ममता के किले में मोदी की सेंध, कांग्रेस का पत्ता साफ़

सत्रहवीं लोक सभा चुनाव के रुझान सुबह 8 बजे से ही आने शुरू हो गये थे| 42 लोकसभा सीटों पर सात चरणों में हुए चुनाव के लिए ममता दीदी काफी आश्वस्त दिख रही थी| आज शाम तक मिले रुझानों में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को राज्य में बढ़त तो मिलती हुई दिखाई दे रही है। पर बीजेपी वहां के कई प्रमुख सीटों पर अपनी बढ़त बना ममता दीदी को कड़ी टक्कर दे रही है| ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी कितनी सेंध लगा पाएगी?

 

रविवार को आए अधिकतर एग्जिट पोल के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी को 19 से 21 सीट मिलने की बात कही गई थी| अब तक के रुझान में भी बीजेपी को 18 कांग्रेस को 1 और तृणमूल कांग्रेस को 23 सीटें मिल रही है| वही 2014 में तृणमूल कांग्रेस के पास 34 सीटें थी|

इस बार अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में 23 सीटों का लक्ष्य रखा था और तैयारी भी जोर-शोर से की थी| 2014 में 42 सीटों में से बीजेपी बस 2 सीटों पर अपनी जगह बना पाया था|

बंगाल में बीजेपी के पास हमेशा ही मजबूत संगठन का अभाव रहा है| पर इस बार अमित शाह की रणनीतियों ने अपना रंग दिखाया| बीजेपी की बढ़त का एक और कारण है, सत्ताधारी पार्टी के कथित उत्पीड़न और बढ़ती ताकत से जनता के मन में ममता सरकार के खिलाफ उत्पन्न अविश्वास| इस अविश्वास के साथ-साथ, सबका साथ और सबका विकास की विचारधारा पर बंगाल के मतदाताओं ने भरोसा दिखाया, जिसके फलस्वरूप बीजेपी को ममता के किले में सेंध करने में सफलता मिली|

इस चुनाव में बीजेपी का इतना अच्छा प्रदर्शन करने का बहुत बड़ा कारण मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) कैडर का जमीनी स्तर पर चुपचाप बीजेपी के लिए काम करना भी माना जा रहा है| इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य में बीजेपी ने दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है वाली कहावत सच कर दिखाई|