किसानों के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बनाया PKVY योजना, जाने क्या है ये योजना

देश की बढती आबादी के खाद्य आपूर्ति के लिए अक्सर किसान अपने खेतों में रासायनिक खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल करते है जिससे फसल की उपज तो ज्यादा हो जाती है पर ये रासायनिक खाद और कीटनाशक खेतों की उपज की क्षमता को घटा देते है, कभी-कभी कुछ समय के लिए ये खेत बंज़र भी हो जाते है | साथ ही रासायनिक खाद से उपजे फसल के चलते लोगो की बिमारियों में भी बढ़ोतरी देखी गयी है | इस समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट में ‘जीरो बज़ट खेती’ का ज़िक्र किया था | बता दे की जीरो बजट खेती के तहत जरूरी बीज, खाद-पानी आदि का इंतजाम प्राकृतिक रूप से ही किया जाता है, इसमें मेहनत ज्यादा लगती है पर लागत कम होता है और सबसे ज़रूरी मुनाफा भी ज्यादा होता है | स्वतंत्र दिवस पर लाल किले से दिए गए PM मोदी के भाषण में भी उन्होंने किसानों से आर्गेनिक फार्मिंग करने की सलाह दी थी |

Organic_Farming

अब केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग से जोड़ने के लिए एक खास योजना तैयार कर रही है जिसका नाम है PKVY यानि की परंपरागत कृषि विकास योजना | आइये जाने क्या खास है, सरकार की इस योजना में :

किसानों के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने PKVY योजना तैयार की है | इस योजना के अंतर्गत सभी किसानों को, जो अपने खेतों में आर्गेनिक खेती करना चाहते है, उन्हें सरकार के तरफ से तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी | इस राशी का 61 प्रतिशत हिस्सा यानि की 31,000 रुपये जैविक कीटनाशकों और वर्मी कंपोस्ट को खरीदने के लिए दी जाएगी | उसके बाद किसानों को जैविक इनपुट की खरीददारी के लिए तीन साल में प्रति हेक्टेयर 7500 रुपये की मदद दी जाएगी | मिटटी के सही देख-रेख के लिए स्वायल हेल्थ मैनेजमेंट के तहत निजी एजेंसियों को नाबार्ड के जरिए प्रति यूनिट 63 लाख रुपये लागत सीमा पर 33 फीसदी आर्थिक मदद दी जाएगी | बता दे की जैविक खेती में किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद या कीटनाशक इस्तेमाल नहीं किया जाता है | इसके लिए जो भी खाद या कीटनाशक तैयार किया जाता है उसे प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है |

कैसा होगा आर्गेनिक फार्मिंग का बाज़ार ?

इंटरनेशनल कंपीटेंस सेंटर फॉर आर्गेनिक एग्रीकल्चर (ICCOA) का कहना है की 2020 तक भारत के जैविक उत्पादों का बाज़ार 1.50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है | वहीँ केंद्रीय आयात निर्यात नियंत्रण बोर्ड (एपीडा-APEDA) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में भारत के जैविक उत्पादों ने 1.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बाज़ार किया था वहीँ इसी वित्त वर्ष में भारत ने 4.58 लाख मीट्रिक आर्गेनिक उत्पाद एक्सपोर्ट किए थे जिससे उसे 3453.48 करोड़ रुपये का फायदा मिला था |

किसानों की चिंता पर सरकार का आश्वासन

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एक तरफ जहाँ सरकार किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग के लिए प्रेरित कर रही है वहीँ दूसरी तरफ किसानों को ये डर सता रहा है की आर्गेनिक फार्मिंग से कहीं उनके फसल की उपज घट न जाये | किसानों की चिंता को दूर करने के लिए सरकार ने आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही अपनी योजनाओं का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्टेंशन मैनेजमेंट द्वारा एक अध्ययन करवाया है जिसके रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्पादन लागत में 10 से 20 प्रतिशत तक तत्काल कमी देखी गई है वहीँ लागत में कमी के कारण आमदनी में 20-50 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गयी है |

सौ फीसदी आर्गेनिक स्टेट

जहाँ एक तरफ सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है वहीँ दूसरी तरफ सिक्किम राज्य ने वर्ष 2016 में ही अपने आप को 100 फीसदी एग्रीकल्चर स्टेट घोषित कर दिया था | APEDA के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के इस छोटे से प्रदेश ने अपनी 76 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रमाणिक तौर पर जैविक कृषि क्षेत्र में बदल दिया है यानि की यहाँ के खेतों में किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद और कीटनाशक इस्तेमाल नहीं किया जाता है |

इस ऊँचाई तक पहुँचने के लिए सिक्किम ने बहुत से कदम उठाये जिनमे प्रमुख था सिक्किम राज्य जैविक बोर्ड का गठन जिसके अंतर्गत सिक्किम आर्गेनिक मिशन तैयार किया गया | उसके बाद आर्गेनिक स्कूल और बायो विलेज भी बनाये गए | बता दे की वर्ष 2006-07 से ही सिक्किम राज्य ने सरकार से मिलने वाला रायानिक खाद का कोटा लेना बंद कर दिया था |