए हैं। अलगाववादी खेमा इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हो चुका है। आतंकियों को धमकी भरे पोस्टर चिपकाने के लिए दीवारें नहीं मिल रही हैं और ये सब हुआ है तो सिर्फ धारा 370 को खत्म होने पर क्योकि अब वहां कि अवाम पर किसी तरह की पाबंदी नजर नही आ रही है। लेकिन कुछ लोगो को ये बात नही भा रही है। क्योकि उनकी बरसो की सत्ता वहां खत्म हो चुकी है। इसीलिये वो फिर से खौफ का महौल बनाने में जुट गये है। हालाकि कश्मीर की आवाम इसका विरोध करती हुई नजर आ रही है। लेकिन इन लोगो के कड़वे बोल राज्य में तनाव पैदा कर सकते है लेकिन जिस तरह की फिजा कश्मीर में बदली है उससे ये तो कहां जा सकता है कि अब इनकी दाल नही गलने वाली क्योकि कश्मीर भी नये भारत की तरह विकास के पथ पर आगे बढ़ना पर चल पड़ा है।

फिलहाल चुनाव नजदीक आ रहे है और सभी पार्टी अपने उम्मीदवार की जीत के लिये कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है लेकिन ये तो तय है कि कश्मीर में इन चुनाव से विश्व को ये पता चल जायेगा कि कश्मीर की आवाम धारा 370 हटाने के साथ खड़ी थी और खड़ी रहेगी।

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