चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर खोजे थे पानी के सबूत

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संस्थान द्वारा निर्मित चंद्रयान 2, चन्द्रमा की सतह पर कदम रखने से सिर्फ 2.2 किलोमीटर दूर था की कुछ अनजान कारणों से अंतिम समय में चंद्रयान के लैंडर से संपर्क टूट गया और इसरो अपने पहले प्रयास में चाँद पर कदम रखने से मात्र 2.2 किलोमीटर दूर रह गया| लेकिन अपने अंतिम लक्ष्य से एक कदम दूर रहने के बाद भी देश और दुनिया ने माना की ये इसरो की एक ऐतिहासिक कामयाबी है| विक्रम लैंडर का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों से संपर्क टूट जाने के बाद भी ऑर्बिटर पूरे एक साल तक चांद की कक्षा में मौजूद रहकर चांद पर शोध करने में मदद करेगा। इससे पहले भारत के चंद्रयान-1 मिशन (Chandrayaan-1) के दौरान भेजे गए शोध यान ने चांद की सतह पर पानी होने के सबूत खोजे थे। एक दशक पहले, इसरो ने अपना पहला मिशन चंद्रयान -1 शुरू किया था। यह कई मामलों में एक अद्वितीय मिशन था, जिसमें चंद्रमा पर पानी की खोज करने के लिए मुख्य ध्यान दिया गया था, खनिज और रासायनिक संरचना अध्ययनों से चंद्रमा की उत्पत्ति को समझने के लिए, चंद्र की सतह को अधिक से अधिक विस्तार से पता लगाने और पहचानने के लिए ये मिशन शुरू किया था ।

Chandrayaan-1 discovered water

2008 में लॉन्च किया था चंद्रयान-1

22 अक्टूबर, 2008 को इसरो ने अपने पहले चांद मिशन के तहत चंद्रयान-1 को लॉन्च किया था। इसे पीएसएलवी एक्सएल रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया गया था। इस मिशन के तहत इसरो ने एक ऑर्बिटर और एक इम्पैक्टर चांद की ओर भेजे गए थे। ऑर्बिटर को चांद की कक्षा पर रहना था और इम्पैक्टर को चांद की सतह पर उतरना था। चंद्रयान-1 आठ नवंबर, 2008 को चांद की कक्षा में पहुंचा था। इस मिशन की जीवनकाल दो साल थी। इस पूरे परियोजना पर 386 करोड़ रुपये की लागत आई थी।

इम्पैक्टर 18 नवंबर, 2008 को चांद से टकराया

चंद्रयान-1 के तहत चांद पर भेजा गया इम्पैक्टर शोध यान 18 नवंबर, 2008 को ऑर्बिटर से अलग होकर चांद की सतह से टकराया था। यह चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित शेकलटन क्रेटर (गड्ढे) के पास उतरा था। चांद के जिस हिस्सेक पर यह टकराया था, उसे जवाहर प्वा इंट नाम दिया गया है। इम्पैक्टर ने चांद की सतह से टकराने के दौरान उसकी मिट्टी को काफी बाहर तक खोद दिया था। इसी में पानी के अवशेष खोजे जाने थे।

11 विशेष उपकरण लगे थे

चंद्रयान-1 का कुल वजन 1,380 किग्रा था और चंद्रयान-1 में 11 विशेष उपकरण लगे थे। इसमें हाई रेजोल्यू शन रिमोट सेंसिंग उपकरण थे। इन उपकरणों के जरिये चांद के वातावरण और उसकी सतह की बारीक जांच की गई थी। इनमें रासायनिक कैरेक्टर, चांद की मैपिंग और टोपोग्राफी शामिल थे। इसी का नतीजा था कि 25 सितंबर 2009 को इसरो ने घोषणा की कि चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर पानी के सबूत खोजे हैं।

29 अगस्त, 2009 को चंद्रयान-1 का अभियान खत्म हुआ

चंद्रयान-1 की मिशन लाइफ दो साल की थी लेकिन करीब एक साल बाद ऑर्बिटर में तकनीकी खामी आने की वज़ह से इसरो ने 29 अगस्त , 2009 को चंद्रयान-1 मिशन बंद करने की घोषणा कर दी थी। लेकिन जुलाई, 2016 में नासा के वैज्ञानिकों ने ऐसा दावा किया की भारत का चंद्रयान-1 अभी भी मौजूद है और वह चांद की कक्षा पर चक्कभर लगा रहा है ।