चंद्रयान 2: मिशन चांद पर लैंडर विक्रम के सवाल, रोवर प्रज्ञान के जवाब

  • चांद पर कदम रखने को तैयार है चंद्रयान 2 का लैंडर विक्रम, देर रात लैंडिंग
  • चंद्रयान के दो हिस्से, रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम वहां उतरेंगे
  • ऑर्बिटर लगाता रहेगा चक्कर, रोवर करेगा चांद पर खोज, भ्रमण

आज की रात सभी भारतवासियों के लिए खास है, 48 दिनों के सफर के बाद चंद्रयान 2 चांद पर लैंड करनेवाला है। यान के दो हिस्से (लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान) चांद की सतह पर उतरेंगे। इसमें लैंडर विक्रम नील आर्मस्ट्रांग और रोवर प्रज्ञान उनके साथी बज एल्ड्रिन जैसे हैं। कल्पना के पंखों को थोड़ा उड़ान देकर अगर सोचें कि यात्रा के दौरान और चांद की तन्हाई में दोनों रोबॉट (प्रज्ञान और विक्रम) आपस में बात कर रहे होंगे, तो यह क्या होगी? विक्रम के मन में आपकी तरह मिशन को लेकर कई सवाल आए होंगे तो प्रज्ञान ने उनके कैसे जवाब दिए होंगे, जरा देखिए…

विक्रम: यार प्रज्ञान, हम चांद पर ऐसी जगह आए हैं जहां पहले कोई देश नहीं गया…इस पूरी ट्रिप पर कितना खर्च होगा?

प्रज्ञान: दोस्त, इसरो इसपर 978 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। यह मिशन कितना किफायती है इसका अंदाजा इसी से लगा लो कि हॉलिवुड की एक फिल्म है Interstellar, उसे बनाने में भी इस मिशन से ज्यादा पैसा लगा था।

विक्रम: अरे तुम्हें तो बहुत कुछ पता है, चलो चांद के बारे में कुछ बताओ

प्रज्ञान: चांद का वातावरण पृथ्वी जैसा नहीं है, ग्रेविटी भी पृथ्वी जैसी नहीं है। पृथ्वी और चांद में बेसिक फर्क क्या है यह वहां चल रही धूल भरी आंधी से तुम्हें पता चल जाएगा। यह पृथ्वी की प्राकृतिक सेटलाइट है। वैज्ञानिक ऐसा कहते हैं एक दिन यहां मनुष्य रहेंगे।

विक्रम: वैसे हम चांद पर जा क्यों रहे हैं?

प्रज्ञान: हम चांद की उत्पत्ति और इसके बदलावों के बारे में ज्यादा जानने के लिए निकले हैं। यहां रहने के दौरान हम तत्व, तापमान, वातावरण और यहां मौजूद केमिकल के बारे में स्टडी करेंगे। इसमें हमारा दोस्त ऑर्बिटर भी हमारी मदद करेगा।

विक्रम: ऑर्बिटर…? वह कौन है?

प्रज्ञान: ऑर्बिटर भी हमारे साथ मिशन पर है। वह उसी भूमिका में हैं जो अपोलो 11 मिशन में माइकल ने निभाई थी। हम उसी के साथ यहां तक आए हैं। हम यहां चांद पर उतरकर स्टडी करेंगे और वह चांद के ऑर्बिट में घूमेगा। यह चांद पर नहीं उतरेगा।

विक्रम: अच्छा! फिर ऑर्बिटर करेगा क्या?

प्रज्ञान: वह चांद की सतह की मैपिंग करेगा। हम भी प्राप्त जानकारी उसे ही भेजेंगे। वह यहां हाइड्रॉक्सिल (ऑक्सिजन और हाइड्रोजन) और पानी के अणुओं की तलाश करेगा।

चंद्रयान 2 से पृथ्वी की तस्वीर

विक्रम: अरे मैंने सुना है कि चांद पर मैं एक ही जगह रहूंगा, मतलब हिल भी नहीं पाउंगा?

प्रज्ञान: हां, ऑर्बिटर का काम चांद के चक्कर लगाना है। तुम एक ही जगह रहोगे, मैं चांद की सतह पर घूमूंगा। घूमने के दौरान मैं जो कुछ देखूंगा, रेकॉर्ड करूंगा वो सभी संदेश मैं डायरेक्ट पृथ्वी पर भेजने की जगह तुम्हें भेजूंगा। तुम्हारा मुख्य काम वैज्ञानिकों, ऑर्बिटर और मेरे बीच मेसेज लाने-ले जाने का होगा। वैसे यार मैं भी यहां ज्यादा दूर तक नहीं जा सकता। मेरी रेंज सिर्फ आधे किलोमीटर की है और स्पीड बस एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड।

विक्रम: बड़ा मेहनत का काम है यार! तो हम काम निपटाकर पृथ्वी पर कब वापस आएंगे?

प्रज्ञान: हम कभी नहीं लौटेंगे दोस्त। यही हमारी आखिरी मंजिल है। एक दिन जब पृथ्वी से कोई यहां आएगा तो हो सकता है कि हमें यहीं पाए।

(Disclaimer: This article is not written By IndiaFirst, Above article copied from navbharattimes)