लाइव देख सकते हैं चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, ISRO दे रहा मौका

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कुछ हफ्तों पहले ही IndiaFirst ने अपने पाठकों को चंद्रयान-2 की लौन्चिंग के बारे में जानकारी दी थी| यह लौन्चिंग 14 और 15 जुलाई की रात 2 बजे श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस पोर्ट से होना है|

इसरो आम जनता को भी इस ऐतिहासिक घटना का प्रत्यक्षदर्शी बनने का मौका दे रहा है| जी हाँ इस लॉन्च को आम लोग देख सकें, इसके लिए ISRO ने ऑनलाइल रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है| इस बात की जानकारी ISRO ने ट्विटर के ज़रिये दी|

जानकारी के अनुसार वो लोग जिन्हें चंद्रयान-2 की ऐतिहासिक लौचिंग को लाइव देखना है वो ISRO की वेबसाइट पर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते है| रजिस्ट्रेशन की सुविधा 3 और 4 जुलाई की मध्यरात्रि 12 बजे से शुरू होगी|

फ़िलहाल इस लौन्चिंग की तैयारी श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस पोर्ट में चल रही है| मंगलवार को चंद्रयान-2 के रेडियो फ्रिक्वेंसी की जाँच की गई और इक्विमेंट-बे कैमरा भी लगाया गया| इसके साथ ही सभी पेलोड्स के एसेंबलिंग की जांच भी की गई|

ISRO का दूसरा चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद 2 क्रेटर मैंजिनस सी और सिंपेलिनस एन के बीच मौजूद मैदानी इलाके में उतरेगा, जहाँ पर अभी तक किसी भी देश ने कोई मिशन नहीं किया है| ख़बरों के अनुसार दक्षिणी ध्रुव का चुनाव इसलिए किया गया है, क्योंकि वहां ज्यादातर हिस्सा अंधेरे में रहता है और अँधेरे में होने के कारन इस हिस्से में पानी होने की संभावना ज्यादा है|

चंद्रयान-2 की खास बातें

ऑर्बिटरः चांद से 100 किमी ऊपर इसरो का मोबाइल कमांड सेंटर

वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा साथ ही ISRO से भेजे गए कमांड को रोवर तक पहुंचाएगा|

विक्रम लैंडरः रूस के मना करने पर इसरो ने बनाया स्वदेशी लैंडर

ISRO द्वारा निर्मित लैंडर का नाम विक्रम, इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है| इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने तैयार की थी बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया|

प्रज्ञान रोवरः इस रोबोट के कंधे पर पूरा मिशन, 15 मिनट में मिलेगा डाटा

चंद्रयान-2 की पूरी जिम्मेदारी एक रोबोट निभाएगा| 27 किलो के इस रोबोट के पास 2 पेलोड है| सूत्रों के मुताबिक चाँद की सतह पर ये करीब 400 मीटर की दुरी तय करेगा, इस दौरान ये रोबोट कई वैज्ञानिक प्रयोग भी करेगा, जिसकी जानकारी विक्रम लैंडर को भेजी जाएगी| फिर डाटा लैंडर से ऑर्बिटर पर भेजा जायेगा, और आखिर में ऑर्बिटर डाटा को ISRO सेंटर पर भेजेगा| इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट का समय लगेगा|

सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से होगी लॉन्चिंग

सूत्रों की माने तो इस बार ISRO चंद्रयान-2 की लौन्चिंग में अपने सबसे ताकतवर राकेट जीएसएलवी मार्क-3 का प्रयोग करेगा| लांच के करीब 55 दिन बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा|

गौरतलब है की चंद्रयान-2 भारत की अंतरिक्ष की सफलताओ में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला है| ये पुरे भारतवर्ष के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा जिसका हिस्सा हर कोई बनना चाहेगा|