25 नवंबर को इसरो लॉन्च करेगा कार्टोसैट-3, दुनिया का सबसे ताकतवर सैटेलाइट कैमरा होगा कार्टोसैट-3 में

Cartosat-3 will launch on 25 November

अंतरिक्ष से भारत की सरहदों की सुरक्षा के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो तीन अर्थ ऑब्जर्वेशन यानी सर्विलांस सैटेलाइट लांच करने जा रहा है। इनमे से एक इसरो 25 नवंबर को सुबह 9.28 बजे कार्टोसैट-3 सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC SHAR) से लॉन्च करेगा। इसे पृथ्वी से 509 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। कार्टोसैट-3 सैटेलाइट पीएसएलवी-सी47 (PSLV-C47) रॉकेट से छोड़ा जाएगा। 6 स्ट्रैपऑन्स के साथ पीएसएलवी की 21वीं उड़ान होगी। जबकि, पीएसएलवी की 74वीं उड़ान होगी। कार्टोसैट-3 के साथ अमेरिका के 13 अन्य नैनो सैटेलाइट भी छोड़े जाएंगे।

कार्टोसैट-3, कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट होगा। इससे पहले कार्टोसैट सीरीज का पहला सैटेलाइट कार्टोसैट-1 पांच मई 2005 को पहली बार लॉन्च किया गया था। 10 जनवरी 2007 को कार्टोसैट-2, 28 अप्रैल 2008 को कार्टोसैट-2ए, 12 जुलाई 2010 को कार्टोसैट-2बी, 22 जून 2016 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 15 फरवरी 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट, 23 जून 2017 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट और 12 जनवरी 2018 को कार्टोसैट-2 सीरीज सैटेलाइट लॉन्च किए गए। कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम (9.84 इंच) की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा। यानी आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देगा। बता दें कि पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर कार्टोसैट उपग्रहों की मदद ली गई थी। सभी प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम इस उपग्रह के जरिए अंतरिक्ष से जमीन पर 3 फीट की ऊंचाई तक की उम्दा तस्वीरें ली जा सकती हैं। इस सीरीज के उपग्रहों को सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने के लिए 26/11 मुंबई हमलों के बाद विकसित किया गया था।

कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है। संभवतः अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है। अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है। वहीं, इसी कंपनी का वर्ल्डव्यू-2 उपग्रह 18.11 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है। इसे पृथ्वी से 450 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

कार्टोसैट-3 का उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी और उसके आतंकी कैंपों पर नजर रखने के लिए होगी। अगर दुश्मन या आतंकियों ने कोई हिमाकत की तो इस आंख की मदद से हमारी सेना उन्हें उनके घर में घुस कर मारेगी।