हाथों में वैक्सीन लगवाकर अब देश के किशोर भी बने बाहुबली

कोरोना से लड़ाई में भारत ने एक कदम और आगे बढ़ा चुका है। यूं तो देश में तेजी के साथ वैक्सीनेशन किया जा रहा है लेकिन अब इसमें 15 से 18 साल के युवाओं को भी जोड़ दिया गया है यानी अब इनको भी वैक्सीन लगने लगी है और बच्चों में वैक्सीन को लेकर काफी उत्साह भी देखा गया।

देश भर में बच्चों का वैक्सीनेशन का काम शुरू

15 से 18 साल के युवाओं के वैक्सीनेशन की शुरुआत हो गई है। 18 साल से कम के युवाओं और बच्चों के लिए कोवैक्सीन को चुना गया है। इन बच्चों को कोरोना के खिलाफ वैक्सीन लेने के लिए कोविन अप्लिकेशन के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके साथ साथ सीधे वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन करवाने की सुविधा दी गई है। 2007 में या इससे पहले जन्म ले चुके सभी बच्चे कोरोनारोधी वैक्सीनेशन के लिए पात्र हैं। इस बीच देशभर से बच्चों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। वैसे भी कोरोना को हराने के लिये कोरोना गाइडलाइन और वैक्सीन ही एक ऐसी व्यवस्था है जिससे से कोरोना को हराया जाया जा सकता है।

वैक्सीनेशन को लेकर डर या आशंका का कोई कारण नहीं है

कोवैक्सीन सबसे ज्यादा सुरक्षित वैक्सीन होने की वजह से राज्य के कोरोना टास्क फोर्स से जुड़े विशेषज्ञों ने बच्चों के अभिभावकों को सलाह दी है कि बिना डरे या संकोच करे अपने बच्चों को वैक्सीन दिलवाएं। शरीर में वैक्सीन जिस जगह दी जाएगी वो भाग थोड़ा लाल हो जाएगा। वहां थोड़ा सा दर्द होगा और थोड़ा फीवर आ सकता है। यह सामान्य लक्षण है। इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है। आधा घंटा वैक्सीनेशन सेंटर पर रूकें, इसके बाद घर जाएं। अपने बच्चों को वैक्सीन दिलवाने में टालमटोल ना करें। यह कोरोना सुरक्षा कवच है जो बच्चों की बेहतरी के लिए है। इसलिए घबराने या शंका करने की कोई जरूरत नहीं है।

वैसे भी दुनिया में भारत के टीकाकरण अभियान की सबसे अधिक तारीफ हुई है। अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो भारत ने पहली डोज में अभी तक 90 फीसदी लोगों को लग चुकी है तो वही दूसरी डोज के मामले में भी भारत 63 फीसदी लोगों के लगा चुका है जो विश्व में सबसे ज्यादा है। जबकि अमेरिका की बात करे तो पहली डोज के मामले में वहां करीब 73 फीसदी और दूसरी डोज के मामले में 61 फीसदी तक ही हुई है। तो यूके में अभी तक पहली डोज लेने वालो का प्रतिशत करीब 75 फीसदी से कुछ ज्यादा है तो दूसरी डोज के मामले में ये 69 फीसदी से कुछ ज्यादा। ऐसे में ये आंकड़े यही बताते है भारत कोरोना से दूसरे देशों के मुकाबले काफी तेजी से निपट रहा है।