हर मंच से किसानों के उत्थान की फिक्र

किसानों के उत्थान की फिक्र जितनी शास्त्री जी के शासन में देखी गई ठीक आज मोदी जी के शासन में भी देखी जा रही है। तभी मौका कोई भी हो पीएम मोदी हमेशा ये कोशिश करते हैं कि किसानों  के हितों को कैसे आगे बढ़ाया जाये। कुछ इसकी एक झलक विश्व के भारतीय वैज्ञानिक शिखर सम्मेलन में देखने को मिली ।

किसानों के लिये करें नये अनुसंधान

VAIBHAV समिट की शुरूआत करते हुए पीएम ने देश के और देश के बाहर के वैज्ञानिकों से अपील की कि वो किसानों के हित को ध्यान में रखकर काम करें जिससे उनकी आय तो बढ़े साथ ही साथ खेती करने में भी उनकी सहायता हो। प्रधानमंत्री ने विज्ञान को सामाजिक और आर्थिक बदलाव के प्रयासों का महत्वपूर्ण अंग बताया। उन्‍होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए अव्वल दर्जे का वैज्ञानिक अनुसंधान मुहैया कराना चाहती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने विज्ञान, अनुसंधान और शोध को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हम अपने किसानों की मदद के लिए हम अव्वल दर्जे का वैज्ञानिक अनुसंधान चाहते हैं। हमारे कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों ने दाल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है। यही वजह है कि हमारा अन्न उत्पादन रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा है। हम बहुत कम मात्रा में दाल का निर्यात कर पाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वक्‍त में युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने भी विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। यही नहीं सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में बदलाव की दिशा में हमारे प्रयासों का मूल असल में विज्ञान ही है। प्रधानमंत्री ने महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र करते हुए सभी का समर्थन मांगा। उन्‍होंने कहा कि इसमें वैश्विक कल्याण की भावना भी निहित है।

वैक्सीन के मामले में भारत आगे बढ़ रहा है

इस मौके पर पीएम मोदी ने कोरोना संकट पर भी अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा कि साल 2014 में हमारे टीकाकरण कार्यक्रम के तहत चार नए टीके लाए गए थे। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रोटा वायरस वैक्सीन भी शामिल थी। मौजूदा वक्‍त में भी सरकार स्वदेशी वैक्सीन के उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वक्‍त में यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अधिक से अधिक युवा विज्ञान में रुचि लें। इसके लिए हमें विज्ञान के इतिहास और इतिहास के विज्ञान से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। देश में जो कोरोना के वैक्सीन बनाये जा रहे हैं उनको लेकर भी अच्छी खबर आ रही है। दुनिया भारत की ओर विश्वास के साथ देख रही है कि कोरोना वैक्सीन बनाने में भारत जरूर सफल साबित होगा और इसे हम सबको मिलकर पूरा भी करना होगा।

इस सम्मेलन में 55 देशों के भारतीय मूल के 3000 से अधिक वैज्ञानिक और शिक्षाविद तथा 10 हजार से अधिक प्रवासी वैज्ञानिक और शिक्षाविदों ने शिरकत किया जो आने वाले दिनो में भारत को और आत्मिर्भर बनाने में मदद करेंगे।