CAA का असर: भारत छोड़ रहे अवैध बांग्‍लादेशी घुसपैठिए

सांकेतिक तस्वीर

बीएसएफ ने शुक्रवार को कहा कि CAA के लागू होने के बाद पिछले करीब एक महीने में स्वदेश लौटने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अर्द्धसैन्य बल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संशोधित नागरिकता कानून (CAA ) के अमल में आने के बाद अवैध प्रवासियों के बीच डर के कारण यह संख्या बढ़ी।

बीएसएफ के महानिरीक्षक (साउथ बंगाल फ्रंटियर) वाई बी खुरानिया ने संवाददाताओं से कहा कि उत्तर 24 परगना जिले के रास्ते ज्यादा संख्या में शरणार्थी वापस जा रहे हैं, जिसकी सीमा बांग्लादेश के साथ सटी हुई है। खुरानिया ने कहा, ‘पिछले एक महीने में सीमावर्ती देश जाने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। हमने केवल जनवरी में 268 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा जिनमें से अधिकतर लोग पड़ोसी देश जाने की कोशिश कर रहे थे।’

बीएसएफ सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए लगातार पेट्रोलिंग करती रहती है। इसके साथ ही बीएसएफ पुराने कटीले तारों के बाड़ को हटाने और उनकी जगह मजबूत नई फेंसिंग लगा रही है। कई जगह पुरानी बाड़ को एंटी-कट फेंसिंग से रिप्लेस भी किया जा चुका है। हालांकि इसके बावजूद सीमा पार से घुसपैठ नहीं रुक रही है।

देश छोड़ने वाले अधिकतर शरणार्थी करते थे ये काम

सीमा सुरक्षा बल के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि देश छोड़ने वाले अधिकतर शरणार्थी देश में मिस्त्री, नौकर और घर की देखभाल करने का काम करते थे। उन्होंने कहा, ‘देश छोड़ने की सर्वाधिक संख्या उत्तर 24 परगना जिले से है। उनमें से (शरणार्थी) अधिकांश बेंगलुरू और उत्तर भारत में रह रहे थे। कुछ मिस्त्री, नौकर, घर की देखभाल करने वाले और साफ-सफाई करने जैसे काम करते थे।’

BSF ने 2019 में 2194 बांग्लादेशियों को पकड़ा

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अधिकारी ने कहा कि बीएसएफ ने 2019 में 2194 बांग्लादेशियों को पकड़ा था जिनमें से अधिकतर अवैध रूप से भारत में घुसने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पिछले वर्ष दिसम्बर से चीजें बदल गई हैं। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ करीब 2216 किलोमीटर लंबी सीमा लगी हुई है, जिनमें अधिकतर हिस्से में बाड़ नहीं है।

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के वहां से भारत आए लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाया है। इसको लेकर दिल्ली के शाहीन बाग समेत कई जगह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

इन सबके बावजूद मोदी सरकार इस कानून को वापस लेने को तैयार नहीं है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि सरकार किसी भी कीमत पर नागरिकता संशोधन अधिनियम को वापस नहीं लेगी। यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है। इसका हिंदुस्तान के मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं हैं।

शेख हसीना ने सीएए को बताया भारत का आंतरिक मामला

वहीं, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से सीएए पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि “बांग्लादेश ने हमेशा यह कहा है कि सीएए और एनआरसी भारत के आंतरिक मामले हैं। भारत सरकार ने भी अपनी तरफ से बार-बार दोहराया है कि एनआरसी भारत की एक अंदरूनी कवायद है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से अक्टूबर 2019 के मेरे नई दिल्ली के दौरे के दौरान मुझे इसे लेकर आश्वस्त किया था।” उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मौजूदा दौर में सर्वश्रेष्ठ हैं और “व्यापक क्षेत्रों में” सहयोग हो रहा है।