बक्सर जेल को 14 दिसम्बर तक 10 फांसी का फंदा तैयार करने का मिला निर्देश, निर्भया के गुनाहगार फांसी के लिए रहो तैयार

बिहार के बक्सर सेंट्रल जेल में फांसी का फंदा तैयार हो रहा है। जेल में बंद कैदी ही इस फांसी के फंदे को तैयार कर रहे हैं। बक्सर जेल में बनने वाली फांसी की रस्सी का काफी पुराना इतिहास रहा है। पूर्व काल से ही केवल बक्सर जेल में ही फांसी की रस्सी तैयार की जाती थी और उसे जहां जरूरत होती है वहां भेजा जाता है। गौरतलब है कि संसद हमले के मामले में अफजल गुरु को भी फांसी पर लटकाने के लिए बक्सर में ही रस्सी तैयार की गई थी।

एक बार फिर से इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं की सात साल पहले हुए निर्भया कांड में अब न्याय को अंजाम मिलने की तैयारी शुरू हो गई है। निर्भया के गुनहगारों को जल्द फांसी दी जा सकती है? उल्लेखनीय है की निर्भया के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही फांसी की सजा सुना दी थी लेकिन अभी तक फांसी नहीं हुयीं।

बक्सर जेल के अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा ने बताया की हमें पिछले सप्ताह जेल निदेशालय से 14 दिसंबर तक 10 फांसी के फंदा तैयार करने के निर्देश मिले थे। हमें नहीं पता कि ये कहां इस्तेमाल होने जा रहे हैं। हालांकि जो निर्देश मुझे मिला है उसी के का पालन करते हुए 10 रस्सियों को तैयार किए जाने का काम बक्सर सेंट्रल जेल में चल रहा है। उन्होंने बताया कि फांसी के एक फंदे को तैयार करने में लगभग तीन दिन लगते हैं। फांसी के फंदे का ज्यादातर काम हाथ से किया जाता है।

अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा ने फांसी के फंदे की लागत के बारे में बताया कि पिछली बार अफजल गुरु को जिस रस्सी को फांसी के लिए भेजा गया था उसे 1725 रुपए में बेचा गया था। हालांकी महंगाई और रॉ मटेरियल में की कीमतों में इजाफा होने के कारण इस बार तैयार की जाने वाली रस्सियों की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हो सकती है।

आपको बताते चलें कि बक्सर सेंट्रल जेल में तैयार होने वाले फांसी की रस्सी का काफी पुराना इतिहास रहा है। पहले बक्सर सेंट्रल जेल में फांसी की रस्सी बनाने के लिए मशीन भी लगाया गया था, लेकिन यह गुजरे जमाने की बात हो गई। अब यहां फांसी का फंदा जेल में बंद कैदी ही तैयार करते हैं। इन रस्सियों को तैयार करने के लिए खास किस्म के धागों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे मनीला रस्सी कहा जाता है। दरअसल किसी समय में फांसी का फंदा फिलीपिंस की मनीला जेल में तैयार होता था, इसकी वजह से फांसी का फंदा जिस रस्सी से बनता है, उसे मनीला कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि 1844 में अंग्रेजी हुकूमत ने बक्सर के केंद्रीय कारागार में फांसी के फंदा तैयार करने की फैक्टरी लगाई थी, तभी से देश में जो भी फांसी होती है इसी कारागार में कैदी ही फांसी का फंदा तैयार करते हैं।

यह अपने आप में दिलचस्प है कि देश में आजादी के पहले से अब तक जितनी फांसी दी गई हैं, उनमें बक्सर जेल में बनी मनीला रस्सी का ही इस्तेमाल हुआ है।