विरोध-प्रदर्शन के बावजूद CAA को वापस नहीं लिया जाएगा: अमित शाह

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Amit Shah public meeting in support of CAA

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज लखनऊ में नागरिकता (संशोधन) कानून के समर्थन में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा है कि देशभर में जितने विरोध-प्रदर्शन हो जाएं सरकार नागरिकता कानून को वापस नहीं लेगी।

बता दे कि देश भर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। एक खास वर्ग के लोग केंद्र की मोदी सरकार से सीएए वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं दिल्ली और लखनऊ में सीएए के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि इस कानून में किसी की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर सभी विपक्षी पार्टियाँ अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीएए नागरिकता देने का कानून है। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के बाद भी सरकार इस कानून को किसी भी कीमत पर वापस नहीं लेगी।

अमित शाह ने इस कानून को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को चुनौती दी कि वो उनके किसी सार्वजनिक फोरम में चर्चा कर सकते हैं। चर्चा के लिए उन्होंने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, बसपा की मायावती और तृणमूल की प्रमुख ममता बनर्जी का नाम लिया।

Amit Shah public meeting in support of CAA

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि दिल्ली में देश विरोधी नारे लगाए जा रहे है। रैली में आए लोगों से अमित शाह ने पूछा कि देश विरोधी बात करने वालों को जेल में डालना चाहिए कि नहीं? उन्होंने कहा कि भारत माता के खिलाफ इस देश में अगर नारे लगे तो नारे लगाने वालों को मैं जेल की सलाखों के पीछे डाल दूंगा।

राम मंदिर के बारे में बात करते हुए रैली में अमित शाह ने घोषणा की कि अयोध्या में गगनचुंबी राम मंदिर का निर्माण तीन महीने के अंदर शुरू हो जाएगा।

बता दें कि देशभर में सीएए को लेकर लगातार हो रहे प्रदर्शन के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने इस कानून के संबंध में जागरुकता अभियान शुरू करने का ऐलान किया और इसी के बाद अमित शाह के अलावा कई अन्य केंद्रीय मंत्री भी जनसभा आयोजित कर रहे हैं।

आइयें नीचे दिए गए 10 प्वाइंट से समझते है कि आखिर नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से डरने की क्यों जरूरत नहीं है।

1. CAA पड़ोसी देशों से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है। इस कानून में किसी की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है और ना ही इसका NRC से कुछ भी लेना देना है।
2. असम में NRC की प्रक्रिया असम समझौते और माननीय सर्वोच्च नयायायल के आदेश पर की जा रही है।
3. यह गलत अफवाह है कि NRC सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही होगा। NRC के जरिए मुस्लिमों से भारतीय होने का सबूत मांगने की भी बात गलत है।
4. NRC के लिए आपको अपना कोई भी पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज देना होगा जैसा कि आप आधार कार्ड या मतदाता सूची के लिए देते हैं।
5. अगर NRC लागू होगा तो आपको अपने जन्म का विवरण जैसे जन्म की तारीख, माह, वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देना ही पार्याप्त होगा।
6. अगर NRC लागू होता है तो 1971 से पहले की वंशवाली साबित नहीं करना होगा। इस बारे में सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है।
7. असम के 19 लाख लोग NRC के तहत बाहर इसलिए हो गए क्योंकि वहां घुसपैठ की समस्या लंबे समय से चल रही है।
9. NRC के लिए मुश्किल और पुराने दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे, जिन्हें जुटा पाना बहुत मुश्किल होगा।
10. अगर कोई व्यक्ति पढ़ा लिखा नहीं है और उसके पास दस्तावेज नहीं है तो उसे गवाह, Community Verification के अलावा अन्य सुविधाएं दी जाएगी।

इसके बावजूद अब भी अगर आपके जहन में कोई सवाल और शंका है तो पीएम मोदी के इन सवाल-जवाब से अपने भ्रम और डर को दूर कर सकते हैं-

सवाल- CAA आने के बाद NRC लागू होगा. NRC के तहत अगर कोई हिंदू अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएगा तो उसे CAA के तहत यहां का नागरिक मान लिया जाएगा, लेकिन मुस्लिमों को धर्म की वजह से यहां का नागरिक नहीं माना जाएगा?

पीएम का जवाब- जो इस देश की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनकी पुरखे मां भारती की ही संतान थे, उन पर नागरिकता कानून और NRC दोनों का ही कोई लेना-देना नहीं है। सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं बल्कि नागरिकता देने के लिए है। हमारे तीन पड़ोसी देशों के वो अल्पसंख्यक, जो अत्याचार की वजह से वहां से भागकर भारत आने को मजबूर हुए हैं, उन्हें इस एक्ट में कुछ रियायतें दी गई हैं, कुछ ढील दी गई हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने किसी भी काम में लोगों के साथ भेदभाव नहीं किया। मैं विपक्ष को खुली चुनौती देता हूं कि मेरे किसी भी काम में भेदभाव खोजकर दिखाएं।’

वहीं एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि हमने अभी इस बारे में कोई जिक्र ही नहीं किया है। असम में हमने एनआरसी लागू नहीं किया था, जो भी हुआ वो सुप्रीम कोर्ट के कहने पर हुआ।

सवाल- अवैध मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा?

पीएम का जवाब: कांग्रेस और उसके साथी, शहरों में रहने वाले पढ़े लिखे नक्सली -अर्बन नक्सल, ये अफवाह फैला रहे हैं कि सारे मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा। कुछ तो अपनी शिक्षा की कद्र करिए। एक बार पढ़ तो लीजिए नागरिकता संशोधन एक्ट है क्या, NRC है क्या? अब भी जो भ्रम में हैं, मैं उन्हें कहूंगा कि कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गई डिटेंशन सेंटर की अफवाह सरासर झूठ है।

सवाल- लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कागजात जमा कराने होंगे?

पीएम का जवाब- आज जो ये लोग कागज-कागज, सर्टिफिकेट-सर्टिफिकेट के नाम पर मुस्लिमों को भ्रमित कर रहे हैं, उन्हें ये याद रखना चाहिए कि हमने गरीबों की भलाई के लिए इन योजनाओं के लाभार्थी चुनते समय कभी भी कागजों की बंदिशें नहीं लगाईं। वरना पहले तो ये होता था कि सरकार की योजना शुरू होने पर लाभार्थियों को तमाम तरह की तिकड़में लगानी पड़ती थीं, यहां-वहां चक्कर काटने पड़ते थे ताकि सरकारी लिस्ट में नाम जुड़ जाये। हमने ये सब बंद करा दिया। हमने तय किया की हर योजना का लाभ हर ग़रीब को मिलेगा।

दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम आज भारत में चल रही है। इस योजना ने देश के 50 करोड़ से ज्यादा गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा सुनिश्चित की है. राजनीतिक स्वार्थ के कारण, यहां की सरकार ने आयुष्मान भारत योजना दिल्ली में लागू नहीं की। इस योजना में तो किसी से नहीं पूछा जा रहा कि पहले आप अपना धर्म बताइए, फिर आपका इलाज शुरू किया जाएगा। फिर ऐसे झूठे आरोप क्यों, इस तरह के आरोपों के बहाने, भारत को दुनिया भर में बदनाम करने की साजिश क्यों?

सवाल- कांग्रेस सहित सभी बड़े विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि नागरिकता संशोधन कानून में मुस्लिम धर्म के धार्मिक पीड़ितों को शामिल नहीं करना संविधान की भावना के खिलाफ है?

पीएम का जवाब: पीएम मोदी ने इस सवाल के जवाब में महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा, ‘उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख साथियों को जब लगे कि उन्हें भारत आना चाहिए तो उनका स्वागत है। ये रियायत तब की भारत सरकार के वादे के मुताबिक है, जो बंटवारे के कारण उस समय अल्पसंख्यक बने करोड़ों भारतीयों के साथ आज से 70 साल पहले किया गया था।’

पीएम मोदी ने आगे कहा, मनमोहन सिंह जी ने संसद में खड़े होकर कहा था कि हमें बांग्लादेश से आए उन लोगों को नागरिकता देनी चाहिए जिनका अपनी आस्था की वजह से वहां पर उत्पीड़न हो रहा है, जो वहां से भाग कर भारत आ रहे हैं। एक दौर था जब असम के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण गोगोई जी भी चिट्ठियां लिखा करते थे, असम कांग्रेस में प्रस्ताव पास हुआ करते थे कि जिन लोगों पर बांग्लादेश में अत्याचार हो रहा है, जो वहां से हमारे यहां आ रहे हैं, उनकी मदद की जाए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी मांग करते थे कि जो हिंदू या सिख पाकिस्तान से भागकर यहां आए हैं, उनकी स्थिति सुधारी जाए।

 


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