सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट (CGD) ने की आयुष्मान भारत योजना की सराहना

Ayushman Bharat Scheme

वाशिंगटन डीसी में स्थित नॉन प्रॉफिट थिंकटैंक, सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट ने आयुष्मान भारत योजना की सराहना की है|

इस योजना के एक वर्ष के कार्यकलाप और इस से हुए बदलाव पर हुए शोध में सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया है कि, “बीते वर्ष में आयुष्मान भारत योजना ने भारत में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में अहम् भूमिका निभाई है| एक ऐसे देश में जो विश्व का दूसरा सबसे आबादी वाला देश है, जहाँ की आबादी का एक बड़ा तबका पैसे के अभाव के चलते उचित चिकित्सा सेवाओं से वंचित था, वहां इस योजना की अत्यंत जरुरत थी और अभी तक ये योजना अपने मौलिक लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रही है|”

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उल्लेखनीय है कि पिछले साल 15 अगस्त को प्रधान मंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) को देश को समर्पित किया था| इस योजना की शुरुआत झारखण्ड से हुई थी, जिसके तरह देश के १० करोड़ परिवारों (लगभग ५० करोड़ नागरिक) को इस योजना का लाभ देने की बात थी| योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है| देश के १०,००० सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना से सूचीबद्ध हैं, जिसमे करीब २.६५ लाख बेड की उपलब्धता लाभार्थियों के लिए थी| इस योजना को ही आयुष्मान भारत या मोदीकेयर के नाम से भी जाना जाता है|

सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के सीओओ तथा इस शोध से जुड़े हुए एक अहम् शोधकर्ता अमांडा ग्लासमैन के अनुसार, “मोदीकेयर ने करोड़ो लोगों तक सरकार द्वारा अनुदानित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की है|” अपनी रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कहा कि, “हमने पाया की ५०० मिलियन (५० करोड़) से भी ज्यादा लोगों तक इस योजना का लाभ पहुंचा है| ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है| लेकिन इस योजना को आने वाले दिनों में और सफल बनाया जा सके, इस दिशा में अभी बहुत कार्य करने की जरुरत है| पहले साल इस योजना का उद्दयेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुँच बनाने की थी, लेकिन इस योजना की सफलता की दिशा में अगला कदम होना चाहिए, इस योजना के क्रियान्वयन में लगने वाले खर्च को कम करना|”

“एक ऐसे देश में जहाँ की आबादी १४० करोड़ से भी ज्यादा है, जिस देश प्रसव के दौरान होने वाली मौत की संख्या विश्व के कुल प्रसव सम्बंधित मौतों का एक तिहाई है, जहाँ चिकित्सा सेवाओं पर किया गया खर्च देश के सकल घरेलु उत्पाद का सिर्फ एक प्रतिशत है, वहां इस समस्या को दूर करना एक असंभव कार्य है| लेकिन मोदीकेयर ने इस दिशा में अत्यंत सराहनीय परिणाम दिया है|

इस रिपोर्ट की एक कॉपी पीटीआई को भी सौंपी गयी है|